मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों की बदहाली, एक कमरे में पढ़ रहे 63 बच्चे

टीचर्स की सुनें तो स्कूल में बिजली नहीं है, बारिश में छत टपकती है लेकिन सिवाय शिकायत के और कुछ नहीं कर सकते.
government primary school, मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों की बदहाली, एक कमरे में पढ़ रहे 63 बच्चे

मध्यप्रदेश में सरकारी स्कूलों की बदहाली किसी से छुपी नहीं है. हालात इस कदर बिगड़े हुए हैं कि ये स्कूल छोटी-छोटी सुविधाओं के लिए मोहताज हैं. वहीं सरकार है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों का भविष्य संवारने के बजाय विदेश यात्राओं में समस्या का हल खोजने में लगी है.

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल का सरोतीपुरा गांव, मंत्रालय से इसकी दूरी महज़ 12 किमी है. इस स्कूल में सिर्फ 1 कमरा है. जिसमें 5 कक्षाओं के बच्चे पढ़ते हैं. पहली से लेकर पांचवी कक्षा के करीब 63 बच्चे इसी कमरे में पढ़ते हैं.

स्कूल में तीसरी से पांचवी के बच्चे एक ओर और चौथी, पांचवी के बच्चे उनकी ओर पीठ करके पढ़ाई कर रहे हैं. टीचर्स की सुनें तो स्कूल में बिजली नहीं है, बारिश में छत टपकती है लेकिन सिवाय शिकायत के और कुछ नहीं कर सकते.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2017-18 में 93231 स्कूलों में बिजली नहीं थी. चुनावों से पहले 25,329 स्कूलों में बिजली के लिए 4 करोड़ 21 लाख रुपए आवंटित किए गए. कितने स्कूलों में बिजली पहुंची है, इसकी जानकारी सरकार को नहीं है.

वर्तमान में सरकार मानती है कि 67902 स्कूल बिना बिजली के हैं. इनमें भोपाल में 855, धार में 3558, रीवा में 3747, सतना में 2779 और खरगौन में 2918 स्कूल बिना बिजली के हैं.

इस सब की जानकारी के बाद भी सरकारी ढर्राशाही देखिए. सरकार के मंत्री और अफसर एक बार फिर विदेश यात्रा की तैयारी कर रहे हैं. 24 नवंबर से 28 नवंबर तक सरकार का प्रतिनिधिमंडल दक्षिण कोरिया के दौरे पर रहेगा. इससे पहले अफसर औऱ मंत्री दक्षिण कोरिया का दौरा कर चुके हैं. शिक्षा मंत्री
जी का कहना है कि कोई भी नई चीज़ होती है तो लोग उंगली उठाते हैं. विदेश यात्रा करना कोई बुरी बात नही है.

वहीं मध्यप्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री विश्वास सारंग का कहना है कि पुरानी सरकार ने स्कूलों के उन्नयन के लिए काफी काम किया था जो इस सरकार ने रोक दिया. बच्चों के भविष्य के साथ सरकार खिलवाड़ करेगी तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.

सरकारी स्कूलों में बदहाली की ये तस्वीरें आम हैं. वो चाहे भोपाल हो या फिर बैतूल, अलीराजपुर या कोई दूरदराज का इलाका…अब हालात कब बदलेंगे इसका जवाब तलाशना बड़ी ही टेढ़ी खीर है.

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