कमलनाथ का उन्नाव के बहाने बीजेपी पर वार, रेप पीड़िता और परिवार को दिया MP में बसने का न्योता

उन्नाव रेप कांड ने कांग्रेस को बीजेपी पर हमलावर होने का मौका दे दिया है. मध्यप्रदेश के सीएम कमलनाथ ने रेप पीड़िता और उसके परिजनों को मध्यप्रदेश में बसने का न्योता दिया है.

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ भी अब उन्नाव रेप कांड मामले में कूद पड़े हैं. उन्होंने उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की मां और परिजनों को मध्यप्रदेश में आकर बसने का न्यौता दे दिया. इसके साथ ही कमलनाथ ने केस से जुड़े सभी पांच मामलों को दिल्ली ट्रांसफर करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी स्वागत किया.

सीएम के दफ्तर से हुए ट्वीट में कहा गया कि पीड़िता की मां और परिजनों से मैं अपील करता हूं कि वे सभी मध्यप्रदेश आकर बसने का निर्णय लें. हमारी सरकार आपके पूरे परिवार को संपूर्ण सुरक्षा प्रदान करेगी. बच्ची का हम बेहतर इलाज कराएंगे. उसकी बेहतर शिक्षा से लेकर संपूर्ण दायित्व हम निभायेंगे. किसी भी प्रकार की दिक्कत का सामना नहीं होने देंगे. दिल्ली केस ट्रांसफर होने पर आपके दिल्ली आने-जाने की भी पूर्ण व्यवस्था करेंगे.

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट उन्नाव रेप कांड मामले में बेहद सख्त हो गया है. कोर्ट ने पीड़िता को 25 लाख रुपए का अंतरिम मुआवज़ा देने का आदेश तो यूपी सरकार को दिया ही, साथ ही 45 दिन में सुनवाई पूरी किए जाने का एलान भी किया. अब पीड़िता और उसके वकील की सुरक्षा भी सीआरपीएफ के हवाले होगी.

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के साथ कांग्रेस भी हमलावर हो रही है. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ से पहले कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तारीफ कर चुकी हैं. प्रियंका गांधी की ओर से ट्वीट किया गया था कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से उन्नाव मामले में जो फैसला दिया गया है वह यूपी में जंगलराज की सरकार की नाकामी पर एक तरह की मुहर है.

साफ है कि कांग्रेस अब उन्नाव के मुद्दे पर बीजेपी को घेरने में जुटी है. सुप्रीम कोर्ट की सख्ती ने भी कांग्रेस को मौका दे दिया है. आलाकमान से हौसला पाकर कमलनाथ ने परोक्ष रूप से यूपी की बीजेपी सरकार पर वार किया है, भले ही ये बात अलग है कि मध्यप्रदेश खुद रेप के मामलों में यूपी से पीछे नहीं बल्कि आगे ही है.

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप केस से जुड़े सभी पांच केस को लखनऊ से दिल्ली ट्रांसफर कर दिया है. अब इन मामलों की सुनवाई रोज होगी और 45 दिन के अंदर इसका ट्रायल भी पूरा होगा. इतना ही नहीं, अदालत ने पीड़िता के साथ ही एक्सीडेंट की घटना की जांच के लिए भी सीबीआई को सात दिन का वक्त दिया है.