MP में ये तीन चर्चित महिला सांसद लोकसभा चुनाव से बाहर, कैसे होगी आधी आबादी सशक्त?

देश और प्रदेश के सभी दल आधी आबादी को सशक्त बनाने की वकालत करते हैं, लेकिन महिलाओं को टिकट देने में कतराते हैं. राजनीतिक दलों द्वारा 33 फीसदी महिलाओं को टिकट देने की बात अभी महज सपना है.

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा ख़ूब बुलंद हुआ. इतना ही नहीं कई बार पीएम मोदी ने महिलाओं के साथ समाज में हो रहे भेदभाव को ख़त्म करने और बराबरी की बात उठायी. केंद्रीय कैबिनेट का उदाहरण दिया और बताया कि बीजेपी (भारतीय जनता पार्टी) अपनी पार्टी के अंदर महिलाओं को कितना सम्मान देती है.

क्या यह बीजेपी का पूरा सच है इसको लेकर अब मन में संदेह पैदा होता है. पिछले लोकसभा चुनाव में मध्य प्रदेश से निर्वाचित हुईं तीन महिला सांसद इस बार चुनाव मैदान से बाहर हो गई हैं. इनमें दो केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज व लोकसभाध्यक्ष सुमित्रा महाजन मध्य प्रदेश सांसद रही हैं और तीसरी केंद्रीय मंत्री उमा भारती उत्तर प्रदेश से सांसद हैं, लेकिन उनका नाता मध्य प्रदेश से है और वह राज्य की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं.

तीनों बीजेपी नेता ने आगामी लोकसभा चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है.

हालांकि यह हाल सभी राजनीतिक पार्टियों का है. देश और प्रदेश के सभी दल आधी आबादी को सशक्त बनाने की वकालत करते हैं, लेकिन महिलाओं को टिकट देने में कतराते हैं. राजनीतिक दलों द्वारा 33 फीसदी महिलाओं को टिकट देने की बात अभी महज सपना है.

सुषमा स्वराज, सुमित्रा महाजन और उमा भारती की है ख़ास पहचान

राज्य से लेकर राष्ट्रीय राजनीति में मध्य प्रदेश के विदिशा संसदीय सीट से सांसद सुषमा स्वराज, इंदौर की सांसद सुमित्रा महाजन और राज्य के टीकमगढ़ जिले में जन्मी व पूर्व मुख्यमंत्री व वर्तमान में उत्तर प्रदेश के झांसी से सांसद केंद्रीय मंत्री उमा भारती की खास पहचान है.

लोकसभाध्यक्ष सुमित्रा महाजन इंदौर संसदीय सीट से लगातार आठ बार से निर्वाचित होती आ रही हैं. उन्होंने पहली बार 1989 में जीत दर्ज की थी और उसके बाद से यह सीट बीजेपी का गढ़ है.

बीजेपी ने 75 वर्ष की उम्र पार कर चुके नेताओं को उम्मीदवार न बनाने का निर्णय लिया है, जिसके कारण सुमित्रा महाजन ने स्वयं चुनाव न लड़ने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने शुक्रवार को एक पत्र लिखकर चुनाव न लड़ने की घोषणा की.

बीजेपी का गढ़ रहा है विदिशा संसदीय सीट

विदिशा संसदीय सीट भी बीजेपी का गढ़ है. केंद्रीय मंत्री सुषमा स्वराज पिछले दो चुनाव से विदिशा का प्रतिनिधित्व करती आ रही हैं, मगर स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने पहले ही आगामी चुनाव न लड़ने का ऐलान कर दिया था.

विदिशा सीट पर वर्ष 1967 के बाद से अब तक हुए लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को सिर्फ दो बार वर्ष 1980 और 1984 में जीत मिल पाई थी. दोनों बार कांग्रेस के उम्मीदवार प्रताप भानु शर्मा जीते थे.

इस संसदीय सीट पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी वर्ष 1991 में जीते थे. वाजपेयी तब विदिशा और लखनऊ दोनों जगह से चुनाव लड़े थे. बाद में उन्होंने विदिशा से इस्तीफा दे दिया था. उनके बाद पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पांच बार इस संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया. उनके बाद सुषमा वर्ष 2009 व 2014 में यहां से निर्वाचित हुईं.

उमा भारती ने चुनाव लड़ने से किया इनकार

देश की राजनीति में अपनी बेबाक टिप्पणी के लिए पहचानी जाने वाली केंद्रीय मंत्री और झांसी की सांसद उमा भारती ने भी आगामी चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है. मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में जन्मी और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती खुद चुनाव न लड़ने की वजह गंगा नदी के लिए काम करने को बता रही हैं. उमा इससे पहले खजुराहो और भोपाल संसदीय सीटों का भी प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं.

राजनीतिक विश्लेषक रवींद्र व्यास कहते हैं, “तीनों महिला सांसदों की अपनी विशिष्ट कार्यशैली है और उसी के चलते उन्हें राजनीति के पटल पर पहचाना जाता है. भारी जनाधार वाली इन महिला नेत्रियों के चुनाव न लड़ने से तीनों संसदीय क्षेत्रों में चुनाव के दौरान सूनापन तो रहेगा ही, साथ में पार्टी को उनके टक्कर के उम्मीदवार चुनना भी आसान नहीं रहने वाला है. बीजेपी जिस नए चेहरे को मौका देगी, उसकी तुलना पूर्ववर्ती सांसदों से होगी और यह स्थिति बीजेपी उम्मीदवारों के लिए चुनौती बन सकती है.”