जब प्रज्ञा ठाकुर के सामने रखा शादी का प्रस्ताव, जानें साध्वी की पूरी कहानी

प्रज्ञा बचपन से ही काफी तेज तर्रार थीं. अपने बोलने की कला के चलते ही साध्वी ने बहुत जल्द ही परिषद के सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में पहचान बना ली.

नई दिल्ली: एक छोटे से शहर में पैदा हुई प्रज्ञा ठाकुर सामान्य परिवार में पली बढ़ी. लेकिन सियासत प्रज्ञा को शुरू से ही रास आने लगी थी. बचपन से ही प्रज्ञा बेहतरीन वक्ता थीं. लेकिन आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों ने प्रज्ञा ठाकुर की जिंदगी बदल दी. हालांकि प्रज्ञा से जुडे़ कुछ ऐसे रोचक राज भी हैं जिनसे बहुत कम लोग वाकिफ हैं. इनमें से एक उनके प्रेम प्रसंग का भी है. जिसके बारे में जानने से पहले प्रज्ञा के सफर पर नजर डालना जरूरी है.

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का जन्म मध्य प्रदेश के भिंड जिले के कछवाहा गांव में हुआ था. प्रज्ञा के पिता का नाम चंद्रपाल सिंह है जो एक आर्युवेदिक डॉक्टर थे. पिता लहार कस्बे के गल्ला मंडी रोड पर रहते थे और यहीं पर एक क्लीनिक चलाते थे. चंद्रपाल सिंह खुद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े थे. इसलिए प्रज्ञा को हिन्दूवादी शिक्षा घर से ही मिली.आरएसएस की ओर उनका झुकाव बचपन से ही रहा.

अच्छी वक्ता होने के कारण जल्द बना ली पहचान

प्रज्ञा बचपन से ही काफी तेज तर्रार थीं. हिस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुएट प्रज्ञा भाजपा की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सक्रिय सदस्य रहीं. विश्व हिन्दू परिषद की महिला विंग दुर्गा वाहिनी से भी वह जुड़ीं. अपने बोलने की कला के चलते ही साध्वी ने बहुत जल्द ही परिषद के सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में पहचान बना ली.

साल 2002 में साध्वी प्रज्ञा ने ‘जय वंदे मातरम जन कल्याण समिति’ बनाई. वहीं स्वामी अवधेशानंद से प्रभावित होकर उन्होंने संन्यास ले लिया. साध्वी का चोला पहनने के बाद प्रज्ञा कई संतों के संपर्क में आईं और प्रवचन करना शुरु कर दिया. साध्वी धीरे-धीरे मध्य प्रदेश को छोड़ती गईं और सूरत को अपनी कार्यस्थली बना लिया. आर्थिक स्थिति सुधरने के साथ-साथ प्रज्ञा ने सूरत में ही आश्रम भी बना लिया.

क्या हुआ जब साध्वी के जीवन में प्यार आया

जानकारी के मुताबिक प्रज्ञा के भाषण से प्रभावित होकर तत्कालीन बीजेपी एमएलए सुनील जोशी उन्हें दिल बैठे. सुनील जोशी ने साध्वी प्रज्ञा के सामने शादी का प्रस्ताव रख दिया. लेकिन प्रज्ञा ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया. प्रज्ञा ने कहा कि वो देश सेवा के लिए बनी हैं और इसी के लिए उन्होंने अपनी बिंदास लाइफ से सन्यास लिया.

जानकारी के मुताबिक मालेगांव ब्लास्ट में जब प्रज्ञा को गिरफ्तार किया गया था तो सुनील जोशी काफी गुस्से में आ गए थे और इसके विरोध में पूरे देश में प्रदर्शन का प्लान बना लिया था. हालांकि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने इसकी मंजूरी नहीं दी और ऐसा हो नहीं पाया. संघ के पूर्व प्रचारक सुनील जोशी की 29 दिसंबर 2007 में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

प्रज्ञा ठाकुर, जब प्रज्ञा ठाकुर के सामने रखा शादी का प्रस्ताव, जानें साध्वी की पूरी कहानी

जिसने प्यार का इजहार किया उसी की हत्या के लगे आरोप

सुनील जोशी की हत्या में प्रज्ञा को आरोपी बनाया गया था. प्रज्ञा ठाकुर को 23 अक्टूबर 2008 को गिरफ्तार किया गया था. साध्वी पर मालेगांव ब्लास्ट के साथ ही साथ सुनील जोशी की हत्या का भी आरोप लगा. हालांकि देवास की एक अदालत ने फरवरी 2017 में साध्वी प्रज्ञा और सात अन्य आरोपियों को बरी किया था.

कई लोगों का तो यहां तक मानना था कि प्रज्ञा ने सुनील जोशी की हत्या इसलिए कर दी थी क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं वो मालेगांव ब्लास्ट का राज ना खोल दें. NIA की जांच में भी ये बात सामने आई थी कि सुनील का प्रज्ञा के प्रति आकर्षण ही उनकी हत्या का कारण बना.

हत्या के आरोपों से तो प्रज्ञा बरी हो गई लेकिन मालेगांव बम धमाके ने साध्वी की जिंदगी को सलाखों के पीछे डाल दिया. NIA प्रज्ञा ठाकुर पर आरोप साबित नहीं कर सकी. आतंकवाद के आरोपों से घिरी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को 25 अप्रैल 2017 को बॉम्बे हाई कोर्ट ने सशर्त जमानत दे दी थी.

ये भी पढ़ें- EXCLUSIVE: हेमंत करकरे पर सवाल से तमतमा गईं प्रज्ञा ठाकुर, इंटरव्यू बीच में छोड़ा, देखिए VIDEO