हार के कारणों पर चर्चा के लिए 31 मई को विपक्ष की बैठक, राहुल गांधी ले सकते हैं यह अहम जिम्मेदारी

राहुल गांधी इस बार के चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन से काफी खफा हैं और वे अपने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के लिए अड़े हुए हैं. वे पार्टी के पुराने नेता अशोक गहलोत, कमलनाथ और पी चिदंबरम से काफी खफा हैं.

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद से पार्टी के अंदर हलचल मची हुई है. कांग्रेस ने हार के संभावित कारणों पर चर्चा के लिए 31 मई को संसद में विपक्षी पार्टियों की एक बैठक बुलाई है. वहीं 1 जून को लोकसभा में कांग्रेस नेता चुनने के लिए पार्टी संसदीय दल की बैठक बुलाई गई है.

सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में नेता चुनने के साथ ही किसी सांसद को मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है.

पार्टी सूत्र ने यह भी बताया है कि बैठक संसद के केंद्रीय कक्ष में होगी और इसमें आगामी सत्र के लिए रणनीति पर भी चर्चा की जाएगी. कांग्रेस को इस चुनाव में पिछली बार की सीटों की तुलना में केवल आठ ज्यादा यानी 52 सीटें हासिल हुई हैं जिस वजह से सदन में उसके नेता को नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी एक बार फिर नहीं मिलेगी.

नेता प्रतिपक्ष चुने जाने के लिए कुल लोकसभा सीट का दस प्रतिशत सीट किसी एक पार्टी को मिलना ज़रूरी होता है.

पार्टी नेताओं के मुताबिक़ राहुल गांधी को लोकसभा में पार्टी के नेता की जिम्मेदारी दी जा सकती हैं. बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने यह स्वीकार कर लिया है कि वह लोकसभा में कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व करेंगे. वहीं, सोनिया गांधी एनडीए की अध्यक्ष बनी रहेंगी और परिवार खुद को पार्टी के रोजाना की गतिविधियों से दूर रखेगा.

ज़ाहिर है राहुल गांधी इस बार के चुनाव में कांग्रेस के प्रदर्शन से काफी खफा हैं और वे अपने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के लिए अड़े हुए हैं. वे पार्टी के पुराने नेता अशोक गहलोत, कमलनाथ और पी. चिदंबरम से काफी खफा हैं, जिन्होंने हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में अपने बेटों को जीत दिलाने का प्रयास किया और पार्टी के लिए काम नहीं करते दिखे.

जिसके बाद माना जा रहा है कि एक अंतरिम कार्यकारी अध्यक्ष और दो या इससे ज्यादा उपाध्यक्ष एक अध्यक्ष-मंडल का निर्माण करेंगे, जो पार्टी का संचालन करेगा और चुनाव व प्रचार की योजना बनाएगा. के.सी. वेणुगोपाल अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर, जबकि पृथ्वीराज चौहान उपाध्यक्षों में से एक के तौर पर उभर सकते हैं.

यह देखते हुए कि दक्षिण से इसबार 23 सांसद चुन कर आए हैं, ऐसा प्रतीत होता है कि दक्षिण भारत इस समय कांग्रेस के लिए सहारा बना हुआ है. या फिर अतीत को भुलाते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करे और सचिन पायलट, मिलिंद देवड़ा और अन्य युवाओं को साथ लेकर वह पार्टी के भाग्य बदलने का काम करें. पायलट और सिंधिया राहुल के ‘क्लीन अप’ प्रयास में साथ देने के लिए सबसे आगे हैं.

सूत्रों ने कहा कि लोकसभा हार के बाद सीडब्ल्यूसी बैठक में राहुल ने पार्टी के पुराने नेताओं पर निशाना साधा था. बताया जा रहा है कि हार का स्वाद चखने वाले युवा नेताओं को कोई खतरा नहीं है. वास्तव में पायलट और सिंधिया को राहुल गांधी के बदले पार्टी के चेहरा के तौर पर देखा जा रहा है.