MP में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के चौकीदारों को नौकरी से हटाया

अब सरकार ने रखरखाव और अन्य काम के लिए लोगों को ठेके पर हायर करना शुरू कर दिया है. इस वजह से पिछले दस से बीस साल से काम कर रहे लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ रहा है.

भोपाल: मध्यप्रदेश के सागर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के दैनिक वेतनभोगी चौकीदारों की सेवाएं अचानक खत्म कर दी गई हैं.  इनको सोमवार से ड्यूटी पर नहीं आने का आदेश दिया गया है. हालांकि इस बारे में अब तक किसी को लिखित जानकारी नहीं दी गई है.

सागर में कई दशकों से ऐतिहासिक इमारतों, क़िला और अन्य भवनों की देखरेख कर रहे कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन कर दोबारा नौकरी बहाल करने की मांग की है.

बेरोजगार हुए चौकीदारों का कहना है कि हम ईमानदारी के साथ रखवाली करते हैं, प्रधानमंत्री चौकीदारों की बात तो करते है लेकिन वास्तविक चौकीदारों के साथ अन्याय कर रहे हैं. सागर में  बेरोज़गार हुए चौकीदारों की संख्या 38 बताई गई है.

बता दें कि भारतीय  पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग में पिछले कुछ वर्षों से दैनिक वेतन मज़दूरों को हटाने का काम चल रहा है.  ये मज़दूर ऐतिहासिक महत्व के क़िला, भवनों और अन्य स्थानों की रखवाली करते है.

अब सरकार ने रखरखाव और अन्य काम के लिए लोगों को ठेके पर हायर करना शुरू कर दिया है. इस वजह से पिछले दस से बीस साल से काम कर रहे लोगों को अपनी नौकरियों से हाथ धोना पड़ रहा है.

ये लोग सिर्फ चौकीदारी ही नहीं करते हैं बल्कि साफ-सफाई का काम भी देखते हैं लेकिन अचानक एक अप्रैल  2019 से इन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया. इन्हें कार्यालय से फोन पर  एक अप्रैल से काम पर नहीं आने की सूचना दी गई है. हालांकि जब उनसे लिखित आदेश मांगा गया तो उन्होंने देने से मना कर दिया.

बता दें कि पूरे मध्यप्रदेश में अचानक बेरोज़गार हुए चौकीदारों की संख्या 600 के क़रीब है.

पीड़ित हरिओम रघुवंशी कहते है कि प्रधानमंत्री चौकीदारों की बात करते है लेकिन हम वास्तविक चौकीदारों के साथ अन्याय कर रहे हैं. हम लोगों का परिवार कैसे चलेगा. भूखे मरने की नौबत आ जायेगी. इस उम्र में अब कौन नौकरी देगा?

वहीं पीड़ित माखन ने दो दिन से खाना नही खाया है उसकी चिंता है अब घर कैसे चलेगा.

वहीं कांग्रेस प्रवक्ता वीरेंद्र गौर ने इनका समर्थन करते हुए कहा, ‘ जो ईमानदारी से काम कर रहे हैं उनके साथ अन्याय हुआ है. प्रधानमंत्री चौकीदारों की वकालत तो करते है लेकिन वास्तविक चौकीदारों को हटा रहे हैं, इनको वापस काम पर बुलाना चाहिए.’

हालांकि इस मामले में जब प्रशासन से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने मीडिया से बात करने से इंकार कर दिया.