तेजबहादुर यादव का नामांकन क्‍यों रद्द हुआ? सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से 24 घंटे में मांगा जवाब

तेज बहादुर यादव ने आरोप लगाया है कि उनका नामांकन जान-बूझकर खारिज किया गया है.

नई दिल्‍ली: वाराणसी संसदीय क्षेत्र से बर्खास्‍त बीएसएफ जवान तेजबहादुर यादव का नामांकन खारिज होने के मामले में बुधवार (8 मई) को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. CJI रंजन गोगोई की अध्‍यक्षता वाली पीठ ने ने चुनाव आयोग से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है. तेजबहादुर यादव ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि रिटर्निंग अधिकारी ने गलत फैसला लिया.

तेजबहादुर यादव ने समाजवादी पार्टी के प्रत्‍याशी के रूप में वाराणसी से नामांकन किया था. वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है और वह दूसरी बार यहां से चुनाव लड़ रहे हैं. सपा ने पहले वाराणसी से शालिनी यादव को टिकट दिया था. हालांकि बाद में पार्टी अध्‍यक्ष अखिलेश यादव ने तेज बहादुर को उम्‍मीदवार बनाने का ऐलान किया.

चुनाव आयोग ने क्‍या वजह बताई?

वाराणसी के रिटर्निंग अधिकारी के अनुसार, तेजबहादुर यादव ने दो नामांकन दाखिल किए थे. सपा उम्‍मीदवार के रूप में उन्‍होंने जो दूसरा नामांकन भरा, उसमें उन्‍होंने एक सर्टिफिकेट नहीं लगाया था. डीएम ने बताया कि कोई भी व्‍यक्ति जो सेंट्रल गवर्नमेंट यानी गवर्नमेंट ऑफ इंडिया या स्‍टेट गवर्नमेंट में नौकरी कर रहा हो और उससे डिसमिस हुआ हो और उस डिसमिसल की तारीख पांच साल के अंदर की हो, यानी पांच साल खत्‍म नहीं हुए हों. ऐसे सभी केसेज में सेक्‍शन- 9 ऑफ रिप्रेजेंटेशन पीपुल एक्‍ट और सेक्‍शन 33 के सब-क्‍लॉज- 3, इन दोनों में ये बाध्‍य है कि वो कैंडिडेट एक सर्टिफिकेट लाएगा. यह सर्टिफिकेट इलेक्‍शन कमीशन ऑफ इंडिया देगा.

जो भी व्‍यक्ति है, वह देश के खिलाफ कोई काम करने की वजह से बर्खास्‍त न हुआ हो और उसकी बर्खास्‍तगी की वजह भ्रष्‍टाचार भी न हो. डीएम ने बताया कि तेजबहादुर को हमने मौका भी दिया, सुबह 11 बजे तक का, लेकिन कोई सर्टिफिकेट नहीं आया, पूरी सुनवाई के बाद तेजबहादुर का नामांकन रद्द कर दिया गया.

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