कमलनाथ के करीबियों के 50 ठिकानों पर IT की रेड, इतना मिला कैश की पढ़कर हो जाएंगे दंग

लोकसभा चुनाव से ऐन पहले मध्यप्रदेश के सीएम के ओएसडी पर इनकम टैक्स विभाग की छापेमारी ने हलचल मचा दी है. देर रात इनकम टैक्स विभाग ने इस कार्रवाई को इंदौर में अंजाम दिया जिससे सियासी गलियारों में हंगामा खड़ा हो गया.

इंदौर. मध्यप्रदेश की राजनीति में खलबली मच गई है. सीएम कमलनाथ के निजी सचिव प्रवीण कक्कड़ के घर पर आयकर विभाग ने देर रात तीन बजे छापा मारा. 15 से ज़्यादा अधिकारियों की एक टीम दिल्ली से इंदौर पहुंची और विजयनगर स्कीम नंबर 74 स्थित उनके आवास पर कार्रवाई को अंजाम दिया. सूत्रों के मुताबिक भूला, गोवा और दिल्ली की 35 जगहों समेत पचास अन्य ठिकानों पर भी पड़ताल चल रही है. तीन सौ आयकर अधिकारी इस पूरे ऑपरेशन में जुटे हैं. कक्कड़ के अलावा कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी के ठिकानों पर भी छापेमारी की जानकारी मिली है. रतुल से अगस्ता वेस्टलैंड मामले में भी पूछताछ हो चुकी हैं. रतुल हिंदुस्तान पावर प्रोजेक्ट्स के चेयरमैन भी हैं.

कमलनाथ का मैनेजमेंट संभालनेवाले राजेंद्र मिगलानी के ठिकानों पर भी इनकम टैक्स विभाग की टीम पहुंची है. उन्हें सीएम ने अपना राजनैतिक सलाहकार बनाया था लेकिन आचार संहिता लगने से कुछ दिन पहले उन्होंने इस्तीफा दे दिया था.उनके अलावा दो बड़ी कंपनियों पर भी इनकम टैक्स विभाग की टीम पहुंची है. भोपाल में प्रतीक जोशाी नाम के शख्स के घर से तो भारी मात्रा में कैश बरामदगी की तस्वीरेें भी सामने आई हैं.

बताया जा रहा है कि कार्रवाई करने पहुंची टीम को देख पहले तो घरवाले डर गए लेकिन बाद में अधिकारियों की पहचान पुख्ता हुई तो जांच में सहयोग किया गया. खबर है कि कक्कड़ के घर पर 9 करोड़ रुपए कैश होने की जानकारी इनकम टैक्स विभाग को मिली थी जो बरामद कर लिए गए हैं. तमाम दस्तावेज़ भी खंगाले जा रहे हैं.

जानकारी के मुताबिक कक्कड़ जब पुलिस में थे तभी से उनके खिलाफ कई एजेंसियों की जांच जारी थी. कक्कड़ राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं. साल 2004 में नौकरी छोड़ने के बाद वो कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया (रतलाम से सांसद) के ओएसडी बन गए थे. दिसंबर 2018 में कमलनाथ ने उन्हें ओएसडी नियुक्त किया. इस बीच वो कांग्रेस के आला नेताओं के बेहद करीब बने रहे.

कांग्रेस के लिए विधानसभा चुनाव 2018 में उन्होंने खूब चुनावी रणनीति बनाई थीं. पार्टी ने पहली बार मीडिया, सोशल मीडिया, डाटा और लीगल का एक संयुक्त वॉर रूम बनाया था जिसकी योजनाएं बनाने और लागू करने का ज़िम्मा प्रवीण कक्कड़ पर था. कक्कड़ की कामयाबी ने ही उन्हें कांग्रेस के स्थानीय नेतृत्व का दुलारा बनाया हुआ है.