मध्य प्रदेश: जी का जंजाल बना मंत्रिमंडल विस्तार! सिंधिया की डिमांड से पशोपेश में बीजेपी

बीजेपी के सूत्रों की मानें तो ज्योतिरादित्य सिंधिया की बढ़ती डिमांड्स के कारण मामला लंबा खिंच रहा है, ज्योतिरादित्य सिंधिया कुछ नए मंत्री बनवाना चाहते हैं, साथ ही वो अपने गुट के मंत्रियों के लिए मलाईदार विभाग भी चाह रहे हैं, जिसे लेकर सब राजी नहीं हैं.
Madhya Pradesh Cabinet expansion, मध्य प्रदेश: जी का जंजाल बना मंत्रिमंडल विस्तार! सिंधिया की डिमांड से पशोपेश में बीजेपी

मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार टलता जा‌ रहा है. जानकारी‌ के मुताबिक हाई कमान ने सीएम शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और संगठन महामंत्री सुहास भगत को बेरंग लौटा दिया. बीजेपी के आधिकारिक सूत्र दावा कर रहे हैं कि उनकी तरफ से मामला सुलझा लिया गया है, बस ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे की डिमांड्स के कारण मंत्रिमंडल विस्तार में पेंच फंस रहा है.

वहीं पार्टी हाई कमान भी इस बार मंत्रिपद के लिए हर नाम के पीछे की वजह और दूरगामी परिणामों को लेकर पूछताछ कर रहा है. क्राइटेरिया ये है कि जो मंत्री बन रहा है, उसे ये बताना होगा कि उसकी संगठन में उपयोगिता क्या है, संगठन और जनता के लिए उसने क्या-क्या काम किए हैं और आखिर क्यों उन्हें मंत्री बनाया जाए.

पिछले ढाई महीने से प्रदेश संगठन और वरिष्ठ नेता मिलकर इसी जद्दोजहद में लगे हुए थे कि वो नाम कौन से होंगे लेकिन, हाई कमान के सामने जो लिस्ट पहुंची उस पर फिर सहमति नहीं बनीं. क्योंकि इस लिस्ट में ऐसे लोग थे जो लंबे वक्त तक मंत्रिमंडल में रह चुके हैं, लेकिन उनके नाम पर गिनाने के लिए कोई उपलब्धि नहीं है और ना ही उनका संगठन या जनता से ज्यादा सरोकार रहा‌ है. यह बात हाई कमान के कई बड़े नेताओं के गले नहीं उतरी.

अब हाई कमान के निर्देश के बाद सीएम, प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री एक बार फिर नई लिस्ट बना रहे हैं, जिसमें हर शख्स के नाम के साथ, संगठन और जनता के लिए उसके योगदान का जिक्र करना होगा. इसके बाद अगर हाई कमान मुहर लगा देता है तो ही नाम फाइनल होंगे.

मत्रिमंडल में नजर आएंगे नए चेहरे

फिलहाल इसमें सिंधिया कोटे के 4 से 5 नाम, बाकी कांग्रेस से आए बिसाहूलाल, एदल सिंह कंसाना और रणवीर जाटव मंत्री बन‌ सकते हैं. जबकि नए फॉर्मूले से बीजेपी के ज्यादातर अप्रत्याशित चेहरे मंत्रिमंडल में नजर आएंगे. सूत्रों की मानें तो संगठन से उन चेहरों को मौका मिलेगा जो योग्य हैं, लेकिन उन्हें मौका नहीं दिया गया. हालांकि ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे की डिमांड्स के कारण मामला लंबा खिंच रहा है.

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गौरतलब है ‌कि संगठन को अपने कार्यकर्ताओं को ये मैसेज भी देना है कि पार्टी व्यक्ति आधारित ‌नहीं बल्कि संगठन आधारित है. इसलिए उन्हें मौका मिलेगा जिनकी छवि संगठन और जनता दोनों के बीच चहेते की है. इस छवि को आने वाले उपचुनाव में पार्टी भुनाने के मूड में भी है.

सूत्र बताते हैं कि कश्मकश सिर्फ इस पर बात पर नहीं है, बल्कि सिंधिया गुट के मंत्रियों के पोर्टफोलियो को लेकर भी है. दरअसल ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने गुट के मंत्रियों के लिए मलाईदार विभाग चाह रहे हैं, जिसे लेकर सब राजी नहीं हैं. यही वजह है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया का पिछले 1 हफ्ते में तीन बार आने का कार्यक्रम घोषित होकर रद्द हो चुका हैं.

फसाद की जड़ मध्य प्रदेश संगठन में

एक वरिष्ठ बीजेपी नेता का कहना है कि बार-बार मंत्रिमंडल विस्तार की तारीख बदलने से पार्टी के अंदर और आम जनता के बीच जो चर्चा का विषय था अब मजाक बन गया है. सवाल इस बात का है कि जब क्राइटेरिया स्पष्ट है और मध्य प्रदेश के मंत्रिमंडल से हाई कमान को बहुत ज्यादा लेना-देना नहीं है. तो ये परेशानी आखिर है क्यों?

तो जहां तक मध्य प्रदेश में सरकार दोबारा बनाने की बात थी, हाई कमान ने अपना फर्ज पूरा किया लेकिन अब ये जो विषय है वो विशुद्ध रूप से प्रदेश संगठन और सरकार का विषय है. जिसे प्रदेश के नेताओं को मिलकर सुलझाना है. केंद्रीय नेतृत्व ने यह जिम्मेदारी मध्य प्रदेश संगठन के मुखिया वीडी शर्मा, आरएसएस और संगठन के बीच के कॉर्डिनेटर यानि संगठन महामंत्री सुहास भगत और बीजेपी सरकार के मुखिया यानि शिवराज सिंह चौहान को दी हुई है. हाई कमान के नाम पर कितनी भी बात टाली जाए लेकिन असल फसाद की जड़ मध्य प्रदेश संगठन और सरकार में ही है और मध्य प्रदेश के नेताओं का आपसी समन्वय नहीं बन पाने से मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो पा रहा.

अब ‘जी का जंजाल’ बना मंत्रिमंडल विस्तार कब होगा यह तो सवाल है ही लेकिन इस विस्तार के बाद परिस्थितियां बीजेपी सरकार के कितने माकूल रहेंगी, यह कहना भी मुश्किल है, वो भी तब जब 24 सीटों पर उपचुनाव है, अंदर और बाहर दोनों जगह विरोध के बावजूद 22 सीटों पर अपने प्रत्याशी को जिताना है और कम से कम 9 सीट जीतकर सरकार बचानी है. साथ ही वो सरकार 3 साल चलानी भी है. वहीं सिंधिया गुट को मर्ज करने के फेर में बीजेपी का अपना हिसाब भी बिगड़ गया है. तो कुल मिलाकर चुनौती कम नहीं हैं.

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