“लड़कियां अब पहले से ज्यादा स्वतंत्र, इसलिए बढ़ रही किडनैपिंग”, MP के DGP का बयान

डीजीपी वीके सिंह ने कहा कि एक नया ट्रेंड 363 के रूप में दिख रहा है, लड़कियां स्वतंत्र ज्यादा हो रही हैं, स्कूलों में कॉलेजों में जा रही हैं तो...

भोपाल: मध्यप्रदेश के डीजीपी वीके सिंह ने महिलाओं के अपहरण को लेकर हैरान कर देने वाला तर्क दिया है. डीजीपी का कहना है कि लड़कियां अब पहले से ज्यादा स्वतंत्र हैं, इसलिए उनके अपहरण के मामले बढ़ रहे हैं. ध्यान रहे कि डीजीपी ने बयान अपने ग्वालियर चंबल दौरे के समय दिया है. वो फिलहाल महिला संबंधी अपराधों पर जागरूकता के लिए दौरे पर निकले हैं.

‘लड़कियां स्कूल-कॉलेज जा रही हैं तो…’
उन्होंने कहा, “एक नया ट्रेंड 363 के रूप में दिख रहा है, लड़कियां स्वतंत्र ज्यादा हो रही हैं, स्कूलों में कॉलेजों में जा रही हैं तो आज के समाज में बढ़ती स्वतंत्रता एक तथ्य है. ऐसे में उनका जो सामना हो रहा है, इंटरेक्शन हो रहा है दूसरे लड़कों के साथ ये भी एक सच्चाई है. ऐसे मामलों में वृद्धि देखने को मिली है कि घर से चली जाती हैं फिर रिपोर्ट होती है किडनैपिंग की.”

राज्य के गृह मंत्री बाला बच्चन ने इस बयान पर कहा, “अपराध नहीं बढ़ना चाहिये, पहले तो अपराध होना ही नहीं चाहिये. हमारी समीक्षा बैठक में, सरकार की मंशा स्पष्ट कर दी गई कि यदि किसी थाना क्षेत्र में कोई घटना होती है तो वहां के छोटे कर्मी से लेकर बड़े अधिकारी तक ज़िम्मेदार होंगे. हम कसावट करने में लगे हैं हम सब मध्यप्रदेश की जनता की हिफाजत और सुरक्षा के लिये प्रतिबद्ध हैं.”

‘इस तरह के गैर जिम्मेदाराना बयान से बचें DJP’
बीजेपी प्रवक्ता राहुल कोठारी ने इस ‘गैर जिम्मेदाराना बयान’ के लिए डीजीपी को नसीहत दी है. उन्होंने कहा है कि ‘उन्हें इस तरह के सामान्य और गैर जिम्मेदाराना बयानों से बचना चाहिए. वह राज्य पुलिस के प्रमुख हैं. राज्य में महिलाओं के प्रति अपराध बढ़ रहा है, पुलिस उसे रोकने में नाकाम है, ऐसे में उन्हें इस बात पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए कि अपहरण और अपराध को कैसे रोका जाए.’

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक, 2016 में मध्य प्रदेश में बच्चों के खिलाफ अपराध और अपहरण के 6016 मामले सामने आए हैं. वहीं, राज्य के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कुछ दिनों पहले गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी. उन्होंने इस दौरान राज्य में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध को रोकने के लिए 800 करोड़ के केंद्रीय अनुदान की मांग की थी.

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