RTI में ऐसा क्या पूछ दिया कि डाक विभाग ने भेज दिए 360 जवाब, अब भी जारी है सिलसिला

सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार जिनेंद्र सुराना ने RTI के तहत डाक विभाग से एक सवाल में जानकारी मांगी थी. 360 जवाब आने के बाद भी यह सिलसिला अब भी जारी है.

सूचना के अधिकार (आरटीआई) का चौंकाने वाला मामला सामने आया है. दरअसल मध्यप्रदेश के नीमच जिले के सामाजिक कार्यकर्ता और पत्रकार जिनेंद्र सुराना RTI लगाई थी. जिसमें उन्होंने डाक विभाग के डाकघर, परिसर, कार्यालय और आवासीय परिसर की जानकारी एक सवाल में मांगी थी.

लेकिन उस सवाल का 1 जवाब नहीं बल्कि 360 जवाब मिले. इतना ही नहीं, जवाब आने का सिलसिला अब भी जारी है.

ये था सवाल

सुराना ने मीडिया एजेंसी को बताया कि उन्होंने ऑनलाइन आवेदन भेजकर डाक विभाग की संपत्ति के बारे में जानकारी मांगी थी. उन्होंने पूछा था कि विभाग की अचल संपत्तियों की बाजार कीमत और बुक वैल्यू कितनी है?

जानकारी भेजने का सौंपा जिम्मा

इस सवाल का जवाब देने की जिम्मेदारी विभाग ने चीफ पोस्ट मास्टर और सभी पोस्ट मास्टर जनरलों को सौंप दी. सुराना के मुताबिक, जानकारी भेजने की जिम्मेदारी विभाग के बड़े अधिकारियों से होते हुए सभी डाक अधीक्षकों पर आ गई.

उन्हें निर्देश दिया गया कि वे अपने कार्यालय की जानकारी सीधे आवेदनकर्ता को उपलब्ध कराएं. उनकी ओर से जानकारी भेजने का सिलसिला शुरू हुआ तो इतने जवाब आए कि पूछने वाला परेशान हो गया.

13 अगस्त से शुरू जवाब

सुराना ने बताया कि उनके यहां कई दिनों से औसतन लगातार 10 से ज्यादा डाक आ रही हैं. उनकी ओर से ऑनलाइन आवेदन 7 अगस्त को किया गया था और डाक के जरिए जवाब आने का सिलसिला 13 अगस्त से शुरू हुआ. एक दिन में अधिकतम 22 और न्यूनतम पांच डाक आई हैं. इस तरह अब तक कुल 360 जवाबी डाक उनके पास आ चुकी हैं.

RTI की प्रक्रिया पर उठाए सवाल

सूचना के अधिकार के तहत जवाब देने की प्रक्रिया पर सुराना ने सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि आवेदन ऑनलाइन किया गया था, मगर जवाब डाक के जरिए आ रहे हैं और जो जवाब आ रहे हैं, उनमें से अधिकांश संतोषजनक नहीं हैं. अब तक 25 से 30 जिलों और मंडल ने ही अपनी अचल संपत्ति की जानकारी दी है.

कई विभाग समझ ही नहीं पाए

दक्षिण के एक मंडल ने तो वर्ष 1870 की बुक वैल्यू की जानकारी उपलब्ध कराई है. सुराना का कहना है कि सूचना का अधिकार जिन उद्देश्यों को लेकर अमल में लाया गया, उसे अब तक कई विभाग समझ ही नहीं पाए हैं, यह दुर्भाग्यपूर्ण है.

इसका ताजा उदाहरण डाक विभाग है. डाक विभाग को आवेदन का जवाब ऑनलाइन देना चाहिए था, मगर वह डाक के जरिए भेजे जा रहे हैं. विभाग के मुखिया को अपने स्तर पर संयोजित करके ब्यौरा देना चाहिए था, मगर उन्होंने इस काम में डाक अधीक्षकों को उलझा दिया.

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