इस श्मशान में धूमधाम से मनाई जाती है दिवाली, महसूस होता है जैसे कोई और भी है उनके साथ…

रतलाम में लोग श्मशान में दीपावली मनाते हैं. लोगों का मानना है यहां हम अपने उन लोगों के साथ दिवाली मनाते हैं जो अब इस दुनिया मे नहीं हैं. यहां आकर दिवाली मनाने और खुशियां बांटने में हमें अच्छ लगता हैं.
Diwali Celebration at Shamshaan Ghat, इस श्मशान में धूमधाम से मनाई जाती है दिवाली, महसूस होता है जैसे कोई और भी है उनके साथ…

आमतौर पर श्मशान में मुर्दे ही जला करते हैं वहीं महिलाओं का मुक्तिधाम में प्रवेश भी वर्जित रहता है. मगर रतलाम में रूप चौदस के दिन दीपोत्सव का अलग ही नजारा सामने आया जब श्मशान घाट पर दीप जले, रंगोली सजी, महिलाओं ने नृत्य किया.

रूप चौदस को यम चौदस भी कहा जाता है यही कारण है मुक्तिधाम में 10 सालों से लगातार दीपोत्सव मनाया जाता है. इस आयोजन में शामिल होने वाले लोग बताते हैं कि वो ये कार्यक्रम पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए करते हैं. इस दौरान महिलाओं ने श्मशान में दीप जलाकर, नाच कर, पटाखे फोड़ कर अपने पूर्वजों की शांति के लिए प्रार्थना की.

यहां दीवाली मनाने वाले लोगों का मानना हैं कि जो दुनिया से चला जाता हैं उसे वो श्मशान में महसूस करते हैं और उनके साथ दीवाली मनाते हैं.

प्रेरणा सामाजिक संस्था पिछले कई सालों से श्मशान में दीपावली मना रही है. पहले कुछ लोग इस आयोजन से जुड़े लेकिन अब कई लोग मिलकर अपने परिवार के साथ यहां आते हैं और श्मशान में दीपावली मनाते हैं.

प्रेरणा संस्था के संयोजक ने बताया कि, श्मशान में हमारे पूर्वजों के साथ दीपावली की खुशियां बांटने के लिए हम लोग यह आयोजन करते हैं. संस्था संयोजक का कहना है कि यम चौदस का भी महत्व है और इस दिन पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्मशान में दीये जलाते हैं.

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