कर्नाटक के बाद मध्य प्रदेश में भड़की चिंगारी, कमलनाथ सरकार के खिलाफ खड़े हुए दो MLA

मध्य प्रदेश में बीजेपी के पास 108 विधायक हैं और वह बहुमत से महज 8 सीटें कम है. अगर बीजेपी को गैर कांग्रेसी विधायकों का साथ मिल जाए तो वह बहुमत के आंकड़े तक पहुंच सकती है.

भोपाल: कर्नाटक के बाद अब मध्यप्रदेश में भी राजनीतिक संकट बढ़ने के कयास लगाएजा रहे हैं. कांग्रेस शासित मध्य प्रदेश में भी सब कुछ ठीक नहीं है. मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार को समर्थन देने वाले बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के विधायक मंत्रियों के रुख से नाराज हैं. इस स्थिति से वह मुख्यमंत्री कमलनाथ को भी अवगत कराने को तैयार हैं. राज्य में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार, बहुजन समाज पार्टी के दो, सपा के एक और चार निर्दलीय विधायकों के समर्थन के बल पर सत्ता में है.

राज्य में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत हासिल नहीं है. राज्य के 230 विधायकों के सदन में कांग्रेस के पास 114 विधायक हैं, वहीं भाजपा के 108 विधायक हैं. राज्य की एक सीट भाजपा के विधायक के सांसद बनने से खाली हो गई है. फिलहाल मंत्रियों के रवैए से बीएसपी के दोनों विधायक राम बाई और संजीव सिंह कुशवाहा नाराज हैं तो वहीं एसपी विधायक राकेश शुक्ला ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की है.

बीएसपी विधायक राम बाई को इस बात से नाराजगी है कि उनके परिवार के खिलाफ प्रकरण दर्ज किए गए हैं और कई लोग जेल में हैं. राम बाई का कहना है कि कर्नाटक और गोवा जैसा खतरा मध्य प्रदेश में भी है, मध्य प्रदेश सरकार को मेरा समर्थन इसलिए है क्योंकि कमलनाथ को मुख्यमंत्री रहना चाहिए.

इसी तरह बीएसपी के विधायक संजीव सिंह कुशवाहा का कहना है कि मंत्रियों को संवदेनशील होना चाहिए, मगर वे ऐसे हैं नहीं. विधायकों के काम हो नहीं रहे. कमलनाथ काम कर रहे हैं. वर्तमान सरकार को बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने बाहर से समर्थन दिया है, जो जारी है.

एसपी विधायक राकेश शुक्ला मंत्रियों के रवैए से नाराज हैं. उनका कहना है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ अच्छा काम कर रहे हैं, मगर कई मंत्रियों का रुख सहयोगात्मक नहीं है. सरकार बने सात महीने हो गए हैं, मगर उनके कोई काम नहीं हो रहे हैं, क्षेत्र की जनता को वे क्या जवाब दें. इस मामले से मुख्यमंत्री को अवगत कराएंगे.

समझिए मध्य प्रदेश में सीटों का गणित

मध्य प्रदेश विधानसभा  में कुल 231 सीटें हैं. जिनमें से एक नॉमिनेटेड है और दूसरी वेकेंट. बाकी की बची 229 सीटों के मुताबिक बहुमत का आंकड़ा है 116 का. पिछले साल हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 114 सीटें जीत कर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. वहीं बीजेपी के पास 108 सीटें हैं. समाजवादी पार्टी ने एक और बहुजन समाज पार्टी ने 2 सीटों पर जीत दर्ज की. 4 सीटें निर्दलीयों के खेमे में गई.

मध्य प्रदेश, कर्नाटक के बाद मध्य प्रदेश में भड़की चिंगारी, कमलनाथ सरकार के खिलाफ खड़े हुए दो MLA
Photo Credit: Rishi Madhani

कांग्रेस (114) पार्टी ने बीएसपी (2), एसपी (1) और निर्दलीय (4) से मिलकर 121 सीटों के साथ सरकार बनाई है. वहीं बीजेपी के पास 108 विधायक हैं और वह बहुमत से महज 8 सीटें कम है. राजनीतिक एक्सपर्ट की मानें तो अगर बीजेपी को इन गैर कांग्रेसी विधायकों का साथ मिल जाए तो वह बहुमत के आंकड़े तक पहुंच सकती है.

मालूम हो कि ऐसी ही गठबंधन की स्थिति कर्नाटक में भी है जहां कांग्रेस के समर्थन से बनी जेडीएस-कांग्रेस सरकार संकट में है. राज्य के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी को विधानसभा में बहुमत साबित करनी पड़ रही है. जबकि सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बीजेपी के बीएस यदियुरप्पा राज्य के मुख्यमंत्री बनने के सपने सजा रहे हैं.

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