सुप्रीम कोर्ट से विपक्ष को झटका, 50 प्रतिशत VVPAT वेरिफिकेशन वाली याचिका ठुकराई

नेता चाहते थे कि VVPATs की संख्या बढ़ाकर प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 50 फीसदी कर दी जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को वोटर-वेरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल से जुड़ी 21 विपक्षी पार्टियों की याचिका ठुकरा दी. विपक्ष की ओर से मांग की गई थी लोकसभा चुनावों में 50 फीसदी VVPAT स्लिप्‍स और EVMs का मिलान किया जाए. प्रधान न्‍यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने फैसले की समीक्षा करने से इनकार कर दिया.

पहले सुप्रीम कोर्ट ने हर विधानसभा सीट के पांच पोलिंग स्टेशंस पर EVMs के साथ VVPAT स्लिप्‍स लगाने के निर्देश दिए थे. नेता चाहते थे कि इसकी संख्या बढ़ाकर प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 50 फीसदी कर दी जाए.

सिर्फ 20,265 EVMs का होगा सत्‍यापन

अदालत का फैसला विपक्षी दलों के लिए एक तगड़ा झटका है. अदालत ने पेपर ट्रेल के इस्तेमाल से EVM सत्यापन की मात्रा मात्र 1.99 फीसदी बढ़ाई थी. यानी कुल 10.35 लाख ईवीएम में से मात्र 20,625 का सत्यापन किया जाएगा. शीर्ष अदालत के निर्देशानुसार, प्रत्येक जगह पर पांच ईवीएम की वीवीपैट पर्चियों की गिनती की जाएगी. अदालत ने बताया कि वीवीपैट में वृद्धि के लिए न तो अतिरिक्त जनबल की आवश्यकता होगी और न ही लोकसभा चुनाव के नतीजों में देरी होगी.

अदालत ने यह भी कहा कि आयोग ने भारतीय सांख्यिकी संस्थान से ईवीएम मशीनों को सत्यापित करने के लिए एक उचित नमूना आकार से संबंधित सवाल भी पूछा था. संस्थान ने जवाब दिया कि 479 ईवीएम का नमूना नतीजों में 99.99 फीसदी सटीकता देगा. विपक्षी दलों ने EVM मशीनों की संख्या बढ़ाकर 5.17 लाख करने की मांग की थी.

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