गुरदासपुर में चलेगा बीजेपी का एक्टर फैक्टर या कांग्रेस का धुरंधर मारेगा बाजी?

बीजेपी ने सनी देओल को गुरदासपुर से खड़ा करके सेलिब्रिटी कार्ड खेला है. यहां की जनता एक अनुभवी राजनेता को उसके काम के दम पर वोट भी दे सकती है. ऐसे में बीजेपी का सेलिब्रिटि कार्ड विफल हो सकता है.
Gurdaspur lok sabha seat election 2019, गुरदासपुर में चलेगा बीजेपी का एक्टर फैक्टर या कांग्रेस का धुरंधर मारेगा बाजी?

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 के लिए 19 मई को आखिरी चरण के मतदान होंगे. पंजाब में 13 लोकसभा सीट हैं, जिनपर रविवार को वोट डाले जाएंगे. इससे पहले पंजाब की किसी भी सीट के लिए मतदान नहीं हुआ है. ऐसे में पंजाब के प्रत्याशियों को ज्यादा मौका मिला जनता को अपने वादों और अपनी बातों से उन्हें लुभाने का.

पंजाब की इन 13 सीटों में एक गुरदासपुर लोकसभा सीट भी है. 2019 के इन आम चुनाव में गुरदासपुर लोकसभा सीट राजनीतिक पार्टियों के लिए बहुत ही अहम है. यह सीट देश की नामी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के लिए नाक का सवाल बनी हुई है.

कांग्रेस ने इस सीट से राजनीति के अनुभवी उम्मीदवार सुनील जाखड़ को उतारा है. वहीं बीजेपी ने सुनील जाखड़ के सामने अभिनेता से राजनेता बने सनी देओल को चुनावी मैदान में उतारा है. सुनील जाखड़ के सामने सनी देओल को उतारकर बीजेपी गुरदासपुर सीट से एक बार फिर से एक्टर फैक्टर चलाने की कोशिश में है.

अगर पिछले कई चुनावों को देखा जाए तो इस सीट पर बीजेपी का काफी दबदबा रहा है. 1998, 1999, 2004, और 2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के उम्मीदवार और अभिनेता विनोद खन्ना यहां से जीतकर संसद पहुंचे थे.

2017 में विनोद खन्ना के देहांत के बाद इस सीट पर उपचुनाव हुआ, जिसके बाद कांग्रेस के सुनील जाखड़ ने गुरदासपुर लोकसभा सीट पर अपना कब्जा जमा लिया. हालांकि 1952 से लेकर अब तक के आम चुनावों पर गौर किया जााए तो कांग्रेस ने बीजेपी से ज्यादा इस सीट पर अपना परचम लहराया है. फिलहाल इस सीट से कौन चुनाव जीतता है यह तो 23 मई को आने वाले नतीजों से साफ हो जाएगा.

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आसान नहीं जीत की राह

गुरदासपुर जैसे सरहदी इलाके में चुनावी रण को फतह करना किसी भी राजनीतिक पार्टी के लिए इतना आसान नहीं होगा. राज्य में इस बार राजनीतिक हालात पिछली बार के मुकाबले थोड़े अलग हैं. गुरदासपुर का एक छोर पाकिस्तान की सीमा से लगता है तो वहीं दूसरी ओर से यह क्षेत्र जम्मू के इलाके से सटा हुआ है.

यहां कठुआ गैंगरेप को लेकर काफी बवाल मचा था और इससे गुरदासपुर के लोग तत्कालीन जम्मू-कश्मीर वाली बीजेपी और पीडीपी सरकार से काफी नाराज नजर आए थे. वहीं इलाके में बीजेपी के सहयोगी दल शिरोमणी अकाली दल को स्थानीय लोगों का समर्थन भी नहीं मिल रहा है. ऐसे में बीजेपी के लिए जीत की राह थोड़ी मुश्किल हो सकती है.

फिर राजनीति के धुरंधर जाखड़ पहुंचेंगे संसद?

Gurdaspur lok sabha seat election 2019, गुरदासपुर में चलेगा बीजेपी का एक्टर फैक्टर या कांग्रेस का धुरंधर मारेगा बाजी?

सुनील कुमार जाखड़ राजनीति के दिग्गज नेता बलराज जाखड़ के बेटे हैं. राजनीति उन्हें विरासत में मिली है. जाखड़ तीन बार विधायक भी रहे हैं. उन्होंने अबोहर सीट से साल 2002, 2007 और 2012 में पंजाब विधानसभा का चुनाव जीता था.

गुरदासपुर से बीजेपी सांसद विनोद खन्ना की मृत्यु के बाद जब उपचुनाव हुए तो कांग्रेस ने जाखड़ को यहां से मजबूत नेता के तौर पर खड़ा किया और बीजेपी के कद्दावर नेता प्रताप सिंह बाजवा को उन्होंने 1,36,065 के इतने बड़े अंतर से मात देकर बीजेपी से गुरदासपुर सीट छीन ली. हालांकि अभी परिस्थितियां बदली हुई हैं, क्योंकि उनके सामने सनी देओल को चुनावी मैदान में उतारकर अब बीजेपी ने फिर से एक्टर फैक्टर खेल दिया है.

सनी देओल की काफी अच्छी फैन फॉलोइंग है और पंजाब से उनका गहरा रिश्ता भी रहा है. सनी देओल के अलावा यहां से आम आदमी पार्टी के पीटर मसीह और पीडीए के लाल चंद भी चुनावी रण में हैं. ये दो राजनेता गुरदासपुर सीट पर वोट काटने का काम कर सकते हैं. ऐसे में सुनील जाखड़ के लिए फिर से संसद पहुंचना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

अनुभवी राजनेता को मात देने में कामयाब होंगे सनी देओल?

Gurdaspur lok sabha seat election 2019, गुरदासपुर में चलेगा बीजेपी का एक्टर फैक्टर या कांग्रेस का धुरंधर मारेगा बाजी?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी का ‘ढाई किलो का हाथ’ कांग्रेस उम्मीदावर सुनील जाखड़ पर भारी पड़ सकते हैं. सनी देओल के लिए बीजेपी के कई बड़े राजनेताओं ने चुनाव प्रचार किया. वहीं सनी के पिता धर्मेंद्र भी उनके लिए प्रचार के लिए पंजाब पहुंचे थे.

सनी ने अपने रोड शो और रैलियों में अपने मशहूर डायलॉग्स से लोगों को प्रभावित करने की कोशिश की है. गुरदासपुर में करीब डेढ लाख वोटर हैं और जिस तरह अपनी दमदार आवाज से सनी देओल ने लोगों की मांग पर अपनी फिल्मों के डॉयलॉग बोले, जो उन्हें काफी भाया. हो सकता है कि युवा का रुझान अनुभवी नेता जाखड़ की तरफ न जाकर सनी देओल की तरफ जाए.

वहीं सनी देओल रैलियों में यह भी कहते हुए नजर आए कि उन्हें राजनीति करना नहीं आता लेकिन गुरदासपुर के लोगों की समस्याओं के लिए वे जरूर काम करेंगे. बीजेपी ने सनी देओल को गुरदासपुर से खड़ा करके सेलिब्रिटी कार्ड खेला है. सनी देओल को गुरदासपुर की जनता ने कितना पसंद किया ये तो उनके रोड शो में आए भारी हुजूम से ही पता चलता है. हालांकि यहां की जनता एक अनुभवी राजनेता को उसके काम के दम पर वोट भी दे सकती है. ऐसे में बीजेपी का सेलिब्रिटी कार्ड विफल हो सकता है.

कितने हैं वोटर्स

गुरदासपुर में 1,500,337 रजिस्टर्ड वोटर्स हैं, जिनमें 7,84,477 पुरुष हैं और 7,15,860 महिलाएं हैं. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में 7,43,406 पुरुष और 6,04,565 महिलाएं वोटर थीं.  इन चुनावों में कुल 69.50 प्रतिशत वोट डाले गए थे.

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