मध्यप्रदेश में डॉक्टरों की जबरदस्त कमी, 70% सरकारी पद खाली

मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार राइट टू हेल्थ कानून लाने की तैयारी कर रही है मगर प्रदेश डॉक्टरों की कमी झेलने को मजबूर है.

मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार राइट टू हेल्थ के जरिए प्रदेश भर के लोगों को स्वास्थ्य का अधिकार यानी कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने की कोशिश में है. हालांकि यह दावा इसलिए अधूरा सा लगता है क्योंकि मध्यप्रदेश में डॉक्टरों की जबरदस्त कमी है. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 70% सरकारी पद खाली पड़े हुए हैं. ऐसे में सरकार के पास कोई रोडमैप नहीं है जिसके जरिए स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बना सके.

विशेषज्ञों के 3278 पदों में अभी 1029 कार्यरत हैं. इस साल रिटायर होने वाले 174 डॉक्टरों में करीब 100 विशेषज्ञ हैं. इस तरह अस्पतालों में लगभग 900 विशेषज्ञ डॉक्टर ही बचेंगे. चिकित्सा अधिकारियों के 1677 पद खाली हैं. खाली पदों पर पीएससी से भर्ती के शासन की तरफ से प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन अधिकतम उम्र सीमा के फेर में डॉक्टरों की भर्ती रुकी है.

2010 में मेडिकल ऑफिसर्स के 1090 पदों के विरुद्ध 570 डॉक्टर ही मिले थे. इसके बाद करीब 200 डॉक्टर ने नौकरी छोड़ दी. 2013 में 1416 पदों पर भर्ती में 865 डॉक्टर मिले, लेकिन करीब 200 ने ज्वाइन नहीं किया और उतने ही नौकरी छोड़कर चले गए. यानी करीब 400 डॉक्टर ही मिले.

इसी तरह से 2015 में 1271 पदों में 874 डॉक्टर मिले हैं. इनमें भी 218 डॉक्टरों ने ज्वाइन नहीं किया. कुछ पीजी करने चले गए और कुछ ने नौकरी छोड़ दी. करीब 400 डॉक्टर ही मिल पाए. 2015 में ही 1871 पदों के लिए भर्ती शुरू हुई थी. मार्च 2017 में साक्षात्कार के बाद रिजल्ट जारी किए गए. इसमें करीब 800 डॉक्टर मिल पाए हैं.

अब स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट का तर्क है कि इसे लेकर सरकार गंभीर है. डॉक्टर की व्यवस्था हो जाएगी लेकिन कैसे होगी इसका जवाब मंत्री जी टाल गए.

वहीं बीजेपी ने इसे क्रेडिट लेने की राजनीति बताया है. बीजेपी के विधायक और सहकारिता मंत्री रहे विश्वास सारंग ने कहा की आयुष्मान योजना के जरिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे देश को लाभान्वित कर रहे हैं और कांग्रेस उसी योजना को तोड़ मरोड़ कर और अपनी बनाकर जनता को बेवकूफ बनाने का काम कर रही है.