मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में उपचुनाव होने वाले हैं. सभी राजनीतिक दल तैयारियों में जुटे हैं. इसी बीच कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamalnath) एक विवाद में फंस गए हैं. कुछ दिनों पहले उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार के संबंध में टिप्प्णी करते हुए ‘आइटम’ शब्द का इस्तेमाल किया था. चुनाव आयोग (Election Commission) ने मामले में संज्ञान लेते हुए सोमवार को कहा कि उन्होंने बीजेपी (BJP) की महिला उम्मीदवार के लिए ‘आइटम’ शब्द का इस्तेमाल कर चुनाव के संबंध में जारी की गईं एडवाइजरी का उल्लंघन किया है.

चुनाव आयोग ने कांग्रेस नेता को आदर्श आचार संहिता की अवधि के दौरान सार्वजनिक तौर पर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी है. कुछ दिनों पहले चुनावी रैली में कमलनाथ ने बीजेपी उम्मीदवार इमरती देवी पर ये टिप्पणी की थी, जिसके संबंध में चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस जारी किया था. बीजेपी ने इसे गंभीरता से लेते हुए राज्य में अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन और धरना आयोजित किया था.

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मामला राष्ट्रीय महिला आयोग तक जा पहुंचा था. प्रदेश बीजेपी और महिला आयोग की शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने कमलनाथ को नोटिस जारी किया था. चुनाव आयोग ने अपने नोटिस में कहा कि आयोग मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को सलाह देता है कि आदर्श आचार संहिता लागू रहने के दौरान सार्वजनिक बातचीत के समय उन्हें इस तरह के शब्द का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए या ऐसे बयान नहीं देना चाहिए.

आयोग ने कहा कि कमलनाथ ने एक महिला के लिए ‘आइटम’ शब्द का इस्तेमाल किया और यह आचार संहिता संबंधी आयोग की ओर से जारी एडवाइजरी का उल्लंघन है. कमलनाथ की इस टिप्पणी पर कांग्रेस पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी नाराजगी जताई थी.

राहुल गांधी की नाराजगी

उन्होंने कहा था कि कमलनाथ मेरी पार्टी के हैं लेकिन जिस तरह की भाषा उन्होंने इस्तेमाल की वह मुझे निजी तौर पर ठीक नहीं लगी. मैं इसे ठीक नहीं मानता. चाहे वह बात किसी के लिए भी कही गई. यह दुर्भाग्यपूर्ण है. वहीं कमलनाथ ने सफाई देते हुए कहा था कि उन्होंने ऐसा किसी का अपमान करने के लिए नहीं कहा था.

इमरती देवी का पलटवार

बीजेपी उम्मीदवार इमरती देवी ने कमलनाथ पर पलटवार करते हुए कहा था कि कमलनाथ नवरात्र में भगवती के सामने इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस (Congress) पार्टी कभी सत्ता में नहीं आएगी. बीजेपी सभी 28 सीटों पर जीतेगी और यहां हमेशा बीजेपी (BJP) की ही सरकार रहेगी.

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भाजपा नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सोमवार को मध्य प्रदेश के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को राज्य के ‘सबसे बड़े गद्दार’ करार दिया और कहा कि उन्होंने ‘भ्रष्ट’ सरकार चलाकर मतदाताओं के साथ विश्वासघात किया.

सिंधिया ने कहा कि जब लोगों की आवाज उन्होंने पार्टी के हर स्तर पर उठाई और उसका समाधान नहीं निकाला गया तो वे कांग्रेस छोड़ने को मजबूर हो गये. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि तीन नवम्बर को राज्य की 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में भाजपा पूरी नहीं तो अधिकांश सीटें जरूर जीतेगी.

एक साक्षात्कार में सिंधिया ने कहा कि जिन 28 सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं उनमें से 27 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा था. इसलिए भाजपा का हर हाल में फायदा ही होगा, नुकसान सिर्फ कांग्रेस का होना है.

सरकार बनाने की कल्पना के लिए कांग्रेस को जीतनी होगी पूरी 28 सीट

सिंधिया ने कहा, ‘कांग्रेस यदि सरकार बनाने की कल्पना भी करती है तो उसे सभी 28 की 28 सीटों पर उपचुनाव जीतना होगा. अभी हाल ही में उन्होंने अपना एक और विधायक गंवाया है. उसके विधायक राहुल लोधी भाजपा में शामिल हो गए हैं. स्पष्ट है कि लोगों को कांग्रेस में कोई विश्वास नहीं रह गया है. न सिर्फ जमीनी स्तर पर बल्कि इसके मौजूदा विधायकों का भी अब कांग्रेस से भरोसा उठ गया है.’ भाजपा में शामिल होने के बाद राज्यसभा के निर्वाचित हुए सिंधिया ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि किसी राज्य में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में, लगभग 30 प्रतिशत, विधायक एक साथ पार्टी छोड़ गए हों. यह राज्य के नेतृत्व, जिसकी कमान कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के हाथों में है, के प्रति विश्वास व आस्था के अभाव को दर्शाता है.’

उपचुनाव में प्रचार के दौरान कांग्रेस नेताओं द्वारा उन्हें ‘गद्दार’ कहे जाने को लेकर पूछे जाने पर सिंधिया ने कहा कि वह राजनीति में ऐसे शब्दों के इस्तेमाल से अमूमन परहेज करते है क्योंकि उनका मानना है कि राजनीति में एक सीमा होनी चाहिए और उसका अनुपालन होना चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘अगर वे वास्तव में ऐसे शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं तो मध्य प्रदेश में सबसे बड़े गद्दार कमलनाथ और दिग्विजय सिंह हैं. वे मध्य प्रदेश की साढ़े सात करोड़ जनता के गद्दार हैं क्योंकि कोई भी चुनावी वादा पूरा नहीं किया गया. निजी फायदे की गतिविधियों में वे संलिप्त रहें और उन्होंने लोगों की सेवा करने की बजाय सत्ता और कुर्सी को ज्यादा तरजीह दी.’

कमलनाथ को दी नसीहत

कमलनाथ द्वारा भाजपा उम्मीदवार इमरती देवी को ‘आइटम’ कहे जाने पर सिंधिया ने उन्हें आड़े हाथों लिया और कहा कि सार्वजनिक जीवन में काम कर रहे लोगों को मूल्यों और मयार्दाओं का पालन करना चाहिए और समाज में उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए.

जनता के लिए पकड़ी राजनीति की राह

यह पूछे जाने पर कि क्या वह महाभारत के अर्जुन की तरह दुविधा में नहीं हैं क्योंकि जिनके साथ उन्होंने काम किया और लड़ाइयां लड़ी आज वह उन्हीं के खिलाफ बोल रहे है, इसके जवाब में सिंधिया ने कहा कि वह मध्य प्रदेश की जनता के हित में यह लड़ाई लड़ रहे हैं. सिंधिया ने कहा कि उनके पिता माधवराव सिंधिया, दादी विजयाराजे सिंधिया और खुद उन्होंने लोगों के कल्याण के लिए राजनीति की राह पकड़ी.

उन्होंने कहा, ‘मेरे लिए राजनीतिक दल जन कल्याण के उस लक्ष्य तक पहुंचने का एक माध्यम है. इसलिए मेरे लिए राजनीति महत्वपूर्ण नहीं है. महत्वपूर्ण जन सेवा का लक्ष्य है.’

उन्होंने कहा कि लोगों की आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए जो भी जरूरत होगी, वह करेंगे. ‘चाहे जिनके साथ 20 से ज्यादा साल तक काम किया, उनसे लड़ना अपरिहार्य है तो वह भी सही.’ सिंधिया ने कहा कि कमलनाथ की सरकार जिस तरीके से काम कर रही थी, उसे बदलने की उन्होंने कोशिशें की. ‘मैंने हरसंभव प्रयास किया, जब स्थितियां नहीं बदली तो मेरे पास और कोई विकल्प नहीं था.’

उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस मध्य प्रदेश की सत्ता में आई तो लोगों की बहुत सारी आकांक्षाएं थी और उन्हें पूरी करने की जिम्मेदारी कमलनाथ के कंधों पर थी लेकिन उन्होंने 15 महीने एक ‘भ्रष्ट सरकार’ चलाई. भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि कमलनाथ की सरकार ‘खनन से लेकर शराब माफिया’ जैसे कई क्षेत्रों में भ्रष्टाचार में संलिप्त थी.

‘मेरे पास कोई और विकल्प नहीं था’

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं का पूरी तरह अपमान किया. उन्होंने कहा, ‘किसी भी चुनावी वादे को पूरा न करने के चलते मेरे पास और कोई विकल्प नहीं बचा था सिवाय बेहतर शासन प्रक्रिया की ओर रुख करने.

मेरा दृढ़ विश्वास है कि शिवराज सिंह चौहान की सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में बेहतर शासन प्रदान करेगी.’

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री चौहान से लेकर राज्य का पूरा भाजपा नेतृत्व उपचुनावों में जीत के लिए काम कर रहा है. उन्होंने विश्वास जताया कि जनता की आकांक्षाओं को पूरा करना और भाजपा कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत से परिणाम भाजपा के पक्ष में आएंगे.

बता दें कि इन 28 सीटों पर उपचुनाव इसलिए हो रहे हैं क्योंकि सिंधिया समर्थक 22 कांग्रेस विधायकों ने इसी साल मार्च महीने में पार्टी से इस्तीफा दे दिया था. इस घटनाक्रम के बाद कमलनाथ की 15 महीने पुरानी सरकार अल्पमत में आ गई थी और बाद में सत्ता से उसकी विदाई हो गई.

तीन और कांग्रेस विधायकों ने बाद में पार्टी से इस्तीफा दे दिया था जबकि तीन सीटें मौजूदा विधायकों के निधन से खाली हुई हैं.

कांग्रेस नेता (Congress Leader) कमलनाथ की बीजेपी उम्मीदवार (BJP Candidate) इमरती देवी पर की गई अभद्र टिप्पणी के मामले में बीजेपी नेता (BJP Leader) कैलाश विजयवर्गीय ने कमलनाथ पर निशाना (Target) साधा है. कैलाश विजयवर्गीय ने आज पूर्व सीएम कमलनाथ को मानसिक रूप से दरिद्र (Mentally Poor) कह दिया.

बीजेपी (BJP) महासचिव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कमलनाथ के पास करोड़ों की संपत्ति है, लेकिन फिर भी वह मानसिक रूप से दरिद्र हैं. उनकी मानसिक दरिद्रता से राज्य की सियासी साख खराब हुई है. कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि जब कोई व्यक्ति मानसिक रूप से गरीब (Mentally Poor) होता है, तभी वह इस तरह की ही बातें करता है.

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‘कांग्रेस पार्टी में कार्यकर्ता असुरक्षित’

कांग्रेस विधायकों के बीजेपी में शामिल होने पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस का राष्ट्रीय और राज्य नेतृत्व अपने कार्यकर्ताओं का विश्वास खो चुका है, युवा कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आना चाहते हैं. क्यों कि वह खुद को कांग्रेस में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं.

सीमा विवाद पर गैर जिम्मेदाराना बयान दे रहे राहुल-विजयवर्गीय

वहीं कैलाश विजयवर्गीय ने विधायकों की खरीद-फरोख्त को लेकर कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस अपने विधायकों को संभाल नहीं पा रही है, ऐसे में उन्हें दूसरे पर आरोप नहीं लगाने चाहिए.

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वहीं राहुल गांधी पर हमला करते हुए विजयवर्गीय बोले कि कांग्रेस नेता भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर गैर जिम्मेदाराना बयान देकर भारत के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले वीरों का अपमान कर रहे हैं.

मध्य प्रदेश (MP) में होने वाले उपचुनाव (By Poll) को लेकर कांग्रेस नेता (Congress Leader) कमलनाथ ने बीजेपी (BJP) पर खरीद-फरोख्त (Purchasing) का आरोप लगाया. कमलनाथ ने कहा कि बीजेपी को हार (Defeat) का डर सता रहा है, इसीलिए वह विधायकों को खरीदने की कोशिश में जुटी है. कमलनाथ ने कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग (Election Commission) को चिट्ठी लिखकर निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग की है.

मध्य प्रेदश (MP) के पूर्व सीएम कमलनाथ ने कहा कि बीजेपी (BJP) को साफ तौर पर पता है, कि उपचुनाव (By Poll) के परिणाम (Result) क्या होंगे, इसीलिए वह बुरी तरह से डरी हुई है.

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हार से डर से विधायक खरीदने में जुटी बीजेपी-कमलनाथ

कमलनाथ ने कहा कि 10 नवंबर को होने वाले उप चुनाव से बीजेपी बुरी तरह डरी हुई है, इसीलिए वह बाजार में नेताओं को खरीदने के लिए निकल पड़े हैं, उन्हें जो भी मिल रहा है, उसे खरीदने में लग गए हैं. कमलनाथ ने कहा कि उन्हें कई विधायकों ने फोन करके बताया कि बीजेपी उनसे लगातार संपर्क करने की कोशिश कर रही है, और उन्हें बीजेपी ज्वॉयन करने के ऑफर दे रही है.

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कांग्रेस नेता कमलनाथ ने कहा कि उन्होंने मार्च महीने में सौदेबाजी की राजनीति से इंकार कर दिया था, उन्होंने कहा कि अगर वह चाहते तो वह भी सौदेबाजी की राजनीति कर सकते थे.

मध्य प्रदेश उपचुनाव (Madhya Pradesh Byelection) में फिजिकल कैंपेन प्रतिबंधित करने के हाईकोर्ट (High Court) के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने रोक लगा दी है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग (Election Commission) इस मामले में तय करे कि फिजिकल कैंपेन पर क्या करना है. साथ ही कोर्ट ने चुनाव आयोग पर कोरोनावायरस महामारी को देखते हुए उचित कदम उठाने के लिए कहा है.

चुनाव आयोग और मध्य प्रदेश के ग्वालियर सीट से बीजेपी के उम्मीदवार प्रद्युम्न सिंह तोमर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर हाई कोर्ट के आदेश को चुनोती दी थी. याचिका में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी.

 

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‘हाईकोर्ट हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर’

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट को हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है. कोर्ट ने सवाल किया कि क्या आपने अपना काम बेहतर तरीके से किया है? कोर्ट ने ऐसी स्थिति पैदा करने के लिए राजनीतिक दलों की खिंचाई भी की जिन्होंने हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर किया.

सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए में कहा कि सभी प्रत्याशी अपनी बात चुनाव आयोग को नए सिरे से बता सकते हैं. चुनाव आयोग को ओर से इस पर नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा.

‘वर्चुअल मीटिंग संभव न हो तब की जाए रैली’

चुनाव आयोग ने अपनी अर्जी में कहा कि हाईकोर्ट के आदेश से उम्मीदवारों के लिए चुनाव प्रक्रिया प्रभावित होगी. वहीं, हाईकोर्ट का कहना था कि रैलियों की अनुमति तभी दी जा सकती है, जब वर्चुअल मीटिंग संभव न हो.

मालूम हो कि जबलपुर हाईकोर्ट की एक बेंच ने उपचुनाव को लेकर आयोजित की जाने वाली सभाओं पर रोक लगाने का आदेश दिया था. इसके बाद राज्य में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सभाएं निरस्त कर दी गईं. उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि वे इन सभाओं के निरस्त होने के लिए क्षेत्र की जनता से माफी मांगते हैं.

बता दें कि मध्य प्रदेश में 28 विधानसभा सीटों के लिए होने उपचुनाव होना है. इन सभी सीटों पर आगामी 3 नवंबर को मतदान होगा. चुनाव से लगभग एक हफ्ते पहले सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से राज्य के सभी दलों के उम्मीदवारों को बड़ी राहत मिली है.

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मध्य प्रदेश में हो रहे विधानसभा के उपचुनाव में चाहे जो जीते या हारे, मगर इस चुनाव ने आपसी सियासी सौहार्द को जरूर बिगाड़ने का काम किया है. राजनेताओं की भाषा निम्न स्तर पर पहुंच गई है और वे एक दूसरे के खिलाफ उस भाषा का उपयोग करने में लगे हैं, जो समाज में कम ही उपयोग की जाती है, बल्कि उसे गली-चौराहों की बोली के तौर पर जाना पहचाना जाता है.

राज्य में 28 विधानसभा क्षेत्रों में उप चुनाव हो रहे हैं और प्रचार अंतिम दौर में है. यहां तीन नवंबर को मतदान होने वाला है. सारे राजनेता अपने तरकश से एक-दूसरे पर हमलों के तीर छोड़े जा रहे हैं. इसी दौरान राजनेताओं के मुंह से निकली बोली के बाणों ने सियासी फिजा को ही दूषित करने का काम किया है.

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पिछले दिनों डबरा की आमसभा में ‘आइटम’ शब्द का जिक्र किया, डबरा वह विधानसभा क्षेत्र है, जहां से बीजेपी के उम्मीदवार के तौर पर मंत्री इमरती देवी मैदान में हैं. कमल नाथ के इस बयान पर खूब हो हल्ला मचा और बाद में कमलनाथ को सफाई भी देनी पड़ी, मगर बीजेपी उन पर हमलावर हो गई. इमरती देवी ने तो कमलनाथ को गांव का लुच्चा लफंगा तक कह डाला.

‘बिकाऊ नहीं, टिकाऊ माल’

बात यहीं नहीं ठहरी, सागर के सुरखी विधानसभा क्षेत्र में प्रचार करने पहुंचे पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने तो अपनी ही पार्टी अर्थात कांग्रेस की उम्मीदवार पारुल साहू को ‘बिकाऊ नहीं, टिकाऊ माल’ तक बता डाला. इसके अलावा अनूपपुर से बीजेपी के उम्मीदवार और मंत्री बिसाहूलाल सिंह ने तो कांग्रेस उम्मीदवार की पत्नी को ही रखैल कह दिया.

यह तो बड़े नेताओं के वे बयान हैं, जो चचार्ओं में है, इसके अलावा उम्मीदवारों और छुटभैया नेताओं ने तो कई स्थानों पर हद ही पार कर दी. चुनाव के दौरान निम्न स्तर की भाषा के प्रयोग पर चाहे बीजेपी हो या कांग्रेस दोनों ही लगातार चिंता जता रहे हैं और एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, मगर कोई भी पार्टी बिगड़ैल बोल बोलने वाले नेताओं पर कार्रवाई करने को तैयार नहीं है.

जीत के आगे उनके लिए भाषा की कोई अहमियत नहीं

राजनीतिक विश्लेशक रविंद्र व्यास का कहना है कि इस बार के चुनाव में व्यक्तिगत हमले कुछ ज्यादा ही हो रहे हैं, क्योंकि दोनों ही दलों के लिए एक-एक सीट महत्वपूर्ण है. दोनों दल हर हाल में जीत हासिल कर सत्ता पर कब्जा चाहते हैं. जीत के आगे उनके लिए भाषा की कोई अहमियत नहीं हैं. चुनाव में जीत चाहे जिसे मिल जाए, मगर राजनीतिक दलों के नेता भाषा के जरिए ऐसा बीज बो रहे हैं, जो वर्षों तक अपना दुष्प्रभाव दिखाएगी.

मध्यप्रदेश उपचुनाव (Madhya Pradesh Bypoll) में किस्मत आजमा रहे कुल 355 उम्मीदवारों में से 63 उम्मीदवारों (18 प्रतिशत) ने चुनावी हलफनामे में बताया है कि उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं. चुनाव अधिकार समूह एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है. रिपोर्ट के अनुसार, 11 प्रतिशत यानी 39 उम्मीदवारों ने बताया है कि उनके खिलाफ संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं. संगीन आपराधिक मामले गैर जमानती होते हैं. इनमें पांच साल तक के कारावास की सजा होती है.

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एडीआर ने कहा कि प्रमुख राजनीतिक दलों की बात करें तो कांग्रेस उम्मीदवारों की दी हुई जानकारी का विश्लेषण करने पर पता चला कि उसके 28 में 14 (50 प्रतिशत) उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं जबकि बीजेपी के 28 में से 12 उम्मीदवारों ने घोषित किया है कि उनके खिलाफ ऐसे मामले दर्ज हैं. एडीआर की रिपोर्ट में कहा गया है कि बसपा के 28 में आठ, सपा के 14 में से चार और 178 निर्दलीय उम्मीदवारों में से 16 ने अपने हलफनामों में बताया है कि उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं.

कांग्रेस और बीजेपी उम्मीदवारों पर भी मामले

चुनाव अधिकार संस्था ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि प्रमुख राजनीतिक दलों कांग्रेस के 28 में से 6 और भाजपा के 28 में से आठ उम्मीदवारों ने हलफनामे में कहा है कि उनके खिलाफ संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं. रिपोर्ट के अनुसार बसपा के 28 में से तीन, सपा के 14 में से चार और 178 निर्दलीय उम्मीदवारों में से 13 ने घोषित किया है कि उनके खिलाफ संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं.

एडीआर के मुताबिक एक उम्मीदवार ने घोषित किया है कि उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या का मामला दर्ज है. इसके अलावा सात उम्मीदवारों ने बताया है कि उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 307 के तहत हत्या के प्रयास का मामला दर्ज है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 28 में से 10 निर्वाचन क्षेत्र रेड अलर्ट निर्वाचन क्षेत्र हैं.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का फर्क नहीं

रेड अलर्ट निर्वाचन क्षेत्र उन्हें कहा जाता है जहां चुनाव लड़ रहे तीन या उससे अधिक उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की घोषणा की हो. एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार, ”राजनीतिक दलों पर उम्मीदवारों के चुनाव को लेकर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का कोई प्रभाव नहीं पड़ा है. उन्होंने करीब 18 प्रतिशत आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट देकर अपनी पुरानी परंपरा को जारी रखा है. मध्य प्रदेश में उपचुनाव लड़ रहे सभी प्रमुख दलों ने 25 से 50 प्रतिशत ऐसे उम्मीदवारों को टिकट दिये हैं, जिन्होंने यह घोषित किया है कि उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं.”

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उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने फरवरी में राजनीतिक दलों से आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट देने के कारणों के बारे में पूछा था. साथ ही उसने यह भी पूछा था कि बिना आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को टिकट क्यों नहीं दिया जाता. एडीआर की रिपोर्ट में इन उम्मीदवारों की वित्तीय स्थिति के बारे में भी जानकारी दी गई है.

रिपोर्ट में कहा गया है, ”355 में से 80 उम्मीदवार करोड़पति हैं. प्रमुख दलों में से भाजपा के 28 में से 23, कांग्रेस के 28 में से 22, बसपा के 28 में से 13, सपा के 14 में से 2 और 178 निर्दलीय में से 14 उम्मीदवारों ने घोषित किया है कि उनकी संपत्ति एक करोड़ रुपये से अधिक है.” मध्य प्रदेश की 28 सीटों पर तीन नवंबर को उपचुनाव होने हैं. इनमें से अधिकतर सीटें कांग्रेस के बागी विधायकों के पार्टी और विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होने के बाद खाली हुई हैं.

मध्य प्रदेश (MP) के इतिहास में पहली बार 28 विधानसभा सीटों पर एक साथ उपचुनाव (By Poll)  होने जा रहे हैं. राज्य में तीन नवंबर को होने वाले उपचुनाव का रिजल्ट (Result) तय करेगा कि कौन सी पार्टी सत्ता में रहेगी. वहीं वोटों की गिनती 10 नवंबर को होगी.

मध्य प्रदेश में जिन 28 सीटों पर उपचुनाव (By Poll) होने हैं, उनमें से 25 सीटें कांग्रेस विधायकों (Congress MLAs) के इस्तीफा देकर बीजेपी (BJP) में शामिल होने से खाली हुई हैं, जबकि दो सीटें कांग्रेस विधायकों के निधन और एक सीट बीजेपी विधायक के निधन की वजह से खाली हुई है.

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सत्ता में रहने के लिए बीजेपी को नौ सीटों की जरूरत

इस साल मार्च में कांग्रेस के 22 विधायकों के बीजेपी में शामिल होने की वजह से मध्य प्रदेश में तत्कालीन कांग्रेस सरकार अल्पमत में आ गई थी, जिसकी वजह से कमलनाथ को 20 मार्च को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था. इसके बाद 23 मार्च को शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश में सीएम पद की शपथ ली थी. हालांकि उसके बाद तीन और कांग्रेसी विधायक बीजेपी में शामिल हो गए थे.

मध्य प्रदेश विधानसभा की कुल 230 सीटों में से वर्तमान में बीजेपी के 107 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 88, चार निर्दलीय, बीएसपी के दो और एसपी का एक विधायक है. बीजपी को बहुमत के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए इस उपचुनाव में मात्र नौ सीटों की जरूरत है, जबकि जबकि कांग्रेस को फिर से सत्ता हालिल करने के लिए 28 सीटें जीतनी होंगी.

कांग्रेस का बीजेपी पर खरीद-फरोख्त का आरोप

राजनीति के जानकारों का कहना है कि संख्या के आधार पर यह उपचुनाव कांग्रेस से ज्यादा बीजेपी के लिए आसान होगा. लेकिन यह भी समझने वाली बात होगी कि इन 28 सीटों में से 27 सीटें कांग्रेस की थी, इसलिए बीजेपी के लिए यह इतना आसान भी नहीं होगा, जितना दिखाई दे रहा है.

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कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि जब बाबा साहेब अंबेडकर ने देश का संविधान बनाया था तो उन्होंने मौजूदा विधायक या सांसद की मौत की स्थिति में उपचुनाव का प्रावधान किया, लेकिन उन्होंने कभी ऐसी स्थिति के बारे में नहीं सोचा था, जहां खरीद-फरोख्त की वजह से उपचुनाव कराए जाएंगे और इसके लिए कानून में कोई प्रावधान नहीं है. कमलनाथ हमेशा ही बीजेपी पर खरीद-फरोख्त का आरोप लगाते रहे हैं.

मध्य प्रदेश में विधानसभा उपचुनाव लड़ने वाले 23 प्रतिशत उम्मीदवार करोड़पति हैं, इनमें से ज्यादातर उम्मीदवार भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के हैं. मध्य प्रदेश इलेक्शन वॉच और ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (ADR) के आंकड़ों में यह खुलासा हुआ है. 3 नवंबर के चुनाव के लिए 28 विधानसभा क्षेत्रों में सभी 355 उम्मीदवारों के स्व-शपथ पत्रों का विश्लेषण किया गया. आंकड़ों के अनुसार, 355 उम्मीदवारों में से 80 यानी 23 प्रतिशत करोड़पति या मल्टी-मिलियनेयर हैं, जिनकी औसत संपत्ति 1.10 करोड़ रुपये है.

कुल उम्मीदवारों में से 15 (चार प्रतिशत) के पास 5 करोड़ रुपये और उससे अधिक की संपत्ति है, 25 (सात प्रतिशत) की संपत्ति 2 करोड़ रुपये से 5 करोड़ रुपये, 77 (22 प्रतिशत) की संपत्ति 55 लाख रुपये से 2 करोड़ रुपये के बीच, और 100 (28 प्रतिशत) की संपत्ति 10 लाख और 50 लाख रुपये के बीच है. 39 प्रतिशत उम्मीदवारों के पास 10 लाख रुपये से कम की संपत्ति है. सभी में, 138 (39 प्रतिशत) उम्मीदवारों के पास 10 लाख रुपये से कम की संपत्ति है.

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पार्टी-वार, BJP के 28 उम्मीदवारों में से 23 (82 प्रतिशत) कांग्रेस के 28 उम्मीदवारों में से 22 (79 प्रतिशत), बहुजन समाज पार्टी के 28 में से 13 (46 प्रतिशत), समाजवादी पार्टी के 14 उम्मीदवारों में से दो (14 प्रतिशत) और 178 निर्दलीय उम्मीदवारों में से 14 (8 प्रतिशत), जिनके हलफनामों का विश्लेषण किया गया, की संपत्ति 1 करोड़ रुपये से अधिक की घोषित की गई.

घोषित संपत्ति के शीर्ष तीन उम्मीदवारों के विवरण के अनुसार, कांग्रेस के प्रेमचंद गुड्डू, BJP के डॉ. सुशील कुमार प्रसाद और राजवर्धन सिंह दत्तीगांव के पास क्रमश: 86 करोड़ रुपये, 15 करोड़ रुपये और 13 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति है. गुड्डू इंदौर से चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि प्रसाद और दतिगांव क्रमश: राजगढ़ और धार से चुनाव लड़ रहे हैं.

कम से कम संपत्ति वाले तीन उम्मीदवार पीपुल्स पार्टी ऑफ इंडिया (डेमोक्रेटिक) की चीना बेगम और निर्दलीय उम्मीदवार सौरव व्यास और शेख जाकिर शेख हैं. कुल 113 (32 प्रतिशत) उम्मीदवारों ने अपने हलफनामों में देनदारियों की घोषणा की है. 2 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति वाले छह उम्मीदवारों ने आयकर विवरण घोषित नहीं किया है.

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मध्य प्रदेश में एक शख्स पैसों के लिए अपनी दो पत्नियों संग सेक्स वीडियो बनाकर साइट्स पर अपलोड करता था. इस 24 साल के शख्स को पुलिस ने विदिशा से गिरफ्तार किया है. पुलिस के मुताबिक, शख्स सेक्स के लाइव शो करता था, जिससे उसने अबतक लाखों रुपये कमा लिए थे. मिली जानकारी के मुताबिक, अब शख्स की दूसरी पत्नी ने ही पुलिस में शिकायत दी है. शख्स पर रेप, निजता का हनन जैसी धाराओं के तहत केस रजिस्टर हुआ है.

10वीं तक पढ़ा यह शख्स तकनीक से अच्छी तरह वाकिफ था. वह खुद कई डेटिंग ऐप्स पर ऐक्टिव था, वह इन साइट्स पर कंटेंट डालकर पैसा कमाना जानता था. इसकी पहली पत्नी ने कोई शिकायत नहीं दी है. पुलिस का कहना है उसे बेहतर भविष्य के सपने दिखाकर शख्स ने भ्रमित किया हुआ था.

रेट लिस्ट की हुई थी तैयार

पकड़े गए शख्स ने अपनी प्रोफाइल पर कुछ फोटोज डाली हुई थीं. जो भी कोई उन्हें लाइक करता उनपर एक मेसेज जाता था. इसमें एक मीनू जैसा तैयार था. जो कि 100 रुपये में डेमो से लेकर आगे क्लाइंट की डिमांड के हिसाब से 500, 700 और 1000 रुपये तक जाता था. बिना चेहरे और चेहरेवाली वीडियो के अलग अलग पैसे थे.

आध्यात्मिक गुरु के नाम पर फंसाया, कमाए लाखों रुपये

शिकायत करनेवाली लड़की एक आध्यात्मिक गुरु को मानती थी. शख्स ने खुद को भी उन गुरु का शिष्य बताकर लड़की को फंसा लिया और शादी भी कर ली. शख्स के पास से फोन, जूलरी और बैंक डीटेल ली गई हैं सब मिलाकर जिनकी कीमत 12 लाख रुपये है.

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में कांग्रेस (Congress) को रविवार को एक और झटका लगा है. दमोह विधानसभा क्षेत्र के विधायक राहुल लोधी (Rahul Lodhi) ने अपनी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है. दमोह से कांग्रेस के विधायक राहुल लोधी ने प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा को अपनी सदस्यता से इस्तीफा सौंपा. इसके बाद वो भाजपा के प्रदेश दफ्तर पहुंचे और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पार्टी के प्रदेशध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा व नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह की उपस्थिति में भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली.

प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने रविवार को संवाददाताओं को बताया कि दमोह से विधायक राहुल लोधी ने दो दिन पहले इस्तीफा देने की बात कही थी, जिस पर उन्हें सोच विचार करने को कहा गया था, राहुल लोधी ने शनिवार को फिर अपना इस्तीफा देने की इच्छा जाहिर की. रविवार को नवमीं के दिन उन्होंने अपना इस्तीफा दे दिया.

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गिर गई थी कमलनाथ की सरकार

मालूम हो कि राज्य में 22 विधायकों ने अपनी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थामा था, जिससे कमलनाथ की सरकार गिर गई थी. उसके बाद तीन और विधायकों ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया और अब राहुल लोधी ने इस्तीफा दे दिया है.

28 विधानसभा क्षेत्रों के लिए मतदान

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में तीन नवंबर को 28 विधानसभा क्षेत्रों के लिए मतदान होने वाला है. मतदान के एक दिन पहले यानी कि दो और तीन नवंबर को प्रिंट मीडिया में विज्ञापन प्रमाणीकरण के बाद ही प्रकाशित किए जा सकेंगे. यह निर्देश निर्वाचन आयोग ने जारी किए हैं.

भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के मुताबिक उपलब्ध कराई गई आधिकारिक जानकारी में बताया गया है कि उप निर्वाचन के अंतर्गत प्रिंट मीडिया में मतदान दिवस के एक दिन पहले यानी कि दो और तीन नवंबर में प्रकाशित होने वाले विज्ञापनों का पूर्व प्रमाणन अनिवार्य किया गया है. यह प्रमाणीकरण राज्य व जिला स्तर पर गठित एमसीएमसी (मीडिया प्रमाणन एवं अनुवीक्षण समिति) द्वारा किया जाएगा.

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कोरोना महामारी (Corona Pandemic) के प्रकोप के बीच मौसम में हो रहे बदलाव से मध्य प्रदेश (MP) में स्वाइन फ्लू (Swine Flu) का खतरा भी बढ़ गया है. इससे निपटने और रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग (Health Department) ने अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश (Guideline) जारी किए हैं.

स्वास्थ्य विभाग (Health Department) ने राज्य के सभी मुख्य चिकित्सा, स्वास्थ्य अधिकारी (Health Officers) और सिविल सर्जन को स्वाइन फ्लू (Swine Flu) की संभावना के मद्देनजर सचेत रहने के लिए कहा है.

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स्वाइन फ्लू के लिए गाइडलाइन का पालन करें डॉक्टर्स

डॉक्टर्स से कहा गया है कि मौसम के बदलाव की वजह से लोगों में स्वाइन फ्लू, सीजनल इन्फ्लूएन्जा (एच-1 एन-1) होने की संभावना बढ़ गई है, इसलिए संभावित सीजनल इन्फ्लूएन्जा (एच-1 एन-1) के मरीजों की स्क्रीनिंग, निदान, उपचार और रोकथाम के लिए भारत सरकार द्वारा तय किए गए प्रोटोकॉल और गाइडलाइन का पालन किया जाए.

गर्भवती महिलाओं-बच्चों में स्वाइन फ्लू का ज्यादा खतरा

स्वास्थ्य विभाग ने डॉक्टर्स से कहा है कि स्वाइन फ्लू का सबसे ज्यादा खतरा बच्चों, गर्भवती महिलाओं, किसी घातक बीमारी से जूझ रहे लोगों में सबसे ज्यादा होता है, इसलिए उन्हें ज्यादा सतर्क रहने की जरुरत है.

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सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि फीवर क्लीनिक में सर्दी-खांसी के मरीजों की रिपोर्ट राज्य सर्विलेंस इकाई को दिन में दो बार भेजी जाए, और ऐसे मरीजों का पूरा ब्यौरा रखा जाए.

असम में भी स्वाइन फ्लू का खतरा बढ़ रहा है.अफ्रीकन स्वाइन फ्लू (ASI) से प्रभावित इलाकों में मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल (Sarbananda Sonowal) ने 12 हजार सूअरों को मारने का आदेश दिया है. इससे पहले भी राज्य सरकार ने अफ्रीकन स्वाइन फ्लू के चलते 18 हजार सुअरों को मारने का आदेश दिया गया था. एएसएफ का पहला मामला मई महीने मे सामने आए था.

मध्यप्रदेश उपचुनाव एक तरह से प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया है. 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में तीन चेहरे ऐसे हैं जिनकी अग्निपरीक्षा होने जा रही है. एक तरफ कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थामने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया हैं तो दूसरी ओर हाल में मुख्यमंत्री की कुर्सी गंवाने वाले कमलनाथ. इन दोनों के बीच शिवराज सिंह की साख भी अहम है क्योंकि उन्हें लोगों तक संदेश पहुंचाना है कि पहले भी जनादेश उनके साथ था और अब भी है.

साल 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जिताने में ज्योतिरादित्य सिंधिया का अहम रोल था तो अभी हाल में कांग्रेस सरकार गिराने में भी उनकी ही महत्वपूर्ण भूमिका थी. कांग्रेस छोड़कर 22 विधायकों ने बीजेपी का दामन थामा जिनमें 19 ने ज्योतिरादित्य सिंधिया का समर्थन किया था. बाद में और तीन विधायक उनके समर्थन में बीजेपी से जुड़ गए. देखते-देखते कमलनाथ की सरकार धराशायी हो गई. अब 28 सीटों पर जब उपचुनाव हो रहे हैं तो सबका सवाल यही है कि यह किसकी अग्निपरीक्षा है. जवाब सीधा है कि जो लोग सिंधिया के साथ बीजेपी में आए उन्हें अपनी सीट जीतकर सिंधिया का सम्मान रखना होगा. बीजेपी ने उन सभी नेताओं को टिकट दिया है जिन्होंने कांग्रेस छोड़ी थी.

जिन 28 सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं उनमें 27 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है. सिर्फ एक सीट आगर (सुरक्षित) से मनोज ऊंटवाल ने दर्ज की थी. इस लिहाज से कांग्रेस अगर इन सीटों को बचा लेती है तो कमलनाथ की साख दोबारा बुलंदियों पर होगी और कांग्रेस विधायकों की संख्या सरकार बनाने की स्थिति में होगी. दूसरी ओर बीजेपी अपनी संख्या 107 से 9 और बढ़ाना चाहती है ताकि सरकार में बनी रहे. 230 सदस्यों की विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 116 है. इस हिसाब से शिवराज सिंह चौहान के लिए भी यह उपचुनाव प्रतिष्ठा की लड़ाई है कि वे कितने विधायकों को अपने 7 महीने के कार्यकाल पर जिता लेते हैं.

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ग्वालियर-चंबल क्षेत्र को सिंधिया का गढ़ माना जाता है जहां 16 सीटों पर उपचुनाव है. बीजेपी ने यहां जीत के लिए पूरी ताकत झोंक रखी है और सिंधिया दिन-रात प्रचार में लगे हुए हैं. पूरे चंबल इलाके में 34 सीटें हैं जिनमें पिछले चुनाव में 26 सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी. यह हाल तब था जब सिंधिया कांग्रेस के साथ थे लेकिन इस बार बीजेपी खेमे में हैं. इस स्थिति में कमलनाथ पर पूरा दबाव है कि वे अपने स्तर पर सिंधिया की गैरमौजूदगी में चंबल की कितनी सीटें निकाल पाते हैं. कांग्रेस और कमलनान ने चंबल सहित पूरे मध्यप्रदेश में वोटर्स तक अपनी बात पहुंचाई है कि जिन लोगों ने जनादेश के साथ धोखा किया, जो लोग कांग्रेस के वोट पर जीत कर आए और आज बीजेपी के साथ हैं, उन्हें उपचुनाव में नकार देना चाहिए. कांग्रेस की यह अपील कितनी कारगर साबित होती है, यह देखने वाली बात होगी. इसके साथ ही कांग्रेस ने कृषि कानून के मुद्दे पर भी बीजेपी को घेरा है क्योंकि मध्यप्रदेश का उपचुनाव किसानों के मुद्दे पर प्रमुखता से लड़ा जा रहा है.

 

मध्यप्रदेश में 28 सीटों पर 3 नवंबर को उपचुनाव है. बिहार विधानसभा चुनावों के साथ ही मध्यप्रदेश में भी उपचुनाव कराए जा रहे हैं. मध्यप्रदेश उपचुनाव में असली टक्कर बीजेपी और कांग्रेस में है लेकिन ग्वालियर-चंबल जैसे इलाके में बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) भी अपना दमखम दिखा रही है. बीजेपी और कांग्रेस ने अपने प्रत्याशियों की लिस्ट जारी कर दी है. आइए देखते हैं किस सीट से कौन उम्मीदवार है.

1-जौरा सीट- सूबेदार सिंह रजौधा (बीजेपी), पंकज उपाध्याय (कांग्रेस)
2-सुमावली सीट- ऐंदल सिंह कंषाना (बीजेपी), अजब सिंह कुशवाहा (कांग्रेस)
3-मुरैना- रघुराज सिंह कंषाना (बीजेपी), राकेश मवई (कांग्रेस)
4-दिमनी- गिर्राज दंडोतिया (बीजेपी), रविंद्र सिंह तोमर (कांग्रेस)
5-अम्बाह (सुरक्षित)- कमलेश जावट (बीजेपी), सत्यप्रकाश सिकरवार (कांग्रेस)
6-मेहगांव- ओपीएस भदौरिया (बीजेपी), हेमंत कटारे (कांग्रेस)
7-गोहद (सुरक्षित)- रणवीर जाटव (बीजेपी), मेवाराम जाटव
8-ग्वालियर- प्रद्युम्न सिंह तोमर (बीजेपी), सुनील शर्मा (कांग्रेस)
9-ग्वालियर पूर्व- मुन्ना लाल गोयल (बीजेपी), सतीश सिकरवार (कांग्रेस)
10-डबरा (सुरक्षित)- इमरती देवी (बीजेपी), सुरेश राजे (कांग्रेस)
11-भांडेर (सुरक्षित)- रक्षा संतराम सिरौनिया (बीजेपी), फूल सिंह बरैया (कांग्रेस)
12-करैरा (सुरक्षित)- जसमंत जाटव (बीजेपी), प्रागीलाल जाटव (कांग्रेस)
13-पोहरी- सुरेश धाकड़ (बीजेपी), हरिबल्लभ शुक्ला (कांग्रेस)
14-बमोरी- महेंद्र सिंह सिसोदिया (बीजेपी), कन्हैया लाल अग्रवाल (कांग्रेस)
15-अशोकनगर (सुरक्षित)- जजपाल सिंह जज्जी (बीजेपी), आशा दोहरे (कांग्रेस)
16-मुंगावली- बृजेंद्र सिंह यादव (बीजेपी), कन्हैया राम लोधी (कांग्रेस)
17-सुरखी- गोविंद सिंह राजपूत (बीजेपी), पारूर साहू (कांग्रेस)
18-मलहरा- प्रद्यु्म्न सिंह लोधी (बीजेपी), रामसिया त्रिपाठी (कांग्रेस)
19-अनूपपुर (सुरक्षित)- बिसाहूलाल सिंह (बीजेपी), विश्वनाथ सिंह (कांग्रेस)
20-सांची (सुरक्षित)- प्रभुराम चौधरी (बीजेपी), मदनलाल चौधरी (कांग्रेस)
21-ब्यावरा- नारायण सिंह पंवार (बीजेपी), रामचंद्र दांगी (कांग्रेस)
22-आगर (सुरक्षित)- मनोज ऊंटवाल (बीजेपी), विपिन वानखेड़े (कांग्रेस)
23-हाटपिपल्या- मनोज चौधरी (बीजेपी), राजवीर सिंह बघेल (कांग्रेस)
24-मांधाता- नारायण पटेल (बीजेपी), उत्तम पाल सिंह (कांग्रेस)
25-नेपानगर (सुरक्षित)- सुमित्रा कास्डेकर (बीजेपी), कामकिशन पटेल (कांग्रेस)
26-बदनावर- राजवर्धन सिंह (बीजेपी), कमल पटेल (कांग्रेस)
27-सांवेर (सुरक्षित)- तुलसीराम सिलालट (बीजेपी), प्रेमचंद्र गुड्डू (कांग्रेस)
28-सुवासरा- हरदीप सिंह डंग (बीजेपी), राकेश पाटीदार (कांग्रेस)

 

मध्यप्रदेश में 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस ने कमर कस ली है. दोनों पार्टियों ने अपने-अपने स्तर पर वादे किए हैं और जनता को लुभाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ा जा रहा है. कांग्रेस जहां वचन पत्र के माध्यम से वोटर्स को लुभा रही है तो बीजेपी संकल्प पत्र के जरिये जनता तक अपने वादे पहुंचा रही है. बीजेपी का आरोप है कि कांग्रेस भले वचन पत्र लाए लेकिन पूर्व में उसने अपने वादे पूरे नहीं किए तभी पार्टी के कई नेता बीजेपी से जुड़ गए. दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि जनता बीजेपी का काम देख चुकी है, इसलिए उपचुनाव की सभी 28 सीटों पर कांग्रेस की जीत सुनिश्चित है.

मध्यप्रदेश में किसानों का मुद्दा गंभीर है. बीजेपी और कांग्रेस ने किसानों का वोट पाने के लिए तैयारी की है. मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है और करीब 75 फीसद लोग खेती पर आश्रित हैं. इस लिहाज से पार्टियों के लिए किसानों का मुद्दा और भी खास हो जाता है. कांग्रेस ने कर्जमाफी का मुद्दा तेजी से उठाया है और कहा है कि उसकी सरकार ने किसानों के कर्ज माफ किए थे और दोबारा सत्ता में आए तो बाकी बचे किसानों के कर्ज भी माफ किए जाएंगे. दूसरी ओर बीजेपी ने कमलनाथ की कांग्रेस सरकार पर किसानों से झूठ बोलने और कर्जमाफी न करने की बात कही है. किसानों को लुभाने के लिए बीजेपी ने एक बड़ा वादा किया है कि हर किसान के खाते में सरकार 4 हजार रुपये देगी. बीजेपी का कहना है कि केंद्र सरकार जिस प्रकार से किसान सम्मान निधि के तौर पर छह हजार रुपये देती है, उसी तर्ज पर मध्यप्रदेश सरकार भी चार हजार देगी. इस लिहाज से किसान को मिलने वाली राशि 10 हजार रुपये हो जाएगी. बीजेपी इसे कांग्रेस की ऋण माफी योजना के तौर पर पेश कर रही है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने मध्यप्रदेश फसल बीमा योजना लॉन्च करने का ऐलान किया है. उनका कहना है कि पूर्व में बीमा योजना थी लेकिन उसमें कई अनियमितताएं हुई हैं, इसे देखते हुए बीजेपी सरकार अलग से किसानों के लिए बीमा योजना ले आएगी.

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ऋण माफी योजना पर रार
कुल मिला कर मध्यप्रदेश उपचुनाव में किसान ऋण माफी को लेकर सियासत गर्म रहने की पूरी संभावना है. 2018 के विधासनभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में किसानों का 2 लाख तक का कर्ज माफ करने का वादा किया था. कांग्रेस की सरकार बनी और अभी हाल में सरकार गिरने तक वह दावा करती रही कि दो बार में 26 लाख किसानों का कर्ज माफ किया गया. बीजेपी शुरू में इससे इनकार करती रही लेकिन आम चुनाव से ठीक पहले विधानसभा में इस पर बड़ा कबूलनामा आया. कांग्रेस ने विधानसभा में पूछा कि मध्यप्रदेश में कितने किसानों का कर्ज माफ हुआ. इसके जवाब में कृषि मंत्री ने कहा कि 26 लाख किसानों का 11 हजार 646 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज माफ हुआ है. सरकार के इस कबूलनामे पर कांग्रेस हमलावर हो गई है. वह शिवराज सरकार से सवाल पूछ रही है लेकिन सरकार का कुछ अलग ही जवाब है. मध्यप्रदेश सरकार का कहना है कि कर्जमाफी का मतलब यह नहीं हुआ कि सहकारिता की गर्दन काट दी जाए. सरकार का कहना है कि विधानसभा में जो भी जवाब दिया गया, उसके आंकड़े पुरानी सरकार के लोगों ने तैयार किए हैं. मध्यप्रदेश सरकार का कहना है कि मुद्दा 2 लाख रुपये तक का कर्ज माफ करने का था, लेकिन कांग्रेस एक भी किसान का नाम बता दे जिसका 2 लाख का कर्ज माफ हुआ हो.

शिवराज सरकार का प्लान बी
उपचुनाव में कांग्रेस की कर्जमाफी बीजेपी पर भारी न पड़ जाए, इसके लिए शिवराज सरकार ने दूसरा प्लान तैयार कर लिया है. मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार अब केंद्र सरकार के 6 हजार रुपये की किसान सम्मान निधि के साथ 4 हजार रुपये देगी. इसका मतलब अब मध्यप्रदेश के किसानों को हर साल 10 हजार रुपये की सम्मान निधि मिलेगी. उपचुनाव की ज्यादातर सीटें कृषि क्षेत्रों की हैं. ऐसे में कांग्रेस की ऋण माफी योजना पर सरकार का कबूलनामा और किसानों के लिए कल्याण निधि की घोषणा से तय है कि यह पूरा उपचुनाव किसानों के इर्द-गिर्द ही लड़ा जाएगा. मध्यप्रेदश में बीजेपी और कांग्रेस ने किसानों की समस्याओं को देखते हुए सभी 28 सीटों के लिए अपने-अपने वचन पत्र और संकल्प पत्र तैयार किए हैं.

 

मध्यप्रदेश (MP) की जबलपुर हाईकोर्ट (HC) ने अपने रजिस्ट्रार जनरल को पूर्व और मौजूदा सांसदों, विधायकों के खिलाफ अदालतों में चल रहे आपराधिक मामलों (Criminal Cases) की सूची (List) दो सप्ताह के अंदर देने के निर्देश दिए हैं.

सहायक सॉलिसिटर जनरल (Solicitor General) जे के जैन ने बताया कि कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजय यादव और जज सुजॉय पाल की पीठ ने रजिस्ट्रार जनरल (Registrar General) को दो हफ्ते के अंदर पूर्व और मौजूदा सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों, खास कर ऐसे मामले, जिनमें स्थगन आदेश दिया गया है, की सूची (List) देने के निर्देश दिए हैं.

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SC के आदेश के बाद HC ने मांगी आपराधिक मामलों की लिस्ट

उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के 16 सितंबर के आदेश के अनुपालन में दायर याचिका की सुनवाई के दौरान यह निर्देश जारी किया. सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से पूर्व और वर्तमान सांसदों, और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मुकदमों की प्रगति की निगरानी के लिए कहा था. सुप्रीम कोर्ट ने अश्विनी कुमार उपाध्याय, अन्य बनाम भारत सरकार, के एक मामले की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया था.

सुप्रीम कोर्ट ने 16 सितंबर को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिसों से कहा था कि, वे उनके यहां लंबित ऐसे आपराधिक मामलों को तुरंत सुनवाई के लिए उचित पीठ के सामने रखे, खासकर उन मामलों को, जिनमें कोर्ट ने रोक आदेश जारी किया है.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले यह देखा जाए कि रोक जारी रहना जरूरी है या नहीं, कोर्ट ने कहा था कि अगर रोक जारी रहना जरूरी है तो उन मामलों को लगातार सुनवाई के जरिए दो महीने के भीतर ही निपटाया जाए, इसमें कोई भी लापहरवाही न की जाए.

मध्यप्रदेश में उपचुनाव की तैयारियां तेज हैं. 28 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस में है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) भी अपना दमखम दिखा रही है. ऐसे क्षेत्रों में ग्वालियर-चंबल का नाम है जहां बीएसपी मजबूत स्थिति में दिख रही है. चंबल क्षेत्र में 16 सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे हैं और इन सभी सीटों पर बीएसपी मजबूत स्थिति में मानी जा रही है. इसे देखते हुए ग्वालियर-संभाग इलाके में चुनावी लड़ाई त्रिकोणीय होती दिख रही है जिसमें एक तरफ बीजेपी तो दूसरी तरफ कांग्रेस है और बीएसपी इन दोनों दलों का समीकरण बिगाड़ने की तैयारी में है.

बीएसपी का दबदबा
चंबल का क्षेत्र तीनों पार्टियों के लिए इसलिए भी खास हो गया है क्योंकि पूरे मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा उपचुनाव की सीटें यहीं से हैं. दूसरी खास बात यह है कि चंबल की 16 सीटों में 12 सीटें ऐसी हैं जहां बीएसपी के उम्मीदवार कभी न कभी जीत दर्ज कर चुके हैं. इस लिहाज से बीएसपी की तैयारी पहले की तरह पुख्ता मानी जा रही है और वह बीजेपी-कांग्रेस को टक्कर देने की स्थिति में दिख रही है. चंबल का इलाका उत्तर प्रदेश से सटा है, इसलिए बीएसपी और पार्टी प्रमुख मायावती का यहां दबदबा माना जाता है. बीएसपी हालांकि मध्यप्रदेश की सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है, लेकिन चंबल संभाग की सीटों पर उसकी जीत की संभावना ज्यादा है.

बीजेपी भी मजबूत
पहले की तुलना में बीजेपी यहां ज्यादा मजबूत स्थिति में है क्योंकि यह इलाका ज्योतिरादित्य सिंधिया का गढ़ माना जाता है. सिंधिया पहले कांग्रेस में थे लेकिन अब बीजेपी का दामन थाम चुके हैं. इसे देखते हुए बीजेपी भी यहां मजबूत स्थिति में दिख रही है. इन सबके बावजूद बीजेपी की जीत को एकतरफा नहीं कह सकते क्योंकि बीएसपी भी अपनी बड़ी तैयारियों के साथ इस इलाके में उतरी है. बीजेपी के लिए एक प्लस प्वॉइंट यह माना जा रहा है कि सिंधिया के साथ जिन बागी विधायकों ने बीजेपी का दामन थामा, उनमें ज्यादातर चंबल इलाके से ही हैं. अब आगे देखने वाली बात होगी कि चंबल के लोग इन नेताओं की बगावत को स्वीकारते हैं या जनादेश के उल्लंघन का बदला लेते हैं.

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ग्वालियर-चंबल की जिन सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे हैं, उनमें मेहगांव, जौरा, सुमावली, मुरैना, दिमनी, अंबाह, भांडेर, डबरा, करैरा और अशोकनगर सीटें ऐसी हैं जहां बीएसपी पहले कभी न कभी अपनी जीत दर्ज कर चुकी है. क्या इसकी कितनी संभावना है, यह देखने वाली बात होगी. पिछली बार चंबल की कई सीटें ऐसी थीं जहां बीएसपी की जीत भले न हुई हो लेकिन वह दूसरे नंबर पर रही. मुरैना का इलाका खास है क्योंकि यहां बीजेपी की हार के पीछे बीएसपी का बड़ा रोल था. पोहरी, अंबाह और जौरा में बीएसपी ने बीजेपी को तीसरे नंबर पर धकेल दिया था. इसे देखते हुए चंबल इलाके में बीएसपी की मौजूदगी खास मानी जा रही है.

इन सीटों पर उपचुनाव
ग्वालियर-चंबल संभाग की बात करें तो यहां की सीटों में मेहगांव, गोहद, ग्वालियर, लश्कर पूर्व, डबरा, मुरैना, जोरा, दिमनी, अंबाह, सुमावली, भांडेर, पोहरी, करेरा, मुंगावली, अशोक नगर, बमोरी विधानसभा सीटों के नाम हैं जहां उपचुनावव होने हैं. कुल मिलाकर मध्यप्रदेश की 28 सीटों हैं जहां उपचुनाव कराए जा रहे हैं. इन सीटों में नेपानगर, बड़ामलहरा, डबरा, बदवावर, भांडेर, बमौरी, मेहगांव, गोहद, सुरखी, ग्वालियर, मुरैना, दिमनी, ग्वालियर पूर्व, करेरा, हाटपिपल्या, सुमावली, अनूपपुर, सांची, अशोकनगर, पोहरी, अंबाह, सांवेर, मुंगावली, सुवासरा, जौरा, आगर-मालवा , मान्धाता के नाम शामिल हैं. इन सीटों पर 3 नवंबर को उपचुनाव होंगे और नतीजे 10 नवंबर को आएंगे.

 

मध्य प्रदेश की बीजेपी नेता इमरती देवी (Imarti Devi) ने कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ (Kamalnath) पर उनके बयान को लेकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि नवरात्र चल रहे हैं और कमलनाथ भगवती के सामने ‘आइटम’ जैसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं. इमरती देवी ने कहा कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस (Congress) पार्टी कभी सत्ता में नहीं आएगी. बीजेपी सभी 28 सीटों पर जीतेगी और यहां हमेशा बीजेपी (BJP) सरकार रहेगी.

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बीते दिनों बीजेपी प्रत्याशी और कैबिनेट मंत्री इमरती देवी पर टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘आइटम’ कहा था. बता दें कि इमरती देवी कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुई हैं. कमलनाथ ने बीजेपी नेता के बारे में कहा था कि, ‘आप तो उसे (इमरती देवी) मुझसे ज्यादा पहचानते हैं. आपको मुझे पहले ही सावधान कर देना चाहिए था, ये क्या ‘आइटम’ है.’

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कमलनाथ के इस बयान के बाद बीजेपी ने उन्हें जमकर घेरा था. मामले को गंभीरता से लेते हुए शिवराज सिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बीजेपी के अन्य समर्थकों के साथ अलग-अलग जगहों पर धरना दिया था. शिवराज सिंह चौहान ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर कमलनाथ पर ऐक्शन की मांग की थी.

राहुल गांधी ने जताई नाराजगी

कमलनाथ के बयान पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी नाराजगी जताई थी. उन्होंने कहा था कि कमलनाथ मेरी पार्टी के हैं लेकिन जिस तरह की भाषा उन्होंने इस्तेमाल की वह मुझे निजी तौर पर ठीक नहीं लगी. मैं इसे ठीक नहीं मानता. चाहे वह बात किसी के लिए भी कही गई. यह दुर्भाग्यपूर्ण है.

महिला आयोग ने मांगा स्पष्टीकरण

मामले पर कमलनाथ ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने किसी का अपमान करने के लिए ऐसा नहीं कहा था. कमलनाथ के बयान की राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी कड़ी निंदा की थी. महिला आयोग ने कमलनाथ से स्पष्टीकरण भी मांगा था. आयोग ने इलेक्शन कमीशन से भी इस मामले में कार्रवाई करने की अपील की थी.

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मध्य प्रदेश विधानसभा के लिए उपचुनावों में फिजिकल रैलियों के आयोजन पर प्रतिबंध लगाने के हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ ग्वालियर से बीजेपी प्रत्याशी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. हाई कोर्ट ने राजनीतिक दलों को चुनाव प्रचार के लिए वास्तविक सभा आयोजित करने के बजाय वर्चुअल तरीका अपनाने का निर्देश दिया है.

बीजेपी के प्रत्याशी प्रद्युमन सिंह तोमर, जो इस समय राज्य सरकार में ऊर्जा मंत्री हैं, ने अपनी याचिका में कहा है कि उच्च न्यायालय का आदेश त्रुटिपूर्ण है, क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग ने 29 सितंबर को जारी कोविड-19 दिशा निर्देशों में कुछ प्रतिबंधों के साथ चुनाव प्रचार के लिए ‘वास्तविक सभा’ के आयोजन की अनुमति दी है.

याचिका के अनुसार, “उच्च न्यायालय के अंतरिम आदेश से याचिकाकर्ता के वास्तविक सभा के माध्यम से चुनाव प्रचार करने के अधिकार का हनन होता है, क्योंकि निर्वाचन आयोग, केंद्र सरकार और मप्र सरकार ने इसकी अनुमति दी है.” तोमर ने याचिका में कहा है कि हाई कोर्ट ने 20 अक्टूबर को अनेक अंतरिम निर्देश जारी किये हैं, जो चुनाव आयोग द्वारा 29 सितंबर को जारी कोविड-19 दिशा निर्देशों और केंद्र सरकार तथा राज्य सरकार के आठ अक्टूबर के दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हैं.

जनहित याचिका पर आगे कार्यवाही करने पर रोक लगाने की अपील

तोमर ने हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश और उसके सामने लंबित जनहित याचिका पर आगे कार्यवाही करने पर रोक लगाने का अनुरोध किया है. याचिका में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग ने मध्य प्रदेश में 28 सीटों के लिए उपचुनावों की घोषणा करते हुए Covid-19 के दिशानिर्देश तैयार किये थे, जिनका चुनाव के दौरान पालन किया जाना था और इसमें दिशा निर्देशों का पालन करते हुए ‘जनसभाओं’ और ‘चुनावी रैलियों’ के लिए साफ अनुमति दी गयी थी.

याचिका के अनुसार, हाई कोर्ट में एक वकील ने जनहित याचिका दायर की जिसमें आरोप लगाया गया कि विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा आयोजित राजनीतिक कार्यक्रमों की वजह से कोविड-19 संक्रमण के मामलों में वृद्धि हो रही है, लेकिन राज्य प्रशासन ऐसे राजनीतिक दलों और उनके सदस्यों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है. याचिका में कहा गया है कि उच्च न्यायालय ने 12 अक्टूबर को ग्वालियर और दतिया जिलों के प्राधिकारियों को कोविड-19 के प्रोटोकॉल के उल्लंघन के मामलों में FIR दर्ज करने का निर्देश दिया है.

हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश पर उठाए सवाल

इसमें आगे कहा गया है कि 20 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने ग्वालियर और दतिया जिलों के पुलिस अधीक्षकों द्वारा दाखिल अनुपालन हलफनामे का संज्ञान लिया था. याचिका में कहा गया था, “हालांकि यह आरोप लगाया गया था कि राज्य प्रशासन ने केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के खिलाफ कोविड-19 प्रोटोकाल के कथित उल्लंघन के मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई. एडवोकेट जनरल ने हाई कोर्ट को यह भरोसा दिलाया कि इन व्यक्तियों के खिलाफ भी FIR दर्ज की जाएगी.”

तोमर ने यह भी कहा है, “उच्च न्यायालय ने अपने अंतरिम आदेश के जरिए यह गलत निर्देश दिया है कि राजनीतिक दल वास्तविक सभाओं के माध्यम से नहीं बल्कि वर्चुअल तरीके से चुनाव प्रचार करेंगे.” यही नहीं, उच्च न्यायालय ने सभी जिलाधिकारियों को राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को उस समय तक कोई अनुमति नहीं देने का निर्देश दिया है, जब तक जिलाधिकारी इस तथ्य से संतुष्ट नहीं हो जाएं कि वर्चुअल चुनाव प्रचार संभव नहीं है.”

याचिका में उठाए गए ये सवाल?

याचिका में सवाल उठाया गया है कि क्या हाई कोर्ट अपने रिट अधिकार के तहत चुनाव आयोग द्वारा संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत 29 सितंबर को जारी कोविड-19 दिशा निर्देशों को बदल सकता है? याचिका में यह सवाल भी उठाया गया है कि क्या उच्च न्यायालय ने ऐसा अंतरिम आदेश पारित करके निर्वाचन आयोग की संवैधानिक भूमिका का अतिक्रमण किया है, जिसके पास अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव कराने की पूरी जिम्मेदारी है.

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साल 1984 में हुई भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के हित में काम करने वाले संगठनों ने आरोप लगाया है कि भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (BMHRC) के अधिकारी द्वारा जानबूझकर जिला और राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों को कोविड-19 बीमारी से मारे गए गैस पीड़ितों की संख्या कम करके बताई जा रही है.

गैस पीड़ितो के कई संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले ‘भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन’ की रचना ढींगरा ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा कि BMHRC के आइसोलेशन वार्ड में कोविड- 19 की वजह से हुई सात गैस पीड़ितों की मौतों की अस्पताल द्वारा ना तो भोपाल जिला प्रशासन और ना ही मध्य प्रदेश सरकार एवं केंद्र सरकार के अधिकारियों को जानकारी दी गई है.

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संगठनों ने प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य, निदेशक गैस राहत और भोपाल के जिलाधिकारी को पत्र लिख कर मामले में अस्पताल के अधिकारियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग की है. ढींगरा ने कहा कि कोविड-19 से गैस पीड़ित सात मृतकों में से दो की मौत अगस्त में और पांच की मृत्यु सितंबर 2020 में हुई थी और इनमें ज्यादातर मरीज पल्मोनरी (फेफड़े संबंधी बीमारी)विभाग के थे.

उन्होंने कहा कि ये सभी मौतें अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में हुई. इन सात मृतकों के नाम मध्य प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन को भी नहीं दिए गए हैं. इसी की वजह से इन मृतकों की गिनती कोविड-19 के स्वास्थ्य बुलेटिन में भी नही हो पाई है. हालांकि, भोपाल के मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) प्रभाकर तिवारी ने कहा कि संबंधित अधिकारी इन मौतों के बारे में जानकारी देते हैं तो इसे बुलेटिन में शामिल किया जाएगा.

BMHRC के आइसोलेशन वार्ड में सितंबर में आठ गैस पीड़ितों की मौत

उन्होंने यह भी कहा कि जब भी विभाग इन मौतों की जांच के निर्देश देगा, इसकी जांच की जाएगी. ढींगरा ने कहा कि 20 सितंबर को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) को उनके द्वारा संचालित अस्पताल BMHRC के आइसोलेशन वार्ड में सितंबर माह में आठ गैस पीड़ितों की मृत्यु होने की खबर भी हमने दी थी. उन्होंने आरोप लगाया कि ये मौतें आइसोलेशन वार्ड में खराब व्यवस्था के कारण हुई क्योंकि इन मरीजों को देखने के लिए आइसोलेशन वार्ड में एक भी डॉक्टर की पूर्णकालिक ड्यूटी नहीं लगाई गई थी और आज भी वही हालात बरकरार है.

उन्होंने कहा कि ऐसी ही शिकायत उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित निगरानी समिति को भी सौंपी गई थी और उनके द्वारा जवाब मांगने पर भी BMHRC द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया है. गैस पीड़ितों के संगठनों ने यह भी मांग की है कि जिला प्रशासन इस बात की भी जांच कराए की कोरोना वायरस से संक्रमण की शुरुआत से लेकर अभी तक कोविड-19 पीड़ित कितने गैस पीड़ितों की मृत्यु अस्पताल में हुई है और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए.

उन्होंने कहा कि कोविड-19 संक्रमण का असर सामान्य आबादी के मुकाबले गैस पीड़ितों में कई गुना ज्यादा है. सबसे बड़ी विडंबना है की जो अस्पताल सिर्फ गैस पीड़ितों को सही इलाज देने की उद्देश्य से बनाया गया था, वहीं अस्पताल गैस पीड़ितों में कोविड-19 की वजह से हो रही मौतों के आंकड़ों को कम करने में लगा है.

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मध्यप्रदेश उपचुनाव की सरगर्मी तेज है. पूर्व मुख्यमंत्री कमनलाथ के एक बयान पर तकरार छिड़ी हुई है. दरअसल, कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एक चुनावी सभा में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) प्रत्याशी और मंत्री इमरती देवी को आइटम कह दिया था. चारों तरफ से विरोध होने के बाद कमलनाथ ने कहा था कि आइटम कोई अपमानजनक शब्द नहीं है. कमलनाथ की पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी इसे आपत्तिजनक बयान बताया लेकिन कमलनाथ अपनी बात पर अड़े रहे और उसे राहुल गांधी की निजी राय बता दी. इस विवाद के बाद ऐसी ही एक घटना बीजेपी में हुई है. मध्यप्रदेश बीजेपी के एक नेता ने कमलनाथ के खिलाफ विवादित टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘कमरनाथ’ बोल दिया. इस बयान पर मध्यप्रदेश कांग्रेस ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है.

पूरा मामला इंदौर लोकसभा क्षेत्र से सांसद शंकर लालवानी से जुड़ा है. इंदौर में गुरुवार को पत्रकारों को फिल्म अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडीज के साथ कमलनाथ की आठ महीने पुरानी एक तस्वीर दिखाते हुए लालवानी ने दावा किया था कि उनके सामने एक मेडिकल छात्रा ने कमलनाथ के लिए ‘कमरनाथ’ शब्द का इस्तेमाल किया. बीजेपी सांसद ने कहा, ‘इंदौर जिले के सांवेर विधानसभा क्षेत्र में जनसंपर्क के दौरान मुझे बुधवार को एमबीबीएस कोर्स की एक छात्रा मिली जो इमरती देवी के बारे में कमलनाथ की अभद्र टिप्पणी से बेहद नाराज है. इस छात्रा ने मुझे जैकलीन के साथ कमलनाथ की तस्वीर दिखाते हुए गुस्से में बोला कि यह कमलनाथ नहीं, बल्कि कमरनाथ हैं.’ लालवानी ने हालांकि उस मेडिकल छात्रा का नाम नहीं बताया.

बीजेपी सांसद के खिलाफ शिकायत
सांसद शंकर लालवानी के बयान का मामला अब निर्वाचन आयोग तक पहुंच गया है. मध्यप्रदेश कांग्रेस ने गुरुवार को लालवानी के खिलाफ चुनाव आयोग में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करने की शिकायत दर्ज कराई और लालवानी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. कांग्रेस ने अपने आरोप में कहा है कि लालवानी ने लोकप्रिय अभिनेत्री के साथ पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की एक पुरानी तस्वीर दिखाते हुए कमलनाथ के लिए ‘कमरनाथ’ शब्द का इस्तेमाल किया है. कांग्रेस की ओर से शिकायत में कहा गया है कि 28 विधानसभा सीटों के उपचुनाव के चलते आदर्श आचार संहिता लागू है और इस दौरान किसी के खिलाफ टिप्पणी, अभद्र और अशोभनीय बातें करने पर पूरी तरह रोक है. इसे देखते हुए लालवानी के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए.

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बता दें, बीजेपी सांसद ने स्थानीय मीडिया को जो तस्वीर दिखाई है, वह उस मौके की है जब सलमान खान और जैकलीन फर्नांडीज ने फरवरी में भोपाल में कमलनाथ की मौजूदगी में इंटरनेशनल इंडियन फिल्म एकेडमी (आईफा) के पुरस्कार समारोह का ऐलान किया था. हालांकि, बाद में कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस प्रोग्राम को रद्द कर दिया गया था. अब शंकर लालवानी के बयान के बाद यह मामला काफी तूल पकड़ता जा रहा है.
धमकी पर घिरे बीजेपी मंत्री दूसरी ओर प्रदेश के एक और मंत्री चुनाव के बीच विवादों में घिर गए हैं. कांग्रेस ने प्रदेश के मंत्री बिसाहूलाल सिंह के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई है. सोशल मीडिया में एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें सिंह हाथ में पिस्तौल लेकर कथित तौर पर एक व्यक्ति को मारने की धमकी देते दिखाई दे रहे हैं. बिसाहूलाल सिंह अनूपपुर विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी उम्मीदवार के तौर पर उपचुनाव लड़ रहे हैं. इसी सीट से उन्होंने साल 2018 में विधानसभा का आमचुनाव कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर जीता था. हालांकि प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने वीडियो को नकली और लगभग आठ साल पुराना बताया है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस कमलनाथ की विवादास्पद टिप्पणी ‘आइटम’ को छुपाने के लिए प्रदेश के वरिष्ठ आदिवासी नेता को बदनाम करने के लिए इस तरह के वीडियो वायरल करवा रही है.

क्या है ‘आइटम’ का विवाद
उपचुनावों के बीच मध्यप्रदेश में कमलनाथ अपने एक बयान को लेकर घिरे हुए हैं. कांग्रेस नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने एक चुनावी सभा में बीजेपी प्रत्याशी और मंत्री इमरती देवी को आइटम कह दिया था. हंगामा होने के बाद पहले तो कमलनाथ ने कहा कि आइटम को अपमानजनक शब्द नहीं है, बाद में उन्होंने अपनी बात रखने के लिए कई अलग-अलग तर्क दिए. हालांकि इन तर्कों पर वे और लगातार घिरते चले गए. कमलनाथ ने अपने बचाव में कहा था कि विधानसभा और संसद में भी आइटम नंबर कहा जाता है. उन्होंने यह भी कहा कि वे नाम भूल गए थे और लिस्ट में आइटम नंबर 1, 2, 3 से ही नाम लिखा जाता है. बाद में अपने बयान पर उन्होंने खेद जताया लेकिन चुनाव में यह मामला तब तक काफी तूल पकड़ चुका था.(PTI से इनपुट)

 

तमिलनाडु के बाद अब मध्य प्रदेश (MP) के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी राज्य के हर नागरिक को कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) मुफ्त में देने की बात कही है. इससे पहले तमिलनाडु के सीएम ई. पलानीस्‍वाती ने कहा है था कि उनके राज्‍य में भी लोगों को कोरोना वैक्‍सीन फ्री में दी जाएगी.

दरअसल मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को एक ट्वीट कर लिखा, “मेरे प्रदेशवासियों, COVID-19 से जनता को बचाने के लिए हमने अनेक प्रभावी कदम उठाए हैं. आज यह पूरी तरह से नियंत्रित है. भारत में कोरोना की वैक्सीन तैयार करने का कार्य तेजी से चल रहा है, जैसे ही वैक्सीन तैयार होगी, मध्यप्रदेश के प्रत्येक नागरिक को वह मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएगी.”

दरअसल सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी ने बिहार विधानसभा चुनाव के अपने घोषणा पत्र में राज्य के नागरिकों को फ्री में कोरोना वैक्सीन देने का वादा किया था, जिसके बाद मानों वैक्सीन को फ्री में बांटने के वादे को लेकर एक होड़ सी मच गई हो.

इसके बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई. पलानीस्‍वाती ने घोषणा कर दी कि वो भी अपने राज्य में कोरोना वैक्सीन में मुफ्त में उपलब्ध कराएंगे. हालांकि, इसको भी चुनाव से जोड़ कर ही देखा जा रहा है, क्योंकि तमिलनाडु में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं.

चुनावी राज्य में फ्री वैक्सीन के वादे पर नाराज हुआ विपक्ष

वहीं प्रमुख विपक्षी दलों ने बिहार के लोगों को कोरोनावायरस का टीका मुफ्त में उपलब्ध कराने के बीजेपी के चुनावी वादे को लेकर उस पर राजनीतिक लाभ के लिए महामारी का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की.

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बीजेपी के इस वादे को लेकर तंज कसते हुए कहा कि भारत सरकार ने कोविड के टीके के वितरण की रणनीति की घोषणा कर दी है और अब लोग इसे हासिल करने की जानकारी के लिए राज्यवार चुनाव कार्यक्रमों पर गौर कर सकते हैं.

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मध्यप्रदेश के दो मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. दोनों मंत्री प्रदेश में 3 नवंबर को होने वाले उपचुनाव में प्रत्याशी हैं. इन दोनों मंत्रियों के नाम तुलसीराम सिलावट और गोविंद राजपूत है. दोनों मंत्री पिछले 6 महीने से विधानसभा के सदस्य नहीं थे. संविधान के अनुच्छेद 164(4) के मुताबिक, कोई मंत्री अगर लगातार छह महीने तक विधानसभा का सदस्य नहीं रहता है तो वह मंत्री पद पर नहीं बना रह सकता. सिलावट इंदौर जिले सांवेर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. सिलावट ने जल संसाधन मंत्री पद से अपना इस्तीफा दे दिया है.

सिलावट ने प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को लिखे एक पत्र में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 164(4) के तहत जल संसाधन मंत्री के पद से इस्तीफा दे रहा हूं. सिलावट का यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है. इसी तरह गोविंद राजपूत ने भी परिवहन मंत्रालय से इस्तीफा दे दिया है. दोनों ने 21 अप्रैल को मंत्री पद की शपथ ली थी. मध्यप्रदेश में 2 जुलाई को कैबिनेट विस्तार किया गया था जिसमें कई गैर-विधानसभा सदस्यों को मंत्री बनाया गया था. विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे मंत्रियों को अपने पद से इस्तीफा देने की जरूरत नहीं है. सिलावट और राजपूत बीजेपी के राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के काफी करीबी माने जाते हैं. इन दोनों के साथ 20 अन्य विधायकों ने मार्च में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और बीजेपी से जुड़ गए. इन नेताओं के इस्तीफे के बाद प्रदेश में कमलनाथ की सरकार गिर गई. बाद में अन्य तीन कांग्रेस विधायकों ने इस्तीफा दे दिया. तीन विधायकों का निधन भी हो गया है, जिसके बाद प्रदेश की 28 सीटों पर 3 नवंबर को उपचुनाव कराया जा रहा है.

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बता दें कि संविधान का अनुच्छेद 164 (4) कहता है, कोई मंत्री, जो लगातार छह महीने तक राज्य के विधान-मंडल का सदस्य नहीं है, उस अवधि की समाप्ति पर वह मंत्री नहीं रहेगा. मध्यप्रदेश में सात महीने पहले सत्ता बदलने के बाद सिलावट को विधानसभा की सदस्यता के बगैर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पांच सदस्यीय कैबिनेट में 21 अप्रैल को शामिल किया गया था. इससे पहले, वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया की सरपरस्ती में सिलावट समेत कांग्रेस के 22 बागी विधायकों के विधानसभा से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल होने के कारण तत्कालीन कमलनाथ सरकार का 20 मार्च को गिर गई थी.

इसके बाद शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में बीजेपी 23 मार्च को सूबे की सत्ता में लौट आई थी. मध्यप्रदेश में नवंबर 2018 के पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान सिलावट कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर सांवेर सीट से जीत कर विधानसभा पहुंचे थे और कमलनाथ सरकार में उन्हें लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बनाया गया था. विधानसभा के लिए होने वाले उपचुनावों में बीजेपी ने सिलावट को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित इसी सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है. इस सीट पर उनकी टक्कर कांग्रेस उम्मीदवार और पूर्व लोकसभा सांसद प्रेमचंद गुड्डू के साथ है. सांवेर मध्यप्रदेश के उन 28 विधानसभा क्षेत्रों में शामिल है जहां तीन नवंबर को उप चुनाव होने जा रहे हैं.

ज्योतिरादित्य सिंधिया के कट्टर समर्थक माने जाने वाले गोविंद राजपूत फिलहाल सागर जिले के सुरखी विधानसभा सीट से उपचुनाव में बीजेपी के प्रत्याशी के तौर पर मैदान में हैं. उनका मुख्य मुकाबला कांग्रेस की पारुल साहू से है. सुरखी विधानसभा सीट पर भी तीन नवंबर को वोटिंग होगी और नतीजे 10 आएंगे. इसी दिन बिहार चुनावों के नतीजे भी जारी होंगे. गोविंद राजपूत साल 2018 के विधानसभा चुनाव में सुरखी से कांग्रेस के टिकट पर चुने गए थे. निर्वाचित होने के बाद वे तत्कालीन कमलनाथ सरकार में मंत्री बने. इस साल मार्च महीने राजपूत ने विधायक पद से त्यागपत्र देकर बीजेपी का दामन थाम लिया था. बाद में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें मंत्री बनाया था.(PTI से इनपुट)

 

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) में 16 साल की किशोरी ने अपने पिता की पीट-पीट कर हत्या कर दी. हत्या के बाद बेटी ने पुलिस को फोन करके बुलाया. लड़की ने पुलिस को बताया कि उसका पिता मां के साथ मारपीट करता था. इसी से तंग आकर बेटी ने बुधवार की शाम 6.30 बजे वारदात को अंजाम दिया. नाबालिग बेटी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है.

बेटी ने पुलिस को बताया कि वह अपने पिता भंवरलाल की रोज की चिक-चिक से परेशान हो गई थी. वह हर रोज घर आकर म्मी को गाली देते और मारपीट करते थे. रोज-रोज यह देखा नहीं जा रहा था. इसीलिए पिता की हत्या कर दी. मामला बुधवार की शाम 6.30 बजे का है.

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बैरसिया SDOP केके वर्मा ने बताया कि भंवरलाल का बेटा भोपाल में रहकर घर बनाने का काम करता है. बुधवार की शाम जब पिता भंवरलाल घर लौटा तो शराब के नशे में था. इस दौरान उसकी पत्नी ने बेटे लोकेश की शादी की बात छेड़ी. इस पर भंवरलाल उसे गाली बकने लगा. नाबालिग बेटी ने बीचबचाव किया तो पिता को गुस्सा आ गया, जिसके बाद वह दोनों के साथ गाली-गलौज और मारपीट करने लगा.

तब तक पीटा जब तक मौत नहीं हो गई

इस दौरान बेटी ने घर में रखी लोहांगी उठाई और पिता के सिर पर मारना शुरू कर दिया. लुहांगी से पीटने के बाद उसने कपड़ा धोने वाली मोगरी से पिता के सिर पर और पीठ पर मारना शुरू कर दिया. वह अपने पिता को तब तक पीटती रही जब तक उसकी मौत नहीं हो गई. बैरसिया पुलिस मौके पर पहुंच गई है और बेटी को हिरासत में ले लिया है.

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मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में उपचुनाव पूरे शबाब पर हैं. 28 सीटों पर चुनाव होना है. इसके लिए 3 नवंबर को मतदान और 10 नवंबर को मतगणना होगी. कांग्रेस (Congress) और बीजेपी (BJP) दोनों पूरी ताकत से इस चुनाव में जुटे हुए हैं. बीजेपी की ओर से चेहरा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) हैं. साथ में ज्योतिरादित्य सिंधिया, नरेंद्र सिंह तोमर और दूसरे बड़े नेता पूरी ताकत से चुनाव में जुटे हुए हैं.  जबकि कांग्रेस की ओर से कमलनाथ ने अकेले मोर्चा संभाल हुआ है.

गौरतलब है कि ये चुनाव कमलनाथ (Kamalnath) वर्सेस शिवराज के ईर्दगिर्द घूमता ही नजर आ रहा है. इन चुनावों में ऐसा पहली बार है जब दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) प्रचार प्रक्रिया में दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहे, जबकि ग्वालियर, चंबल का पूरा क्षेत्र दिग्विजय सिंह के प्रभाव का माना जाता है.

दिग्विजय को चुनाव से दूर रखे जाने के कई मायने निकाले जा सकते हैं. दिग्विजय सिंह ने 2018 के चुनाव में समन्वय की भूमिका निभाई थी. कांग्रेस सरकार बनने के बाद यह माना जा रहा था कि दिग्विजय सिंह के समन्वय के चलते कांग्रेस को काफी फायदा हुआ है, हालांकि सरकार बनने के बाद समन्वय बिखरता हुआ नजर आया और सरकार गिरने का भी ठीकरा दिग्विजय सिंह के सिर पर ही फोड़ा गया.

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कांग्रेस की टीम का सिर्फ एक ही कप्तान ‘कमलनाथ’ 

दिग्विजय सिंह से जब इस बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘जैसा कमांडर कहेगा वैसा हम करेंगे’. दिग्विजय ने कहा, ‘कांग्रेस की टीम का सिर्फ एक कप्तान है और वह कमलनाथ हैं’.
उन्होंने कहा, ‘हम चुनाव आयोग के साथ समन्वय की भूमिका में है और जल्दी ही और ब्यावरा और अशोक नगर दौरा करने जाएंगे’.

नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह (Bhupendra Singh) ने कहा, ‘जब राज्य में दिग्विजय सिंह की सरकार थी तब पर्दे के पीछे से सरकार चलाते थे’. उन्होंने कहा, ‘खुद दिग्विजय सिंह ने कहा था कि वो जहां भी जाते हैं, वोट कट जाते हैं, जनता उनसे नफरत करती है इसीलिए वो प्रचार करने नहीं जाते, हालांकि दिग्विजय सिंह के दीमाग से ही ये पूरा प्रचार चल रहा है’.

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मध्य प्रदेश विधानसभा उपचुनाव (Madhya Pradesh Assembly Byelection) की तारीखें जैसे-जैसे नजदीक आ रही हैं, वैसे-वैसे भाषा की मर्यादा टूटती जा रही है. अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) को कांग्रेस विधायक ने ‘बहरा’ मुख्यमंत्री करार दिया है. शिवपुरी जिले के करैरा में हुई कांग्रेस की सभा में चंदेरी विधायक गोपाल सिंह डग्गी राजा ने शिवराज को बहरा मुख्यमंत्री कहकर संबोधित किया. गोपाल सिंह ने मंच से जनता से कहा कि कर्ज माफ हुआ या नहीं, इतनी जोर से बोलिए कि भोपाल में बैठा ‘बहरा’ मुख्यमंत्री शिवराज भी सुन ले.

गोपाल सिंह ने कहा, “मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में सरकार चल रही थी. लोग कहते हैं कि कर्ज माफ नहीं हुआ, आप बताइए कि एक लाख तक का कर्ज माफ हुआ कि नहीं. हम दो लाख तक के कर्ज माफ करेंगे. हमारी सरकार ने राज्य में हजारों गौशाला बनवाई, जबकि भाजपा केवल इसकी बात करती रही.”

कांग्रेस नेता के बयान का शिवराज ने दिया जवाब, ‘हां, मैं भूखे-नंगे परिवार से हूं’

कमलनाथ के ‘आइटम’ वाले बयान पर हुआ हंगामा 

गौरतलब है कि इससे पहले ‘आइटम’ शब्द का प्रयोग करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ चौतरफा घिर गए. भाजपा तो हमलावर है ही, साथ ही पार्टी के नेता भी उनसे किनारा करने लगे. दरअसल, कमलनाथ ने पिछले दिनों डबरा विधानसभा क्षेत्र में जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा की उम्मीदवार इमरती देवी का नाम लिए बगैर ‘आइटम’ कहा था. उसके बाद से उन पर लगातार हमले हो रहे हैं.

सिंधिया ने बताया भारतीय संस्कृति के खिलाफ

राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कमल नाथ के बयान को भारतीय संस्कृति के खिलाफ बताया और कहा, “कमल नाथ ने डबरा से भाजपा की उम्मीदवार और सरकार की मंत्री इमरती देवी जो दलित वर्ग से हैं, उन पर जो टिप्पणी की, जिन शब्दों का इस्तेमाल किया, वह उनके चरित्र और नीयत को दर्शाता है. जनता उन्हें इसका जवाब देगी.”

माफी न मांगने पर उठाया सवाल

कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेता मानक अग्रवाल ने कमल नाथ के माफी न मांगने पर सवाल उठाया. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के करीबियों में गिने जाने वाले मानक अग्रवाल ने कहा, “राहुल गांधी का बयान आने के बाद कमल नाथ को माफी मांग लेना चाहिए थी. अभी भी समय है कि वे माफी मांग लें.”

मध्य प्रदेश उपचुनाव: 67 उम्मीदवारों का नामांकन रद्द, मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार

मध्य प्रदेश उप चुनाव (MP By Poll) के तहत होने वाली सभाओं को रद्द (Cancel) किए जाने पर सीएम शिवराज सिंह चौहान ने वहां की जनता से माफी मांगते हुए कहा कि वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाएंगे, और न्याय मांगेंगे.

सीएम शिवराज सिंह (CM Shivraj Singh) ने कहा कि आज होने वाली सभाओं को उन्होंने हाईकोर्ट (HC) की ग्वालियर बेंच के फैसले के बाद रद्द किया है, वह कोर्ट के फैसले (Decision) का सम्मान करते हैं, लेकिन वह इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे. उन्होंने कहा कि एक देश में दो विधान (One Country Two Rules) जैसी स्थिति हो गई है.

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हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ SC जाएंगे सीएम शिवराज

सीएम ने कहा कि आज उनकी अशोक नगर और भांडेर में जनसभाएं होनी थी, लेकिन हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने जनसभा न करने के निर्देश देते हुए कहा कि उन्हें वर्चुअल रैली करनी होगी, या फिर चुनाव आयोग की अनुमति के बाद ही सभाएं करने की अनुमति होगी.

सीएम शिवराज सिंह ने सवाल उठाया कि ये कैसा कानून है कि देश के एक हिस्से में जनसभा हो सकती है, और दूसरे में नहीं. उन्होंने कहा कि बिहार में चुनावी सभाएं हो रही हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक हिस्से में चुनावी सभा की अनुमति नहीं है.

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उन्होंने कहा कि वह इस मामले में न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं, उन्हें पूरा विश्वास है कि उन्हें न्याय जरूर मिलेगा, इसके साथ ही उन्होंने दोनों जगहों की जनता से माफी भी मांगी.

मध्य प्रदेश में तीन नवंबर को होने वाले उपचुनाव के लिए प्रचार के दौरान चुनाव सभाओं में कोविड-19 के दिशानिर्देशों का पालन नहीं करने पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच ने मंगलवार को केंद्री मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ पर FIR दर्ज करने के अंतरिम आदेश दिए हैं. इसके साथ ही अदालत ने ‘फिजिकल’ चुनाव सभाओं पर रोक लगाते हुए केवल ‘वर्चुअल’ सभा करने के लिए कहा है और इसकी जिम्मेदारी संबंधित कलेक्टरों के साथ-साथ चुनाव आयोग को सौंपी गई है.

जस्टिस शील नागू और जस्टिस राजीव कुमार श्रीवास्तव की कपल बेंच ने आशीष प्रताप सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिए हैं. इस मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को होगी. याचिकाकर्ता के वकील सुरेश अग्रवाल ने यह जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने नौ जिलों के कलेक्टरों को कई बार कोरोना के दिशानिर्देशों के अनुरूप चुनाव सभाओं के लिए आदेश दिए, लेकिन हमेशा इसका पालन नहीं हुआ.

फिजिकल चुनाव सभाओं के लिए कलेक्टर से लेनी होगी अनुमति

इस वजह से अब हाईकोर्ट ने सभी फिजिकल चुनाव सभाओं पर रोक लगाई है और केवल वर्चुअल सभाएं करने की अनुमति दी जाएगी. उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रत्याशी को चुनाव सभा आयोजित करनी है, तो उसे कलेक्टर के यहां आवेदन करके यह बताना होगा कि वर्चुअल सभा में क्या परेशानी है. इस आवेदन पर यदि कलेक्टर संतुष्ट होते हैं तो उसे चुनाव आयोग के पास यह आवेदन आगे भेजना होगा.

अग्रवाल ने बताया कि इसके साथ प्रत्याशी को Covid-19 के दिशानिर्देशों के तहत, जितने लोगों की अनुमति सभा के लिए यदि प्रत्याशी को मिलती है, तो उसे कलेक्टर के पास मास्क और सेनिटाइजर के लिए दोगुनी राशि जमा करानी होगी और जितने लोगों को सभा में बुलाया जा रहा है, उन्हें मास्क और सेनिटाइजर देकर शामिल होने दिया जा रहा है तथा सभा में सोशल डिस्टेंस सही तरीके से रखा जा रहा है. प्रत्याशी को इस आशय का एक हलफनामा भी देना होगा, तभी उसे फिजिकल चुनाव रैली की अनुमति मिलेगी.

मध्यप्रदेश उपचुनाव: ‘आइटम’ वाले बयान पर कमलनाथ को चुनाव आयोग का नोटिस, 48 घंटों में देना होगा जवाब

चुनाव आयोग (EC) ने बुधवार को कांग्रेस नेता कमलनाथ (Kamal Nath) को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नेता इमरती देवी पर की गई “आइटम” वाली टिप्पणी के खिलाफ नोटिस भेजा है. आयोग ने मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री को अगले 48 घंटों में अपना जवाब दाखिल करने के लिए कहा है.

टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए, आयोग ने नोटिस में कहा कि मध्य प्रदेश में उपचुनावों के कारण लागू आदर्श आचार संहिता के तहत कोई भी पार्टी ऐसी किसी भी गतिविधि में लिप्त नहीं होगी, जो मतभेद या आपसी घृणा को बढ़ावा दे या विभिन्न जातियों और समुदायों के बीच तनाव का कारण बने है.

दरअसल ग्वालियर के डबरा शहर में 3 नवंबर को होने वाले उपचुनाव के लिए रविवार को एक सभा को संबोधित करते हुए, कमलनाथ ने बीजेपी की उम्मीदवार इमरती देवी को ‘आइटम’ बोल दिया था, वे यहां कांग्रेस उम्मीदवार सुरेश राजे के लिए सभा को संबोधित कर रहे थे.

मुझे तरह की भाषा बिल्कुल पसंद नहीं- राहुल

कमलनाथ की इस टिप्पणी के बाद प्रदेश की महिला एवं बाल विकास मंत्री इमरती देवी सोमवार को ग्वालियर जिले के डबरा में फूट-फूट कर रोईं. इतना ही नहीं खुद राहुल गांधी ने भी कमलनाथ के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है और कहा है कि उन्हें इस तरह की भाषा बिल्कुल पसंद नहीं है.

वहीं राहुल के बयान पर कमलनाथ ने कहा है कि वह उनकी अपनी राय है. अगर किसी को अपमान महसूस हुआ है, तो मैं पहले ही खेद जता चुका हूं. इससे पहले महिला आयोग ने भी इस मामले पर कमलनाथ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.

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इन दिनों मध्य प्रदेश में चुनाव प्रचार की बहार आई हुई है. 28 सीटों पर होने जा रहे उपचुनाव बीजेपी के लिए बहुत अहम हैं. इस चुनाव के नतीजे ही प्रदेश में भाजपा की तकदीर तय करेंगे कि वो सत्ता में रहेगी या जाएगी.

फिलहाल चुनावों की तफसील में न जाते हुए बात करते हैं चुनावी बयानबाजियों और टिप्पणियों की. मौसम कोई भी हो, मौका कोई भी, मंच पर माइक के सामने खड़े पुरुष अपनी मर्दवादी मानसिकता का मुजाहिरा पेश करने से कतई बाज नहीं आते. औरतें कभी इनके लिए टंच माल, कभी आइटम, कभी नाचने वाली तो कभी 10 करोड़ की गर्लफेंड होती हैं. इन चुनावों में भी ऐसे बयानों का सिलसिला शुरू हो गया है.

ज्योतिरादित्य सिंधिया के पीछे-पीछे कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुई इमरती देवी को एक चुनावी सभा में कमलनाथ ने भरे मंच से ‘आइटम’ कहकर बुलाया. फिर क्या था, बीजेपी ने तत्काल इस मुद्दे को लपक लिया. लेकिन जाहिर है कि पार्टी कोई भी हो और नेता कोई भी, उनके लिए ये महज एक मुद्दा ही है. वास्तव में स्त्री की अस्मिता से इनका कोई खास सरोकार नहीं है. अगर ऐसा नहीं होता तो खुद ज्योदिरादित्य सिंधिया एक चुनावी सभा में इमरती देवी को बांहों से पकड़कर यह न कहते कि “इमरती तो मेरी है.” फिलहाल इन चुनावी खेल में दोनों ही पक्ष उनके साथ समान रूप से अपमानजनक व्यवहार करते देखे गए.

लेकिन भारतीय राजनीति के इतिहास में यह कोई पहला वाकया नहीं है, जब मर्दों ने औरतों के लिए इस तरह सार्वजनिक रूप से अभद्र भाषा और शब्दों का इस्तेमाल किया है.

पिछले साल अप्रैल में यूपी के रामपुर में एक चुनावी सभा में आजम खान ने जया प्रदा पर टिप्पणी करते हुए कहा, “जिसे हम उंगली पकड़कर रामपुर लाए, उनकी असलियत समझने में आपको 17 बरस लगे, मैं 17 दिन में पहचान गया कि इनके नीचे का अंडरवियर खाकी रंग का है.”

राजनीतिक मतभेद अपनी जगह है, लेकिन यह अलग से समझाने की जरूरत नहीं कि एक स्त्री के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल कितना अपमानजनक है. लेकिन सच तो ये है कि यही इनकी संस्कृति है. और संस्कृति का निर्वाह करने में कोई पीछे नहीं. सबमें होड़ लगी है कि मुझसे बढ़कर कौन? इसलिए 2018 में जब सपा ने जया बच्चन को राज्यसभा के लिए दोबारा नामांकित किया तो बीजेपी नेता नरेश चंद्र अग्रवाल सीना तानकर बोले, ये “फिल्मों में नाचने वाली” हैं.

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संकट के समय ज्यादा मददगार होती हैं महिलाएं

2012 में एक टीवी शो के दौरान कांग्रेस नेता संजय निरूपम ने स्मृति ईरानी के लिए कहा, “मुझे आपको सुनने की जरूरत नहीं है. आपको राजनीति में आए चार दिन हुए हैं. कल तक आप टेलीविजन पर नाच रही थीं और आज नेता बन गई हैं.” निरूपम को यह बयान काफी महंगा पड़ गया. ईरानी मजबूत महिला हैं. इस बयान को लेकर उन्होंने निरूपम को कोर्ट तक घसीटा.

दिग्विजय सिंह का भी ऐसी टिप्पणियों का पुराना इतिहास है. 2013 में एक चुनावी सभा में सिंह ने कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को “टंच माल” कहकर बुलाया था.

बीजेपी के नेताओं ने भी सोनिया गांधी को जर्सी गाय कहकर बुलाया है. उन्होंने सोनिया और प्रियंका गांधी पर अभद्र और अपमानजनक टिप्पणियां करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है.

सिर्फ किसी महिला नेता पर ही नहीं, बल्कि आमतौर पर महिलाओं के मुद्दों पर भी जब भी मर्द मुंह खोलते हैं तो कोई न कोई डरावनी बात ही करते हैं.
महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा और बलात्कार के सवाल पर कैलाश विजयवर्गीय ने सारा जिम्मा औरतों के सिर डाल दिया और बोले, “उन्हें ऐसा श्रृंगार करना चाहिए, जिससे श्रद्धा पैदा हो, न कि उत्तेजना. उन्हें लक्ष्मण रेखा में रहना चाहिए, रेखा लांघेगी तो रावण उठा ले जाएगा.”

मुलायम सिंह यादव ने तो बलात्कारी मर्दों को क्लीन चिट देते हुए भरे मंच से कह दिया था, “लड़कों से गलती हो जाती है.”

सच तो ये है कि ये किसी पार्टी विषेश या व्यक्ति विशेष की बात नहीं है. औरतों को माल या वस्तु समझने, उनके साथ अभद्र व्यवहार करने, अपमानजनक टिप्पणियां करने में कोई पीछे नहीं है. मर्दवादी सोच में सभी मर्दों में आश्चर्यजनक रूप से एकता और भाईचारा है. सब एक ही नाव पर सवार हैं, जिसमें औरतों के लिए कोई गरिमापूर्ण जगह नहीं है.