EXCLUSIVE: हेमंत करकरे पर सवाल से तमतमा गईं प्रज्ञा ठाकुर, इंटरव्यू बीच में छोड़ा, देखिए VIDEO

टीवी9 भारतवर्ष के कंसल्टिंग एडिटर अजीत अंजुम ने प्रज्ञा ठाकुर से तीन सवाल किये. पहले दो सवाल का तो जवाब प्रज्ञा ने दिया लेकिन जैसे ही उनसे तीसरा सवाल किया वो कैमरे के सामने से हट गईं.

नई दिल्ली: भोपाल संसदीय सीट से भाजपा उम्मीदवार प्रज्ञा ठाकुर शहीद हेमंत करकरे पर दिए बयान पर चौतरफा घिर चुकी हैं. टीवी9 भारतवर्ष से बातचीत करते हुए प्रज्ञा ठाकुर तमतमा गईं और उन्होंने कैमरे भी छोड़ दिया. दरअसल, टीवी9 भारतवर्ष के कंसल्टिंग एडिटर अजीत अंजुम ने जब प्रज्ञा से तीसरा सवाल किया तो शायद वो उनको रास नहीं आया और वो कैमरा छोड़ कर उठ गईं.

कंसल्टिंग एडिटर अजीत अंजुम ने प्रज्ञा ठाकुर ने तीन सवाल किये. पहले दो सवाल का तो जवाब प्रज्ञा ने दिया लेकिन जैसे ही उनसे तीसरा सवाल किया वो कैमरे के सामने से हट गईं.

पहला सवाल- अजीत अंजुम ने उनसे सवाल किया, “हेमंत करकरे को पूरा देश शहीद के तौर पर जानता है. उन्हें अशोक चक्र मिला. उन हेमंत करकरे के लिए आपने जिस तरह के शब्द का इस्तेमाल किया, ये सब एक शहीद के लिए कहना लगता नहीं कि शर्मिंदगी वाला बयान है?” इस पर साध्वी ने कहा, “ऐसा है कि किसी को भी द्विपक्षीय बातें नहीं करनी चाहिए.

प्रज्ञा का जवाब- मैं एक ही बात कहूंगी कि जिस व्यक्ति को मैंने प्रत्यक्ष झेला है, उसके बारे यदि मैंने कहा है, तो उसकी सत्यता पता करनी चाहिए. दूसरी बात मेरा ये कहना है कि जो भी देशभक्ति का दमन करेगा, आतंकवाद से मरेगा.”

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दूसरा सवाल-  “वो देशभक्त थे. वो देश के लिए गोलियां खाए. जिस शख्स को देश ने एक जांबाज के तौर पर देखा, उसे आप देशद्रोही कहती हैं, उन्हें हिंदू विरोधी कह एक जामा पहनाती हैं और साथ में खुद को देशभक्त कहती हैं. आपने ऐसा क्या किया कि आप देशभक्त हो गईं और जो देश के लिए शहीद हुआ, वो हिंदू विरोधी हो गया? देशद्रोही हो गया और उसका सर्वनाश हो गया?”

प्रज्ञा का जवाब- इस सवाल पर प्रज्ञा ने कहा, “आप मुझसे ये प्रश्न न करें. मैंने जो कहा है, वह मैंने झेला है. जो व्यक्ति झेलता है, उससे अच्छा कोई नहीं जानता है. कानून के अंतर्गत गैरकानूनी काम करने वाला वो था, ये मैंने स्वंय झेला है. इससे ज्यादा मैं और क्या कहूं. इतनी गंदी गालियां देता था वो मुझे, इतनी भयानक गालियां देता था, वो मैं कैमरे के सामने नहीं बोल सकती. तब मैं एक ही बात कहती थी कि जा, अपनी बेटी से पूछ कि ये क्या होता है? क्या कहोगे आप इसको? था कोई इसका कानून? ये क्या कानून था कि मुझे 13 दिनों तक गैरकानूनी तरीके से रखा गया.”

उन्होंने आगे कहा, “ये कानून का रक्षक है क्या? किस प्रकार की बात करते हैं? हमारी संवेदना, संवेदना नहीं होती? कौन सी संवेदना, संवेदना होती है? ऑम्ले जब शहीद हुआ तो क्यों उसे पुरस्कार नहीं दिया गया? अगर वो ऑम्ले नहीं नहीं होता तो कसाब पकड़ा नहीं गया होता और दिग्विजय सिंह जैसे लोग हमें आतंकी सिद्ध कर देते। इसलिए प्रश्न समाज से करिए। प्रश्न कांग्रेसियों से करिए। ये समाज, ये देश उनको उत्तर देगा.”

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तीसरा सवाल-  “ये सही है प्रज्ञा सिंह अगर आपके साथ टार्चर हुआ तो आप अदालत में अपनी बात कहती. कोर्ट जाती. देश में प्रधानमंत्री मोदी, राजनाथ सिंह, महाराष्ट्र सरकार आपकी शुभचिंतक है. आप इन तमाम दरवाजों को खटखटातीं. लेकिन आज चुनाव के वक्त आप ऐसी कहानियां सुना रही हैं, और साथ में आप करकरे को देशद्रोही कह रही हैं. आपको यदि कांग्रेस से शिकायत थी तो आप कहिए. आपको हक है कहने का. लेकिन कांग्रेस से शिकायत के नाते आप हेमंत करकरे के लिए कह रही हैं, तो मुझे लगता है कि इसके लिए आपको एक बार सोचना चाहिए कि आप उन लाखों-करोड़ों लोगों की भावनाओं के साथ भी खिलावाड़ कर रही हैं चुनावी फायदे के लिए, जिन्होंने करकरे को शहीद माना है.” इस सवाल को सुनने के बाद साध्वी ने ईयरफोन अपने कान से निकाल दिया और उठ कर चली गईं.

मुंबई हमले में शहीद हुए हेमंत करकरे को लेकर शुक्रवार को भोपाल लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) प्रत्याशी प्रज्ञा ने विवादित बयान दिया था. उन्होंने कहा है कि करकरे को अपने कर्मों की सजा मिली है.

प्रज्ञा ठाकुर ने कहा था कि मैंने उसे श्राप दिया था कि तू इसका परिणाम झेलेगा. सर्वनाश हो जाएगा, तेरा अंत हो जाएगा, और अंत में उसके साथ वही हुआ. प्रज्ञा ने कहा कि मालेगांव केस में पूछताछ के दौरान मुझे इतनी गंदी गालियां दी गयी थी, जो कि मेरे लिए असहनीय थीं. हेमंत करकरे को लेकर मैंने जो भी कहा वो गलत नहीं कहा है. मुझे क्लीनचिट मिल गई है तो इसलिए अब कुछ लोग मुझसे डरे हुए हैं.

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प्रज्ञा ने कहा था कि कोई भी देशभक्तों की आवाज को बाहर लेकर नहीं जा पाए इसलिए भगवा आतंकवाद का नाम दिया गया. मेरे जवाब मैं नहीं भगवान खुद देंगे. कानून की प्रक्रिया है, अगर कोई अपनी बात रखना चाहता है तो कोर्ट में रख सकता है. भोपाल लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह पर भी उन्होंने जमकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह के अंदर नैतिकता नहीं है इसलिए वो अपना नामांकन वापस नहीं लेगें.

प्रज्ञा ने कांग्रेस को घेरते हुए कहा, “कांग्रेस ने मुझे 20 वर्ष पीछे किया है. मुझे 9 साल जेल में रखने के कारण मैं 20 साल पीछे चली गई हूं. उन्होंने विश्वास जताया कि मैं इस धर्म युद्ध को जीतूगीं. जो लोग घबराते हैं उन्हें घबराना चाहिए. मैं राष्ट्रकार्य करने निकली हूँ. धर्म कार्य करने निकली हूँ, इसे फतह करके ही दम लूंगी.”