claim review of amazing tree, छूने पर इंसान को खींच लेता है पेड़, देखें इस हैरतंगेज दावे का Fact Check
claim review of amazing tree, छूने पर इंसान को खींच लेता है पेड़, देखें इस हैरतंगेज दावे का Fact Check

छूने पर इंसान को खींच लेता है पेड़, देखें इस हैरतंगेज दावे का Fact Check

‘चमत्कारी पेड़ को छूने से एक बाबा का लकवा ठीक हो गया. जो इस चमत्कारी पेड़ से चिपक जाता है उसे अच्छा महसूस होता है.’ ये कहानी MP के एक गांव के सरपंच ने सुनाई है. आइए जानते हैं इसमें कितना सच है और कितना झूठ...
claim review of amazing tree, छूने पर इंसान को खींच लेता है पेड़, देखें इस हैरतंगेज दावे का Fact Check

बैतूल में पान बेहरा और हिडली जैसे आदिवासी गांवों में लोग अंधविश्वास के मकड़जाल में फंसते चले जा रहे हैं. मिली जानकारी के मुताबिक इस इलाके में एक महुए के पेड़ में भगवान प्रकट होने की चर्चा तेजी से वायरल हो रही है. इन अफवाहों के चलते जब टीवी9 भारतवर्ष की टीम वहां पहुंची तो पता चला कि सिर्फ एक नहीं यहां ऐसे कई पेड़ हैं जहां अंधविश्वास का बिजनेस चल पडा है. पेड़ पर लगीं दानपेटियां इसकी गवाही दे ही देती हैं.

हिडली गांव के रहने वालों ने बताया कि बिसन इवने नाम के शख्स को सबसे पहले सपना आया था कि यहां महुए के पेड़ में भगवान प्रकट हुए हैं. इवने ने बातचीत में कहा कि, ‘उन्हें सुबह 5 बजे उन्हें सपना आया कि पेड़ में भगवान आ गए हैं. पेड़ में कुछ करंट सा है जो आपको अपनी तरफ खींचता है. उन्हें जो समस्या थी वो ठीक हो गई.’ हालांकि इवने ने ये नहीं बताया कि उन्हें तकलीफ क्या थी.

हिडली गांव के सरपंच आनंद धुर्वे ने एक कहानी सुनाई, ‘उनके गांव के एक बाबा का लकवा ठीक हो गया. जो इस चमत्कारी पेड़ से चिपक जाता है उसे अच्छा लगता है.’ धुर्वे का कहना है कि ये अंधविश्वास नहीं है क्योंकि सब आंखों के सामने चल रहा है.’

इस बातचीत में बायोलॉजी सबजेक्ट की स्टूडेंट ज्योति अपने दिव्यांग भाई को लेकर मौके पर पहुंची. ज्योति ने कहा, ‘मैं ये सब नहीं मानती लेकिन मम्मी पापा ने कहा कि भाई को लेकर जाओ, शायद आराम हो जाए. यहां से लौट रहे आस पड़ोस के लोग बताते हैं कि उन्हें आराम हो गया. किसी बुजुर्ग दादी ने बताया कि उनके घुटने का दर्द ठीक हो गया तो लगा कि चले जाना चाहिए. मन चंगा तो कठौती में गंगा. अगर आराम मिलेगा तो लोगों से बताएंगे अगर नहीं मिलेगा तो किसी को क्यों परेशान करेंगे.’

जिस खेत में पेड़ है उस खेत के मालिक ने कहा कि, मुझे बिसन इवने ने बताया था कि तुम्हारे खेत में भगवान है. मैं 9 बजे पहुंचा तब तक पूरे गांव की पब्लिक यहां पहुंच चुकी थी. मुझे देवियों ने कहा कि भंडारा करो. इसके लिए सब गांव वालों ने भंडारा करने के लिए पैसा इकट्ठा किया है. सब कह तो रहे हैं कि उनकी समस्या ठीक हो रही है लेकिन किसकी ठीक हो रही है ये नहीं पता.

खेत के बाहर पूजा और दूसरे सामान की दुकानें खुल गई हैं. पूजन सामग्री की दुकान से विक्रेता दिनेश उइके ने कहा कि उन्हें पता लगा कि बिसन इवने के हाथ पेड़ से चिपक गए. मुझे मेरे दोस्तों ने फोन किया कि पूजा का सामान लेकर आजा, भगवान प्रकट हुए हैं. करीब 200 नारियल बिक जाते हैं. यानि भगवान के बहाने इन लोगों की दुकान चल रही है.

पान बेहरा में धर्मराज विश्वकर्मा ने सबसे पहले इस कथित चमत्कारी पेड़ की खोज की थी. विश्वकर्मा ने बातचीत में कहा कि वो यहां पहुंचे तो पेड़ ने उन्हें खींच लिया. हालांकि धर्मराज का झूठ पकड़ा गया. धर्मराज ने ये माना कि वो यहां पहले ही नारियल लेकर आया था क्योंकि वो इस तरह का पेड़ खोज ही रहा था, ये अचानक हुई खोज नहीं थी. हालांकि धर्मराज विश्वकर्मा इस बात पर अड़ा रहा कि पेड़ चमत्कारी है. विश्वकर्मा ने बतायाकि जब उसके दोस्त ने कहा कि दूसरे गांव में पेड़ के दर्शन करने चलते हैं तो विश्वकर्मा ने उनसे कहा कि यहां पर भी कई महुए के पेड़ है, यहीं कहीं खोज लो ऐसा पेड़. गौर करने वाली बात ये भी है कि धर्मराज ने हाल ही में यही खेत बंटाई पर लिया है.

हालांकि रिएलिटी चेक में टीवी9 भारतवर्ष की टीम ने पाया कि न तो रिपोर्टर और न ही दूसरे जिले से आए किसी शख्स के हाथ पेड़ की ओर खिंच रहे थे. वहीं धर्मराज जैसे  स्थानीय ग्रामीणों के हाथ पेड़ की तरफ खिंचे चले जा रहे थे. ऐसे में चमत्कारी पेड़ को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. साथ ही पेड़ से लटक रही दान पेटियां भी अलग ही कहानी कह रही हैं.

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