“गूंगे-बहरे” बने रहे, इसलिए रामनाथ कोविंद को बनाया गया राष्ट्रपति: उदित राज

उन्होंने कहा कि भाजपा में कोई दलित बहरा और गूंगा बना रहे तो उसे कोई भी पद मिल सकता है. अगर समय की मांग होती और मैं भी गूंगा बना रहता तो मुझे प्रधानमंत्री भी बनाया जा सकता था.

नई दिल्ली: उदित राज, जिन्होंने हाल ही में कांग्रेस में शामिल होने के लिए भारतीय जनता पार्टी का साथ छोड़ा है, ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के बारे में अपमानजनक बयान दिया है. जिसने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है. उदित राज ने भारत के राष्ट्रपति को एक ‘बहरा और गूंगा’ दलित नेता बताया है.

उन्होंने कहा, “राम नाथ कोविंद 20 मई 2014 को अपने बायोडाटा के साथ मेरे घर आए थे और वह चाहते थे कि मैं उनके लिए पार्टी के भीतर उनकी बात रखूं ताकि उन्हें कोई पद मिल सके. मैंने भी कुछ प्रयास किए और उन्हें राज्यपाल बनाया गया. आखिरकार, वे राष्ट्रपति बन गए.”

उन्होंने आगे कहा, “यदि भाजपा में कोई दलित बहरे की तरह व्यवहार करता है, तो उसे सत्ता का कोई भी पद मिल सकता है. अगर समय की मांग होती और मैं भी गूंगा-बहरा बना रहता तो मुझे प्रधानमंत्री भी बनाया जा सकता था.”

टिकट कटने के बाद थामा था कांग्रेस का दामन

उत्तर पश्चिम दिल्ली सीट पर टिकट न दिये जाने के बाद राज ने पिछले सप्ताह कांग्रेस का दामन थाम लिया था. उन्होंने पहले भी बीजेपी पर दलित मुद्दों पर चुप्पी साधे रहने के चलते राम नाथ कोविंद को राष्ट्रपति पद के लिए नामित करने का आरोप लगाया था.

उदित राज ने कहा था, “उन्होंने(भाजपा) कोविंद को टिकट देने लायक भी नहीं माना था, जब वह (कोविंद) चाहते थे कि उन्हें टिकट दिया जाए. तो आप देख सकते हैं कि चुप रहने का क्या फायदा मिलता है, आज वह राष्ट्रपति हैं. अगर मैं चुप रहता, तो शायद भविष्य में जरूरत पड़ने पर वो मुझे प्रधानमंत्री भी बना सकते थे.”

दलितों का समर्थन करने के चलते नहीं मिला टिकट

उदित राज ने कहा, “भाजपा अपने उम्मीदवारों को चुनने के लिए आंतरिक सर्वेक्षण कराती है. भले ही मुझे सबसे लोकप्रिय माना जाता है, लेकिन फिर भी मुझे टिकट देने से इनकार कर दिया गया क्योंकि मैंने उनके प्रति हालिया विरोध प्रदर्शन में दलितों का समर्थन किया था.”

उदित राज ने दावा किया कि भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया क्योंकि उन्होंने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के कथित कमजोर पड़ने के खिलाफ 2018 में दलितों के समर्थन में आवाज उठाई थी. उन्होंने कहा, “मेरी गलती यह थी कि जब अधिनियम में बदलाव किया गया था, तो मैं भाजपा में बहरा और गूंगा नहीं था.”

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