CJI रंजन गोगोई पर लगे कथित यौन उत्पीड़न के आरोप की हो जांच- सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन

एससीबीए के संयुक्त कोषाध्यक्ष रोहित पांडे ने कहा, गठित समिति ने तय किया कि इस मामले में फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट दाखिल की जाए.

नई दिल्ली: सीजेआई रंजन गोगोई पर लगे यौन शोषण के आरोपों ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने अपना रुख साफ किया है. सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का कहना है कि सीजेआई पर लगे कथित यौन उत्पीड़न के आरोप के मामले की जांच एसोसिएशन की कार्यकारी समिति द्वारा करायी जाए.

एससीबीए के संयुक्त कोषाध्यक्ष रोहित पांडे ने कहा, गठित समिति ने तय किया कि इस मामले में फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट दाखिल की जाए. कुछ ही देर पहले सुप्रीम कोर्ट एंप्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई पर लगे आरोपों को झूठा बताया था. एसोसिएशन ने पत्र लिखकर इस बात का खंडन किया है. पत्र में लिखा गया है कि एसोसिएशन ऐसे आधारहीन आरोपों का पूरी तरह से खंडन करता है. ऐसे आरोप संस्था को बदनाम करने की साजिश है.

भारत के प्रधान न्‍यायाधीश रंजन गोगोई पर एक महिला ने कथित यौन शोषण के आरोप लगाए हैं. दोनों पक्षों की तरफ से अब तक जो भी कहा गया है, उनमें दो बातें एक जैसी हैं. पहली कथित घटना की तारीख यानी 11 अक्‍टूबर और दूसरी, जगह यानी सीजेआई का आधिकारिक निवास. जूनियर असिस्‍टेंट रही जिस महिला ने आरोप लगाए हैं, वह 27 अगस्‍त 2018 तक सीजेआई के आवास पर तैनात थी.

जस्टिस रंजन गोगोई ने 3 अक्‍टूबर को सीजेआई का पदभार संभाला था. महिला का दावा है कि 11 अक्‍टूबर को उसका यौन शोषण हुआ. 19 अप्रैल को महिला ने सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों को एक हलफनामे के रूप में चिट्ठी लिखी. इसमें उन्‍होंने अपना अनुभव विस्‍तार से बताया था और वरिष्‍ठ सेनानिवृत्‍त जजों की एक विशेष जांच समिति बनाए जाने की मांग की थी.

महिला ने अपने हलफनामे में कहा है, “मैं सीजेआई के यौन प्रस्‍तावों के विरोध और इनकार की पीड़ा भोगती रही हूं. मेरे पूरे परिवार को परेशान किया गया.” महिला के पति और देवर दिल्‍ली पुलिस में काम करते हैं और पिछले साल दिसंबर में, दोनों को सस्‍पेंड कर दिया गया था. महिला का आरोप है कि छोटे देवर को भी सुप्रीम कोर्ट में एक अस्‍थायी नियुक्ति से बर्खास्‍त किया गया.