रोम पोप का, मधेपुरा गोप का …फिर सही साबित हो रही कहावत

मधेपुरा लोकसभा सीट साल 1967 में अत्तित्व में आई थी. दिलचस्प बात ये है कि अबतक हुए 14 लोकसभा चुनावों में यादव समुदाय का प्रत्याशी ही सांसद चुना गया है.

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 के तीसरे चरण का मतदान आज हो रहा है. इस चरण में 13 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों की 117 लोकसभा सीटों पर जनता अपना सांसद चुन रही है. बिहार की बात करें तो तीसरे चरण में यहां की पांच सीटों पर वोटिंग चल रही है. इनमें बहुचर्चित मधेपुरा की सीट भी शामिल है.

मधेपुरा को लेकर एक कहावत मशहूर है, ‘रोम पोप का और मधेपुरा गोप का.’ इस कहावत का मतलब ये है कि जिस तरह से रोम में पोप ज्यादा रहते हैं उसी तरह से मधेपुरा में गोप यानी कि यादव समुदाय के लोगों का दबदबा रहा है.

यादव प्रत्याशी ही जीता अबतक
मधेपुरा लोकसभा सीट साल 1967 में अत्तित्व में आई थी. दिलचस्प बात ये है कि अबतक हुए 14 लोकसभा चुनावों में यादव समुदाय का प्रत्याशी ही सांसद चुना गया है. लोकसभा चुनाव 2019 में भी मधेपुरा सीट पर यादव प्रत्याशियों के बीच ही मुकाबला है.

एक तरफ, राष्‍ट्रीय जनता दल (राजद) से शरद यादव मैदान में हैं. दूसरी तरफ, जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने दिनेश चंद्र यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है. साथ ही निवर्तमान सांसद व जन अधिकार पार्टी के संरक्षक पप्‍पू यादव भी मधेपुरा से ताल ठोंक रहे हैं.

मोदी लहर के बावजूद जीते पप्पू यादव
पप्पू यादव लोकसभा चुनाव 2014 में राजद के टिकट पर मधेपुरा से जीते थे. उन्होंने 2014 में मोदी लहर के बावजूद मधेपुरा से जदयू के शरद यादव को करीब 56,000 मतों से हराया था. लेकिन इस बार पप्पू को राजद ने टिकट नहीं दिया है. वो अपनी पार्टी जेएपी से चुनावी मैदान में हैं.

मधेपुरा की सीट पर जाति आधारित राजनीति लंबे समय से होती रही है. यहां पर यादव मतदाता हमेशा से निर्णायक भूमिका निभाते रहे हैं. मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र में कुल 18.74 लाख मतदाता हैं. इनमें यादवों की संख्या सर्वाधिक 22.26 फीसदी है. दूसरे स्‍थान पर मुस्लिम मतदाता (12.14 फीसद) हैं.

सबसे ज्यादा जीते शरद यादव
शरद यादव ने मधेपुरा लोकसभा सीट पर सर्वाधिक तीन पर जीत दर्ज की है. इस बार वो राजद के टिकट से ताल ठोंक रहे हैं. बिहार की राजनीति के जानकार बताते हैं कि शरद यादव के लिए पप्पू यादव से पार पाना इस बार भी आसान नहीं होने वाला है. ये मुकाबला त्रिकोणीय भी हो सकता है.

मधेपुरा लोकसभा सीट से राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव का भी गहरा नाता रहा है. लालू यहां से दो बार सांसद चुने जा चुके हैं. निवर्तमान सांसद पप्पू यादव की बात करें तो वो भी यहां से अब तक दो बार चुनाव जीत चुके हैं. इस बार भी उनका पलड़ा भारी बताया जा रहा है.

CM नीतीश की प्रतिष्ठा दांव पर
जदयू सुप्रीमो व मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार की भी प्रतिष्‍ठा भी इस बार मधेपुरा सीट पर दांव पर है. सीएम नीतीश ने अपने मंत्री दिनेश चंद्र यादव पर भरोसा जताया है. मधेपुरा में पचपनिया मतदाताओं की भूमिका अहम रही है. इस समुदाय के लोग नीतीश कुमार को ही अपना नेता मानते रहे हैं.

मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र में जाति के हावी होने से विकास कार्यों को लेकर सवाल उठते रहे हैं. यहां से युवाओं का पलायन एक बड़ी समस्या के रूप से उभरा है. साथ ही किसानों की स्थिति भी काफी दयनीय बताई जाती है. ऐसे में देखना होगा कि मधेपुरा की जनता इस बार किस प्रत्याशी पर भरोसा जताती है और किसे अपना सांसद चुनती है.

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