VIDEO: जहां नक्सलियों ने 25 नेताओं को उतारा मौत के घाट, वहीं पर ग्रामीणों ने दी डर को मात

झीरम घाटी वही इलाका है जहां नक्सलियों ने 25 मई 2013 को बड़े नक्सली हमले में कई बड़े कांग्रेसी नेताओं को मौत के घाट उतार दिया था.
नक्सली हमला, VIDEO: जहां नक्सलियों ने 25 नेताओं को उतारा मौत के घाट, वहीं पर ग्रामीणों ने दी डर को मात

बस्तर: नेताओं की बेरुखी और लोकतंत्र पर ग्रामीणों के विश्वास की एक तस्वीर बस्तर में देखने को मिली. सुकमा जिले के झीरम घाट इलाके के ग्रामीण वोट देने के लिए 10 किलोमीटर तक पैदल चलकर गए. वो भी इन हालातों में जब नक्सलियों ने मतदान ना करने का फरमान जारी किया हुआ है.

बूथ तक पहुंचने के लिए नहीं है सड़क 
झीरम घाट वही इलाका है जहां नक्सलियों ने 25 मई 2013 को बड़े नक्सली हमले में कई बड़े कांग्रेसी नेताओं को मौत के घाट उतार दिया था. इसी पहाड़ी इलाके पर बसे गांव एलंगनार में आजादी के बाद से आज तक सड़क नहीं पहुंची. 1000 की आबादी वाले इस गांव को अपनी छोटी से छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी 10 किलोमीटर का सफर पैदल तय करना होता है.

नहीं पहुंचता आज तक कोई जनप्रतिनिधि
इस गांव में आज तक कोई भी जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचा है. इसके बावजूद आज ये ग्रामीण बड़ी संख्या में वोट देने के लिए अपने घरों से बाहर निकले हैं. इन ग्रामीणों को उम्मीद है कि इनके वोट देने से शायद इनके इलाके का भी विकास हो जाए.

कई बार नक्सली वारदात झेल चुका है ये गांव
झीरम घाट का ये इलाका कई बड़ी नक्सल वारदातों को झेल चुका है, यही वजह है कि एलंगनार गांव के पोलिंग बूथ को 20 किलोमीटर दूर टाहकवाडा में शिफ्ट किया गया है. एलंगनार के 357 मतदाताओं में से 200 से अधिक मतदाताओं ने अब तक अपने मताधिकार का प्रयोग कर लिया है. हालांकि ये ग्रामीण अब भी पूरी तरह नक्सली दहशत से उबर नहीं पाए हैं, कुछ ग्रामीण वोटिंग के बाद अपनी उंगली पर लगी स्याही को पत्थर से घिस मिटाते दिखे.

25 मई 2013
गौरतलब है कि साल 2013 में सुकमा जिले की दर्भा घाटी में माओवादियों ने कांग्रेस के नेताओं के काफिले पर हमला किया था. इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सलवा जुडुम के जन्मदाता कहे जाने वाले महेंद्र करमा सहित कांग्रेस के 25 अन्य नेता मारे गए थे. इनमें देश के पूर्व गृहमंत्री विद्या चरण शुक्ल और छतीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष नंद कुमार पटेल भी शामिल थे.

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