मौत और जिंदगी के बीच किए खुद से दो वादे, एवरेस्ट फतह के बाद बोलीं मेघा परमार

मेघा परमार ने कहा कि जब मैं जिंदगी और मौत के बीच में थी तो खुद से दो वादे किए. एक तो यह कि मैं बहुत सारे पौधे लगाऊंगी और दूसरा...

भोपाल: मध्य प्रदेश के सिहोर जिले की रहने वाली मेघा परमार ने माउंट एवरेस्ट फतह किया है. मेघा ने 22 मई को हिमालय पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया. मेघा किसान की बेटी हैं. एवरेस्ट फतह करने के बाद जब वो अपने गांव पहुंचीं तो गांववालों ने उनका जोरदार स्वागत किया. मेघा ने टीवी9 भारतवर्ष से खास बातचीत की है. उन्होंने कहा कि एवरेस्ट फतह करने के बाद मैंने खुद से दो वादे किए हैं.

‘पिछली बार 700 मीटर रह गई थी दूर’
मेघा ने कहा, “मैंने ये लक्ष्य साल 2016 में तय किया था. मैंने अखबार में पढ़ा था कि मध्य प्रदेश के दो युवाओं ने एवरेस्ट पर चढ़ाई की है. मैंने पिछली बार भी एवरेस्ट पर चढ़ाई करने की कोशिश की थी. लेकिन सफलता नहीं मिली. मैं 700 मीटर दूर रह गई थी.”

‘किए हैं खुद से दो वादे’
मेघा का कहना है कि जब हम पूरी शिद्दत से लगे होते हैं तो कोई न कोई हमारी मदद के लिए आ ही जाता है. जब मैं जिंदगी और मौत के बीच में थी तो खुद से दो वादे किए थे. एक तो यह कि मैं बहुत सारे पौधे लगाऊंगी और दूसरा यह कि लोगों की हरसंभव मदद करूंगी.

CM कमलनाथ ने की मदद की घोषणा
बता दें कि मेघा की इस सफलता के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने पर्वतारोहियों की यात्रा में मदद करने की घोषणा की है. उन्होंने कहा है कि ‘साहसिक खेल एवं अन्य खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार विशेष प्रयास कर रही है. प्रदेश का जो भी पर्वतारोही माउंट एवरेस्ट पर फतह करेगा, राज्य सरकार उसे यात्रा में मदद देगी.’

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