20 साल पहले सोनिया को विदेशी कहकर अलग हुए थे शरद पवार, NCP-कांग्रेस विलय पर क्या बोले

अगर ये दल एक बार फिर साथ में आ जाएं, तो ये विलय इन दोनों ही दलों के लिए संजीवनी का काम जरूर कर सकता है.
शरद यादव, 20 साल पहले सोनिया को विदेशी कहकर अलग हुए थे शरद पवार, NCP-कांग्रेस विलय पर क्या बोले

नई दिल्ली: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार गुरुवार को कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात करने पहुंंचे. उनकी इस मुलाकात के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में यह बात फैल गई कि एनसीपी 20 साल बाद कांग्रेस पार्टी में विलय कर सकती है. हालांकि शरद पवार ने मुलाकात के बाद इन अफवाहों का ऑफ द रिकॉर्ड खंडन कर दिया है.

मालूम हो कि 20वीं सदी का आखिरी चुनाव हारने के बाद कांग्रेस पार्टी दो धड़ों में बट गई थी. 1998 की हार के बाद अगले साल 25 मई 1999 में सीताराम केसरी के साथ मिलकर शरद पवार, तारिक अनवर और पी संगमा ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का गठन किया. अब ठीक दो दशकों बाद राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से इन दो पार्टियों के एक होने की खबर उठी.

दरअसल हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद को संभालना नहीं चाहते हैं. पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं से नाराज राहुल, उनसे मुलाकात तक नहीं कर रहे. ऐसे में एनसीपी प्रमुख की उनसे मुलाकात ने इस बात को और मजबूती दी कि एनसीपी कांग्रेस पार्टी में विलय कर सकती है.

2019 लोकसभा चुनाव में दोनों ही पार्टियों का प्रदर्शन बेहद खराब रहा. कांग्रेस पार्टी ने इन चुनावों में 52 सीटें जीती हैं तो एनसीपी को सिर्फ पांच सीटों पर ही जीत मिल सकी. ऐसे में दोनों पार्टियां विलय करती हैं तो इसी साल होने वाले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में उनके प्रदर्शन में सुधार हो सकता है. लेकिन ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर वो क्या कारण थे कि शरद पवार ने कांग्रेस पार्टी छोड़ नई पार्टी का गठन किया.

कांग्रेस पार्टी से क्यों अलग हुई थी एनसीपी?

दरअसल 1999 में कांग्रेस पार्टी सोनिया गांधी को पार्टी का अध्यक्ष बनाना चाहती थी. लेकिन शरद पवार इसके खिलाफ थे. उन्होंने सोनिया के विदेशी (इटेलियन) होने का मसला जोर-शोर से उठाया. जिसके कारण पार्टी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया और उन्होंने नई पार्टी का गठन किया.

आज सोनिया गांधी के विदेशी होने का मुद्दा गायब हो चुका है. अब यह कोई भी चुनावी मुद्दा नहीं रहा है. वैसे भी शरद पवार के सोनिया को विदेशी कहने के बाद भी सोनिया गांधी ने उनसे तल्ख व्यवहार नहीं रखा.

एनसीपी भी भले ही अलग पार्टी क्यों न बन गई हो लेकिन फिर भी वह कई बार कांग्रेस पार्टी नीत यूपीए में रही. राष्ट्रीय के साथ राज्य स्तर पर भी इन दोनों दलों के बीच कई बार गठबंधन हुआ. ऐसे में अगर ये दल एक बार फिर साथ में आ जाएं, तो कोई बड़ी बात नहीं है. बल्कि ये विलय इन दोनों ही दलों के लिए संजीवनी का काम जरूर कर सकता है.

ये भी पढ़ें: हार के बाद महागठबंधन में नेतृत्व पर कंफ्यूजन, जानिए तेजस्वी को लेकर मांझी क्या बोले..

Related Posts