जिस वाराणसी से हुई मोदी युग की शुरुआत, उसके सियासी मूड की A-B-C-D

देश की सबसे वीआईपी सीट हमेशा ही वीआईपी रही है. आपको बताते हैं कि वाराणसी लोकसभा सीट आखिरकार हमेशा से क्यों सुर्खियों में रहती आई है और कब किसे यहां जीत-हार मिली.

वो साल 2014 था जब अचानक ही दिल्ली केंद्रित मीडिया की ओबी वैन, राजधानियों में डेरा डाले चुनाव विश्लेषक और चुनावी चकल्लसबाज़ वाराणसी का रुख करने लगे. नरेंद्र मोदी की राष्ट्रीय राजनीति में एंट्री से चुनाव पहले ही दिलचस्प हो चुके थे लेकिन अपने चुनाव के लिए जैसे ही उन्होंने वाराणसी का रुख किया वैसे ही खबरों के समंदर में नई लहरें उठनी शुरू हो गईं.
आइए आज आपको बताते हैं कि जिस वाराणसी से 2014 में जीतकर मोदी भारत की संसद में पहुंचे वो कब-कब किसे जीत का झंडा थमाता रहा है.

कांग्रेस का गढ़ था कभी वाराणसी
देश की आज़ादी के बाद जब पहला लोकसभा चुनाव शुरू हुआ तो 1952 में वाराणसी ने भी लोकतंत्र का स्वाद चखा. 1952, 1957 और 1962  में कांग्रेस के टिकट पर रघुनाथ सिंह ने जीत दर्ज की लेकिन 1967 में रघुनाथ सिंह को हराकर कम्युनिस्ट पार्टी के सत्य नारायण सिंह वाराणसी से सांसद बने. इसके बाद कांग्रेस ने राजा राम शास्त्री की बदौलत 1971 में वापसी तो की मगर इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव में (1977) भारतीय लोकदल के चंद्रशेखर ने वाराणसी की लड़ाई जीती.

narendra modi, जिस वाराणसी से हुई मोदी युग की शुरुआत, उसके सियासी मूड की A-B-C-D
युवा तुर्क चंद्रेशखर देश के प्रधानमंत्री रहे. वो भी एक बार वाराणसी से सांसद बने थे.

काशी ने देखा 1980 का यादगार चुनाव
1980 में मशहूर नेता कमलापति त्रिपाठी को जनता ने अपना सांसद चुना. वो इंदिरा की कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे. बेहद प्रभावशाली भी. तब कांग्रेस के धुर विरोध राजनारायण ने उनके खिलाफ ताल ठोकी. एक चर्चित किस्सा है कि उस चुनाव में राजनारायण ने चुनाव लड़ने के लिए त्रिपाठी तक से चंदा लिया था. वो चुनाव लड़े लेकिन कद्दावर कमलापति त्रिपाठी से करीब पच्चीस हज़ार वोटों से हार गए.

narendra modi, जिस वाराणसी से हुई मोदी युग की शुरुआत, उसके सियासी मूड की A-B-C-D
कांग्रेस के कद्दावर कमलापति त्रिपाठी यूपी के सीएम रहे. वाराणसी से जीतकर वो भी संसद पहुंचे थे.

कांग्रेस के हाथ से यूं फिसला बनारस
1984 में फिर चुनाव हुए. फिर कांग्रेस जीती. इस बार श्यामलाल यादव ने कम्युनिस्ट पार्टी को हराया.  श्यामलाल यादव कांग्रेस के बेहद मजबूत नेता रहे और राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन पद तक पहुंचे. लोकसभा चुनाव 2019 में गठबंधन की वाराणसी से उम्मीदवार शालिनी यादव इन्हीं श्यामलाल यादव की बहू हैं.
फिर 1989 का चुनाव आया. इस बार पूर्व पीएम लालबहादुर शास्त्री के बेटे अनिल शास्त्री ने जनता दल प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा. श्यामलाल यादव ने बड़े अंतर से सीट खो दी. अनिल शास्त्री को इनाम में मंत्री पद मिला लेकिन वीपी सिंह सरकार का पतन जल्द ही हो गया.

नब्बे के दशक में बीजेपी का वाराणसी
देश में बीजेपी का प्रादुर्भाव तेज़ी से हो रहा था. इसी दौर में 1991 का चुनाव आया. श्रीशचंद्र दीक्षित बीजेपी के प्रत्याशी बने और सीपीएम के राजकिशोर को शिकस्त देकर पहली बार अपनी पार्टी को वाराणसी में जीत दिला दी. दीक्षित पूर्व आईपीएस थे जो बाद में विहिप संग मिलकर राम जन्मभूमि आंदोलन में शामिल होकर गिरफ्तार हुए थे.  साल 1996 के चुनाव में एक बार फिर बीजेपी ने वाराणसी का किला फतह किया लेकिन इस बार नायक थे शंकर प्रसाद जायसवाल. यही जायसवाल 1998 के संसदीय चुनाव में भी वाराणसी से अपनी सीट कायम रखने में कामयाब रहे. 1999 के लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने उन पर भरोसा जताकर तीसरी बार टिकट दिया और वो फिर से जीते. साल 2004 में एक बार फिर शंकर प्रसाद जायसवाल को ही टिकट मिला लेकिन इस बार वो पिछली बार हारे कांग्रेस प्रत्याशी राजेश कुमार मिश्रा से शिकस्त खा गए. 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने मिश्रा पर फिर भरोसा जताया लेकिन इस बार वो चौथे नंबर पर आए. पहले नंबर पर पहुंच गए बीजेपी के मुरली मनोहर जोशी.

narendra modi, जिस वाराणसी से हुई मोदी युग की शुरुआत, उसके सियासी मूड की A-B-C-D
बीजेपी को सत्ता तक पहुंचानेवालों में से एक मुरली मनोहर जोशी ही मोदी से पहले वाराणसी के सांसद थे

राजनीति के मोदी युग की हुई शुरूआत
2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने नरेंद्र मोदी को अपना पीएम उम्मीदवार बनाया तो किसी अदद सीट की खोज शुरू हुई जिससे कई उद्देश्य एक साथ सध सकें. पहली बार गुजरात की राजनीति से बाहर निकले मोदी के लिए यूपी में वाराणसी की सीट बीजेपी के रणनीतिकारों को सबसे मुफीद लगी. जो सोचा गया वही हुआ भी. प्रचंड बहुमत के साथ बीजेपी ने केंद्र में तो सरकार बनाई ही, यूपी में गठबंधन के साथ मिलकर 80 में से 71 सीटें भी जीत लीं. पीएम मोदी ने अपने सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी अरविंद केजरीवाल को करारी शिकस्त दी.

narendra modi, जिस वाराणसी से हुई मोदी युग की शुरुआत, उसके सियासी मूड की A-B-C-D
मोदी ने राष्ट्रीय राजनीति में पदार्पण के लिए वाराणसी को चुना.

बहुत है खास है वाराणसी लोकसभा सीट
अब तक वाराणसी लोकसभा सीट पर हुए 16 संसदीय चुनावों में कांग्रेस 7 बार, बीजेपी 6 बार, जनता दल एक बार, सीपीएम एक बार और भारतीय लोकदल ने एक बार जीत दर्ज की है. सपा और बसपा इस सीट पर एक बार भी खाता नहीं खोल सकी हैं. इस बार गठबंधन का प्रत्याशी समाजवादी पार्टी के टिकट पर उतरा है जिसे बीएसपी और रालोद का समर्थन प्राप्त है.

narendra modi, जिस वाराणसी से हुई मोदी युग की शुरुआत, उसके सियासी मूड की A-B-C-D

कौन-कौन से बड़े नेता जीते
वाराणसी लोकसभा सीट पर चुनाव जीतनेवाले नेता बेहद खास रहे हैं. इस सीट से चुनाव जीतनेवाला एक नेता प्रदेश का मुख्यमंत्री तो दो नेता देश के प्रधानमंत्री रहे हैं. आइए एक नज़र डालते हैं उन नेताओं के नाम पर-
नरेंद्र मोदी- देश के वर्तमान प्रधानमंत्री और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री
चंद्रशेखर- युवा तुर्क कहे गए और देश के पीएम रहे
कमलापति त्रिपाठी- यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री रहे
श्यामलाल यादव- राज्यसभा के उप सभापति और यूपी सरकार में मंत्री रहे
मुरली मनोहर जोशी- मानव संसाधन विकास मंत्री रहे और बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष भी
अनिल शास्त्री- पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे
राजाराम शास्त्री- पूर्व शिक्षाविद और काशी विद्यापीठ के कुलपति रहे