रिहा हुए ‘बल्लामार’ BJP विधायक आकाश विजयवर्गीय, बोले- भगवान दोबारा बल्लेबाजी का मौका न दे

इंदौर से भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय ने जेल से बाहर आने पर कहा कि 'जनता की सेवा हम लोग तन-मन-धन से करते हैं. आगे भी करते रहेंगे.


भोपाल: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इंदौर से विधायक आकाश विजयवर्गीय जेल से रिहा हो गए हैं. भाजपा विधायक को शनिवार को एक विशेष अदालत ने जमानत दे दी थी. शनिवार को जेल की कागजी प्रक्रिया पूरी नहीं होने की वजह से विजयवर्गीय जेल से बाहर नहीं आ पाए थे.

‘…मुझे कोई दुख नहीं’
जेल से बाहर आने पर मीडिया से बातचीत में विजयवर्गीय ने कहा, “जो मैंने किया, उसका मुझको कोई दुख नहीं है. हालांकि अब गांधी के रास्ते पर चलना है, लेकिन मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि वो दोबारा बल्लेबाजी करने का अवसर न दें.”

उन्होंने कहा कि ‘जनता की सेवा हम लोग तन-मन-धन से करते हैं. आगे भी करते रहेंगे. लोगों के जीवन में सुख-शांति और समृद्धि हो, गरीबों के साथ न्याय हो… इसके लिए हमेशा प्रयास करते रहेंगे.’ उन्होंने यह भी कहा कि जेल के अंदर बहुत अच्छा समय बीता.

पार्टी दफ्तर के बाहर हवाई फायरिंग
विजयवर्गीय की रिहाई की खबर मिलते ही भारी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता दफ्तर के बाहर इकट्ठा हो गए. कार्यकर्ताओं ने खुलेआम हवाई फायरिंग की और ढोल-नगाड़ों पर नाचे भी. इसके अलावा समर्थक पार्टी दफ्तर के बाहर आतिशबाजी और नारेबाजी करने भी नजर आए. इस पर विजयवर्गीय ने कहा कि वे इस तरह की फायरिंग का समर्थन नहीं करते हैं और इस पर वे कठोर कार्रवाई करेंगे.

मिठाई खा रहे पुलिसकर्मी
इसी बीच सोशल मीडिया पर एक और वीडियो वायरल हो रहा है. वीडियो में पुलिसकर्मी मिठाई खाते नजर आ रहे हैं. बताया जा रहा है कि ये मिठाई विजयवर्गीय की रिहाई की खुशी में बांटी जा रही थी.

नगर निगम अधिकारी को बल्ले से पीटा
विजयवर्गीय पर आरोप है कि उन्होंने इंदौर में एक नगर निगम अधिकारी को क्रिकेट के बल्ले से मारा और उसकी पिटाई की. बाद में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था.

जिला अदालत के अभियोजन जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) योगेश तिवारी ने कहा कि अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेश सिंह ने भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय को दो मामलों में जमानत दे दी, जिसमें हमला करना और बिना इजाजत के किसी विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करना शामिल है.

50 व 20 हजार के निजी मुचलके पर जमानत
अदालत ने विधायक को मारपीट के मामले में 50 हजार रुपये और अन्य मामले में 20 हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दी. विजयवर्गीय के वकीलों ने उनके लिए जमानत की मांग करते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश के अनुसार, सात साल की जेल अवधि को आमंत्रित नहीं करने वाले अपराध पर पुलिस थानों से जमानत दी जा सकती है.

उन्होंने तर्क दिया कि विधायक को मामले में झूठा फंसाया गया है. उन्होंने बहस के दौरान कहा कि उनकी छवि को खराब करने की कोशिश की जा रही है. जमानत याचिका का विरोध करते हुए, जिला अभियोजन अधिकारी राजेंद्र उपाध्याय ने कहा कि विधायक का कृत्य पूर्व-निधारित था और एक कानून बनाने वाले व्यक्ति से इस तरह के बर्ताव की उम्मीद नहीं की जा सकती है.

उपाध्याय ने कहा, “लोगों ने उन्हें कानून बनाने के लिए चुना है, कानून हाथ में लेने के लिए नहीं. यदि उन्हें जमानत दी जाती है तो इससे समाज में एक गलत संदेश जाएगा.”

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