कमलनाथ का शिवराज सरकार पर धावा, ई-टेंडर घोटाले के लिए सॉफ्टवेयर कंपनी पर मारा छापा

ईओडब्ल्यू में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पूर्व सरकार के कुछ प्रभावशाली नेताओं के नाम भी आने की आशंका जताई जा रही है.
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भोपाल: मध्य प्रदेश की पूर्ववर्ती शिवराज सिंह चौहान सरकार के काल में हुए ई-टेंडरिंग घोटाले में बुधवार को प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद आर्थिक अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) ने गुरुवार को सॉफ्टवेयर कंपनी ऑस्मो के कार्यालय पर छापा मारा.
पूर्ववर्ती सरकार के काल में हुए ई-टेंडरिंग घोटाले के मामले में कंप्यूटर इमर्जेसी रेस्पॉन्स टीम (सीईआरटी) की रिपोर्ट से गड़बड़ी की बात सामने आई थी, जिसके बाद बीते बुधवार को ईओडब्ल्यू ने प्राथमिकी दर्ज की. सीईआरटी की रिपोर्ट के अनुसार, ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल में अंतिम तारीख निकलने के बाद टेंडर में छेड़छाड़ कर संबंधित निर्माण कंपनी को फायदा पहुंचाया गया है.

प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद बुधवार शाम से ही ईओडब्ल्यू की सक्रियता बढ़ी हुई है. गुरुवार को ईओडब्ल्यू के दल ने मानसरोवर स्थित ओस्मो फाउंडेशन के दफ्तर पर दबिश दी. इस कंपनी के कर्मचारियों व अधिकारियों से पूछताछ किए जाने के साथ उपलब्ध दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है.

बता दें कि मध्य प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एमपीएईडीसी) के ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के संचालन का काम सॉफ्टवेयर कंपनियों के पास था. विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में ई-टेंडरिंग घोटाले ने तूल पकड़ा था. तब यह बात सामने आई थी कि सॉफ्टवेयर कंपनियों के सहारे टेंडर हासिल करने वाली निर्माण कंपनियों ने मनमाफिक दरें भरकर अनधिकृत रूप से दोबारा टेंडर जमा कर दिया. इससे टेंडर चाहने वाली कंपनी को मिल गया.

पूर्ववर्ती शिवराज सिंह चौहान की सरकार के दौरान ई-टेंडरिंग में लगभग 3,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के घोटाले की आंशका है और कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दौरान अपने वचन-पत्र में ई-टेंडरिंग घोटाले की जांच कराने और दोषियों को सजा दिलाने का वादा किया था. इस मामले की जांच ईओडब्ल्यू के पास थी. ईओडब्ल्यू ने इसमें सीईआरटी की मदद ली. सीईआरटी ने अपनी रपट में यह बात मानी है कि ई-टेंडरिंग में छेड़छाड़ हुई है. इसी रपट के आधार पर ईओडब्ल्यू ने पांच विभागों, सात कंपनियों और अज्ञात अधिकारियों व राजनेताओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

ईओडब्ल्यू का मानना है कि लगभग 3,000 करोड़ रुपये के ई-टेंडरिंग घोटाले में साक्ष्य और तकनीकी जांच में पाया गया है कि ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल में छेड़छाड़ कर जल निगम के तीन, लोक निर्माण विभाग के दो, जल संसाधन विभाग के दो, मप्र सड़क विकास निगम के एक और लोक निर्माण की पीआईयू के एक टेंडर कुल मिलाकर नौ टेंडर में सॉफ्टवेयर के जरिए छेड़छाड़ की गई. इसके जरिए सात कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया है.

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