शत्रुघ्न सिन्हा ने कही आडवाणी-जोशी जैसे वरिष्ठ बीजेपी नेताओं के ‘मन की बात’, देखें पूरा इंटरव्यू

काफी दिनों की उठापटक के बाद आखिरकार शॉटगन शत्रुघ्न सिन्हा ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है. कांग्रेस के साथ होते ही शत्रुघ्न सिन्हा ने बीजेपी पर करारा हमला बोला.

नई दिल्ली: पटना साहिब से सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने शनिवार सुबह कांग्रेस का दामन थाम लिया. कई दिनों से इस बात की अटकलें लगाई जा रही थी लेकिन उन्होंने नवरात्र के पहले दिन का चुनाव किया. टीवी9 भारतवर्ष की संवाददाता सुप्रिया भारद्वाज ने शत्रुघ्न सिन्हा से खास बातचीत की.

सवाल- आज का ही दिन क्यों चुना आपने? जब बीजेपी का स्थापना दिवस है उस दिन आप कांग्रेस का रुख कर गए वहां स्थापित हो गए?
जवाब- नहीं, तैयारी तो बहुत दिनों से थी, ऐसा लग रहा था कि अब पार नहीं लगेंगे हम लोग. बहुत हो गया. लोकशाही तानाशाही में बदल चुकी है. हमें निमंत्रण बहुत दिनों से था. हमारे कांग्रेस के मित्रों का था और दूसरी पार्टियों से भी था लेकिन आज ये महज इत्तेफाक है कि आज जब भारतीय जनता पार्टी का 39 वां स्थापना दिवस है उस दिन मैं कांग्रेस परिवार में राहुल जी और पूरे कांग्रेस परिवार के निमंत्रण पर और उनके समर्थन पर लालू जी की अनुमति और सहमति से जबकि वह हमारे पारिवारिक मित्र हैं लालू यादव, मैं कांग्रेस पार्टी में शरीक हुआ. आज ये स्थापना दिवस है इसलिए स्थापना दिवस पर अपनी वो पार्टी भारतीय जनता पार्टी जिसमें मेरा पालन-पोषण हुआ जिसमें मुझे इतने सालों ट्रेनिंग मिली, जहां मुझे ग्रूम किया गया, भारत रत्न नानाजी देशमुख, अटल बिहारी वाजपेई जी, लालकृष्ण आडवाणी जी और लोगों के जरिए, मैंने उनको प्रणाम किया, नमन किया और भारतीय जनता पार्टी को बधाई दी.

सवाल- सर कहीं ना कहीं टीस थी?
जवाब- हां, अंग्रेजी में कहूं तो पेनफुली मैं भारतीय जनता पार्टी छोड़कर हॉपफुली एक सही दिशा और नई दिशा में आने की कोशिश की है मैंने. उम्मीद करता हूं कि कांग्रेस के जरिए और कांग्रेस परिवार के साथ मिलकर हम सिर्फ देश को समाज को और अपने लोगों का भला कर पाएंगे उनको खुशहाली दे पाएंगे, उनके लिए हम अच्छा रिजल्ट लेकर आ सकेंगे .

सवाल- आडवाणी जी ने एक ब्लॉग लिखा उन्होंने भी कुछ उसी तरह से बातें उठाई जैसे आप ने उठाई जिस तरह आडवाणी जी के साथ और बाकी लोगों के साथ ट्रीटमेंट हो रहा है बीजेपी में उस पर भी आप काफी समय से बोलते रहे हैं.

जवाब- हां हां, बिल्कुल आडवाणी जी और हम एक फेज पर देख रहे हैं क्योंकि मैं उनका शिष्य रहा हूं. आडवाणी जी हमारे फ्रेंड फिलॉस्फर, गाइड गुरु और अल्टीमेट लीडर रहे हैं सिर्फ हमारे ही क्यों हमारे पूरे भारतीय जनता पार्टी के भी रहें . तो उन्होंने जो बातें कहीं बहुत सारी बातें मैंने उनसे अपने जीवन में सीखें और उनसे जो सीखे कि आज मैं देख रहा हूं, जब वो कह रहे हैं और मैं भी कहता रहा हूं, उनसे ही सीख कर कहता रहा हूं कि जो हमारा विरोधी है. जो विपक्ष में है वह हमारा दुश्मन नहीं है. वो हमारे समाज का, हमारे ही परिवार का किसी का चाचा मामा बेटा भांजा है, लेकिन दूसरी बात यह कि विरोधियों की बात को अगर आप नहीं मानते हैं, उनकी बात को स्वीकार एक्सेप्ट नहीं भी करते हैं तो उनकी बातों का रिस्पेक्ट करना चाहिए.

सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आपका विरोधी भी अगर कोई अच्छी बात करता है उस को सलाम करना चाहिए उसकी हौसला आफजाई करनी चाहिए. उसकी प्रशंसा करनी चाहिए, जैसे मिसाल के तौर पर अगर आज इतना बढ़िया बजट दिया है मेनिफेस्टो दिया है. कांग्रेस पार्टी ने राहुल जी ने यह 72 हजार सालाना का मनरेगा को और मजबूत करने का यह सारी बातें जो की हैं तो यह बहुत ही सराहनीय प्रशंसनीय और अनुकरणीय हैं इसकी तारीफ होनी चाहिए, लेकिन यहां लोग गलत मतलब निकाल लेते है.

अगर आपके मत का नहीं है तो यहां तानाशाही में लोग चले गए हैं. लोकशाही से वो कहते हैं ये गद्दार हैं यह देशद्रोही हैं राष्ट्रद्रोह कर रहा है लेकिन ऐसा नहीं है. इसलिए व्यक्ति से बड़ा पार्टी होता है पार्टी से बड़ा देश होता है हम जो बातें कहते हैं और करते हैं देशहित में कर रहे हैं, निस्वार्थ भाव से कह रहे हैं. अपने लिए कोई कट कमीशन नहीं मांग रहे, अपने लिए कोई यह नहीं कह रहा है कि हमें आप पैसा दो और हमें यह फैक्ट्री लगा दो, हमें लाइसेंस दो हम लोगों के लिए किसानों के लिए नौजवानों के लिए जवानों के लिए बेरोजगार के लिए काम करेंगे.

अगर नोटबंदी होती है तो मैं त्राहिमाम स्थिति देख रहा हूं, छोटे छोटे दुकानदार, व्यवसायियों, मजदूरों और पटरी वालों को देख रहा हूं तो मैं इनके लिए आवाज नहीं उठाऊ तो मैं क्या करूं, किस लिए आया हूं राजनीति में और वो भी जनता के द्वारा चुनकर किस लिए आया हूं. अगर देश में सबसे ज्यादा वोट शेयर लेकर आया हूं तो भी चुप रह जाऊं. अगर मैं देख रहा हूं कि यह लोग नहीं कह रहे हैं अपने स्वार्थ में अपनी पॉलिटिक्स में और प्रचार तंत्र का हिस्सा इतना बड़ा कर दिया कि अब हर चीज बताते हुए कि बहुत अच्छा हो रहा है ऐसा सही नहीं है.
नोटबंदी हो या जीएसटी हो या राफेल डील हो, मैंने राफेल डील में तो कभी नहीं कहा कि आप दोषी हैं लेकिन आप दोषी नहीं हैं यह भी नहीं कह सकता जब तक आप चंद बातों का जवाब ना दे दें खुलकर. आपका राफेल क्यों हुआ, दाम क्यों बढ़े, एचएलए की कीमत पर क्यों हुआ, आपका डिफेंस मिनिस्टर से लेकर अच्छे-अच्छे ब्यूरोक्रेट्स बोर्ड पर क्यों नहीं थे. जिनको होना चाहिए था आपने डील में. क्यों किया किस मंशा से किया. इन बातों पर जवाब देंगे तब अच्छा लगेगा नहीं तो जनता जो चिल्लाती है वह वो चिल्लाएगी.

सवाल- आपने कहा धीरे-धीरे बीजेपी लोकतंत्र से तानाशाही में बदल गई है इसका मतलब क्या?
जवाब- मतलब यह हुआ कि पहले कलेक्टिव डिसीजन चलता था. जब आप अटल जी का दौर देख चुके हैं अब मतलब बताने की जरूरत ही नहीं रही. लोकशाही तानाशाही में बदल गई जब आपने आडवाणी जी की हालत देख ली जब आपने मुरली मनोहर जोशी जी को कहीं नहीं पाया. इतना बड़ा विद्वान आदमी मुरली मनोहर जोशी जहां इतने बड़े इंटेलिजेंट अरुण शौरी की हालत कर दी उन्होंने जहां यशवंत सिन्हा जी को इतना मजबूर कर दिया कि उन्हें छोड़ना पड़ा इन बड़े-बड़े महारथियों के साथ ऐसा हुआ है. तो इस सवाल का मतलब क्या है अब तो बड़ी देर कर दी मेहरबा आते आते.

सवाल– आपने कहा वन मैन शो टू मैन आर्मी है
जवाब– बिल्कुल, क्योंकि वही चल रहा है. पीएममो ही सब चला रहा है वन मैन शो एंड 2 मैन आर्मी. किसी मंत्री को आप पहचानते हैं तो जानते नहीं, जानते हैं तो मानते नहीं, मानेंगे तो किसी के काम का नहीं जो उनके पास जाए. क्योंकि सारा काम तो पीएमओ कर रहा है आपने वह स्पेस खत्म कर दिया जो अटल जी के वक्त में होता था.