पीएम मोदी की बायोपिक रिलीज मामले में फिर आया नया मोड़

सुप्रीम कोर्ट अब 15 अप्रैल को पीएम मोदी की बायोपिक रिलीज मामले पर सुनवाई करेगा. फिल्म के निर्माता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने आर्टिस्टिक फ्रीडम का गला दबा दिया है.

नई दिल्‍ली: पीएम नरेंद्र मोदी (PM Modi Biopic) के जीवन पर बनी फिल्म की रिलीज के मामले में एक बार फिर नया मोड़ आ गया है. पहले सुप्रीम कोर्ट ने PM Modi Biopic की रिलीज को लेकर गेंद चुनाव आयोग के पाले में डालते हुए कहा कि वही इस मामले में फैसला करे.

चुनाव आयोग ने 11 अप्रैल को यानी पहले फेज के मतदान के दिन होने वाली रिलीज को इलेक्‍शन तक के लिए टाल दिया. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद चुनाव आयोग ने PM Modi Biopic पर इलेक्‍शन तक के लिए रोक लगा दी.

अब चुनाव आयोग की ओर से PM Modi Biopic की रिलीज पर रोक लगाए जाने के बाद एक बार फिर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा.

इलेक्‍शन कमीशन की ओर से लगाई गई रोक को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चुनौती दी गई. फिल्म निर्माता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए कहा कि चुनाव आयोग ने आर्टिस्टिक फ्रीडम का गला दबा दिया है.

याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने 15 अप्रैल को सुनवाई करने की सहमति दे दी है.

क्‍या कहा था चुनाव आयोग ने?, पढ़ें

चीफ इलेक्‍शन कमिश्‍नर सुनील अरोड़ा, इलेक्‍शन कमिश्‍नर अशोक लवासा और सुशील चंद्रा ने कहा कि आयोग को तीन फिल्मों (पीएम नरेन्द्र मोदी, एनटीआर लक्ष्मी और उदयमा सिमहम) के प्रदर्शन से किसी राजनीतिक दल या राजनेता को चुनाव में लाभ पहुंचने की आशंका है, इसी के मद्देनजर इन पर रोक लगाने की मांग की गई थी. आयोग ने कहा कि इस तरह की फिल्मों का प्रदर्शन चुनाव आचार संहिता के प्रावधानों के अनुकूल नहीं है.

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