सरकार की लापरवाही के चलते डूब रहे मध्य प्रदेश के 178 गांव, करीब एक लाख लोग प्रभावित

15 दिन पहले अचानक से गांव में ऐलान हुआ कि गांव खाली करना है. यहां के लोग अभी भी सामान निकालने में लगे हैं.
Madhya Pradesh Village submerged, सरकार की लापरवाही के चलते डूब रहे मध्य प्रदेश के 178 गांव, करीब एक लाख लोग प्रभावित

इंदौर: मध्य प्रदेश के धार जिले का चिकलदा गांव पूरी तरह से पानी में डूब गया है. यहां कि आबादी करीब 3 हजार से ज्यादा है. 15 दिन पहले अचानक से गांव में ऐलान हुआ कि गांव खाली करना है. यहां के लोग अभी भी सामान निकालने में लगे हैं.

नौशाद पीढ़ियों से इसी गांव में रह रहे हैं लेकिन अचानक गांव खाली करने का आदेश मिला है. नौशाद की तरह की गांव के ज्यादातर लोग इसी उम्मीद में हैं कि प्रशासन उनकी बात सुनेगा.

दो राज्यों के बीच फंसा गांव

नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) के प्लान के मुताबिक ये गांव डूब में तो थे लेकिन पानी अक्टूबर तक बढ़ना था. लेकिन सितंबर के पहले सप्ताह में पानी बढ़ गया.

दरअसल ये लड़ाई दोनों राज्यों (गुजरात और मध्यप्रदेश) के बीच की है, गुजरात सरकार सरदार सरोवर का लेवल 138.6 मीटर कर रहा है जो कि अभी 135 मीटर किया जा चुका है. तय समय-सीमा से पहले लेवल बढ़ाए जाने से अचानक गांवों में पानी आ चुका है.

4 जिलों के 178 गांव डूब रहे

चिकलदा के मुख्य बस स्टैंड पर में 2-3 फुट तक पानी भर चुका है जबकि निचली बस्तियां पूरी तरह से डूब चुकी हैं. सरकारी स्कूल, मस्जिद, दुकानें, पंचायत भवन और मकान सब डूब गए हैं.

लोग घरों की दीवारों को तोड़ कर सामान बचा रहे हैं. आवारा जानवर भी घरों और दुकानों की छतों पर डेरा डाले हुए हैं. जानकारी के मुताबिक आस-पास के इलाकों की बात करें तो 4 जिलों के 178 गांव डूब रहे हैं. इस वजह से लगभग 1 लाख लोग प्रभावित होगें.

खेतों की बिजली काट दी गई

बड़वानी का छोटी कसरावद गांव डूब में नहीं था. 2008 में इसे डूब से बाहर कर दिया गया था. लेकिन अब इस गांव को चारों ओर से पानी ने घेर लिया है. जलस्तर बढ़ने के साथ गांव में पानी आना तय है. गांव के लोग जबरदस्त नाराज हैं क्योंकि कोई सुनता नहीं.

गांव वालों का कहना है कि किसानों की जमीन तो है लेकिन वो जमीनों तक पहुंच नहीं पा रहे क्योंकि पहुंच मार्ग पर पानी भरा है. खेतों की बिजली काट दी गई है. ऐसे में उनके जीवन पर संकट खड़ा हो गया है.

‘2 राज्यों की राजनीति में जनता पिस रही’

नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर का कहना है कि 2 राज्यों की राजनीति में जनता पिस रही है‌. मेघा पाटकर का कहना है कि सरकार की लापरवाही के चलते कई गांव डूब रहे हैं जिन्हें मुआवजा नहीं मिला है.

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के हिसाब से काम नहीं हो रहा. नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अफसरों की लापरवाही ने सारी मुश्किल पैदा की है. गुजरात अपनी जिद छोड़ कर पानी छोड़ दे तो सारी समस्याओं का समाधान हो जाएगा.

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