योगी के गोरखपुर में निषाद वोटर्स बिगाड़ सकते हैं रवि किशन का खेल

गोरखपुर के जातिगत समीकरण को ठेंगा दिखाते हुए रवि किशन का कहना है कि इसबार कोई जाति-पाति नहीं चलेगी और उन्हें निश्चित ही जीत हासिल होगी.

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साख वाली गोरखपुर लोकसभा सीट पर चुनावी घमासान जोरों पर है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जहां सिनेमा जगत के स्टार रवि किशन को टिकट दिया है, वहीं उनको चुनौती देने के लिए समाजवादी पार्टी ने रामभुआल निषाद को गठबंधन की ओर मैदान में उतारा है. मुख्य लड़ाई इन्ही दोनों के बीच मानी जा रही है. कांग्रेस ने बड़े स्थानीय वकील मधुसूदन तिवारी को मैदान में उतारा है.

गोरखपुर लोकसभा सीट का चुनावी इतिहास

गोरखपुर लोकसभा सीट पर नाथ पंथी गोरक्षपीठ का लम्बे समय तक कब्जा रहा है. पीठ के महंत ने 1989 से 2017 तक इस सीट पर लगातार 8 बार चुनाव जीता है. गोरखपुर भाजपा का गढ़ माना जाता है. 16 लोकसभा चुनावों में 7 बार भाजपा ने इस सीट पर चुनाव जीता है. 5 बार कांग्रेस ने इस सीट पर चुनाव जीता है. दो बार निर्दलीय, एक बार भारतीय लोक दल और एक बार समाजवादी पार्टी ने इस सीट पर कब्जा जमाया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस लोकसभा सीट से 1998 से लेकर 2017 तक पांच बार सांसद रहे हैं. उनसे पहले महंत अवैद्यनाथ इस सीट पर 4 बार सांसद रहे थे.

Yogi
योगी आदित्यनाथ गोरखपुर लोकसभा सीट से पांच बार सांसद रहे हैं.

2018 में उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने इस सीट को छोड़ दिया था. जिसके बाद यहां उपचुनाव हुए थे. जिसमे समाजवादी पार्टी व निषाद पार्टी के संयुक्त प्रत्याशी प्रवीण कुमार निषाद ने भाजपा के प्रत्याशी उपेन्द्र दत्त शुक्ला को हराया था. इस चुनाव ने कई मिथक तोड़ते हुए नए समीकरणों को भी जन्म दिया है.

गोरखपुर लोकसभा सीट पर जातियों का समीकरण 

 गोरखपुर में निषाद समाज के लोग बहुतायत में हैं. गोरखपुर में निषाद समाज के मतदाताओं की संख्या करीब 3.5 लाख है. यादवों और दलितों की बात करें तो यह करीब 2-2 लाख है. वहीं मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 1.5 लाख है. ब्राम्हणों की संख्या सिर्फ 1.5 लाख है. कुल मतदाताओं की संख्या 19.5 लाख के करीब है.

निषाद जाति के लिए कहा जाता है कि वह जहां वोट करता है, वो गोरखपुर की सीट जीतता है. गठबंधन ने यहां निषाद जाति के रामभुआल निषाद को प्रत्याशी बनाया है.वहीं भाजपा का प्रत्याशी ब्राह्मण है. बता दें कि, 2014 में रामभुआल निषाद बसपा से चुनाव लड़ें थे और तीसरे नंबर पर रहे थे. उनको 1,76,412 मत प्राप्त हुआ था.

ravi kishan, रवि किशन
रवि किशन 2014 लोकसभा चुनाव में जौनपुर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ें थे

भाजपा के लिए क्यों कठिन है ये चुनाव 

भारतीय जनता पार्टी के लिए ये चुनाव इस लिए कठिन हो गया है, क्योंकि सपा और बसपा मिलकर बड़ा वोटबैंक बनाते हैं. 2018 का उपचुनाव भी सपा ने बसपा के समर्थन से ही जीता था. सपा और बसपा का वोट बैंक देखा जाए तो- निषाद, मुस्लिम, यादव और दलित मतदाता अधिक संख्या में हैं. इसके साथ ही रवि किशन ब्राह्मण हैं और कांग्रेस ने उनका वोट काटने के लिए ब्राह्मण प्रत्याशी उतारा है. रवि किशन 2014 लोकसभा चुनाव में जौनपुर से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ें थे. तब उनको सिर्फ 42, 759 वोट मिले थे.

पिछले चुनावों में क्या रहे चुनावी आंकड़े

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार योगी आदित्यनाथ ने इस सीट पर जीत हासिल की थी. उनको 5 लाख 39 हजार 127 वोट मिले थे. दूसरे नंबर पर समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार राजमति निषाद रहीं. उन्हें 2 लाख 26 हजार 344 वोट मिले थे. बीएसपी के टिकट पर राम भुवल निषाद रहे थे. उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के बाद योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने और उन्हें यह सीट छोड़नी पड़ी.

इसके बाद साल 2018 में उपचुनाव कराए गए. उपचुनावों में एसपी-बीएसपी ने गठबंधन कर प्रवीण कुमार निषाद को उम्मीदवार बनाया. जबकि बीजेपी ने ब्राह्मणों को साधने के इरादे से उपेंद्र दत्त शुक्ला को टिकट दिया. उपचुनाव में गठबंधन का प्रयोग सफल रहा और प्रवीण निषाद ने उपेंद्र शुक्ला पर 21 हजार 881 वोटों से जीत हासिल की थी.