‘राष्ट्रप्रेम में पूरा देश पगलाया हुआ है’, टिकट मिलते ही बोले रवि किशन

गोरखपुर के जातिगत समीकरण को ठेंगा दिखाते हुए रवि किशन ने कहा कि इसबार कोई जाति-पाति नहीं चलेगी और उन्हें निश्चित ही जीत हासिल होगी.
रवि किशन, ‘राष्ट्रप्रेम में पूरा देश पगलाया हुआ है’, टिकट मिलते ही बोले रवि किशन

लखनऊ: राष्ट्रप्रेम में पूरा देश पगलाया हुआ है. इस वक्त सिर्फ देश प्रेम ही मुद्दा है. सबको देश की सुरक्षा और मोदी जी चाहिए हैं. बाकी कुछ नहीं कोई जात-पात नहीं है. सबको चाहिए मोदी जी. कुछ ये बोल थे भोजपुरी अभिनेता और बीजेपी नेता रवि किशन के जब वह गोरखपुर से लोकसभा का टिकट मिलने के बाद पहली बार लखनऊ की जमीन पर उतरे थे तब.

गठबंधन को फ्लॉप शो बताने वाले भोजपुरी सुपरस्टार ने कहा कि वह अब सही झंडे के नीचे हैं. उन्होंने कहा, ‘कमल का फूल उसपर मोदी जी और योगी जी का चेहरा. यह अपने आप में एक चिन्ह है. इसके नीचे हम उनके सिपाही बनकर खड़े हैं. तो जीत पक्की है. वो भी ऐतिहासिक जीत.’ गोरखपुर के जातिगत समीकरण को ठेंगा दिखाते हुए रवि किशन ने कहा कि इसबार कोई जाति-पाति नहीं चलेगी और उन्हें निश्चित ही जीत हासिल होगी.

भले ही वह इस क्षेत्र में जातिगत समीकरण को हल्के में ले रहे हों. लेकिन जातिगत समीकरण का गोरखपुर सीट पर हमेशा से ही गहरा रिश्ता रहा है. यहां हमेशा से मुकाबला ब्राह्मण बनाम क्षत्रीय का रहा है. यहां यह बता दें की रवि किशन भी शुक्ला हैं और ब्राह्मण हैं. जानकारों की मानें तो उनको टिकट दिए जाने के पीछे का एक कारण है कि बीजेपी अपने कोर वोटर्स ब्राह्मणों को रवि किशन शुक्ला के जरिए साधना चाहती है.

गोरखनाथ मठ का हमेशा से गोरखपुर लोकसभी सीट पर रहा है असर

जातिगत समीकरण के साथ-साथ गोरखनाथ मठ का भी इस सीट पर खासा असर है. 1989 से पिछले लोकसभा चुनाव तक तो लगातार मठ का महंत ही इस सीट पर जीतता आया है. मठ और क्षत्रीय मतों को दरकिनार कर पिछले दिनों उपचुनाव के दौरान बीजेपी ने यहां ब्राह्मण वोटरों को साधने के लिए एक प्रयोग किया था. जिसमें उसे गठबंधन के हाथों हार का सामना करना पड़ा था.

योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश के सीएम पद पर विराजमान होने के बाद उनकी गोरखपुर सीट से बीजेपी ने उपचुनाव में उपेंद्र दत्त शुक्ला को उम्मीदवार बनाया था. तब भी बीजेपी उम्मीदवार वैसे ही दावे ठोक रहे थे जैसे आज रवि किशन कर रहे हैं. हालांकि तब सबको चौंकाते हुए बीजेपी को गठबंधन के हाथों मात खानी पड़ी थी.

दरअसल इसके पीछे सिर्फ गठबंधन की एकजुटता ही कारण नहीं थी. जातिगत समिकरण ने भी अहम भूमिका निभाई थी. जिसको रवि किशन कोई भाव देने को राजी नहीं हो रहे हैं. उपचुनाव के जरिए इसे समझा जाए तो जानकारों का मानना है कि गोरखपुर में मुकाबला हमेशा से ब्राह्मण बनाम ठाकुर का होता रहा है. शुक्ला की उपचुनाव में हुई हार इसी का उदाहरण है. एक तो वह गोरखनाथ मठ से बाहर के सदस्य थे और दूसरा वह ब्राह्मण थे.

निषाद समुदाय भी तय कर सकता है जीत का रुख

गोरखपुर में निषाद समुदाय बहुसंख्यक है. इस समुदाय के चार लाख वोट किसी भी नेता को दूसरे पर बढ़त बनाने में काफी योगदान कर सकते हैं. बीजेपी के सामने इस सीट पर गठबंधन ने राम भुवाल निषाद को उतारा है. ऐसे में जातिगत लामबंदी हुई तो यह निषाद समुदाय का वोट गठबंधन खेमे की तरफ जा सकता है. ऐसे में रवि किशन के जीत के दावे धरे के धरे रह जाएंगे.

अब अन्य आंकड़ो पर नजर डालते हैं. गोरखपुर में करीब 19.5 लाख वोटर हैं. जहां सबसे ज्यादा निषाद और मल्लाह वोटर हैं. जो कि कुल वोटर का करीब 23 प्रतिशत तक हैं. संख्या के आधार पर गोरखपुर में मुस्लिम आबादी भी अच्छी खासी है. जो कि कुल वोटर्स के 18 प्रतिशत यानी साढ़े तीन लाख है. इस क्षेत्र में साढ़े तीन लाख दलित, डेढ़ लाख पासवान, दो लाख क्षत्रीय, दो लाख यादव और डेढ़ लाख ब्राह्मण हैं.

पिछले चुनावों में क्या रहे चुनावी आंकड़े

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार योगी आदित्यनाथ ने इस सीट पर जीत हासिल की थी. उनको 5 लाख 39 हजार 127 वोट मिले थे. दूसरे नंबर पर समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार राजमति निषाद रहीं. उन्हें 2 लाख 26 हजार 344 वोट मिले थे. बीएसपी के टिकट पर राम भुवल निषाद रहे थे. उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के बाद योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने और उन्हें यह सीट छोड़नी पड़ी.

इसके बाद साल 2018 में उपचुनाव कराए गए. उपचुनावों में एसपी-बीएसपी ने गठबंधन कर प्रवीण कुमार निषाद को उम्मीदवार बनाया. जबकि बीजेपी ने ब्राह्मणों को साधने के इरादे से उपेंद्र दत्त शुक्ला को टिकट दिया. उपचुनाव में गठबंधन का प्रयोग सफल रहा और प्रवीण निषाद ने उपेंद्र शुक्ला पर 21 हजार 881 वोटों से जीत हासिल की थी.

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