राम मंदिर मुहूर्त पर दिग्विजय के बयान से एमपी में ‘महाभारत’, शिवराज-नरोत्तम-सारंग ने दिया ये जवाब

शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने दिग्विजय सिंह के ट्वीट्स पर जवाब दिया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता, जिन्होंने श्रीराम के अस्तित्व को ही नकार दिया, आज राम मंदिर के निर्माण के शुभ-अशुभ समय के निर्धारण करने में लगे हैं.

Narottam Mishra and Shivraj Singh reply to Digvijay Singh on bhumi pujan muhurat, राम मंदिर मुहूर्त पर दिग्विजय के बयान से एमपी में ‘महाभारत’, शिवराज-नरोत्तम-सारंग ने दिया ये जवाब

राम मंदिर भूमि पूजन (Ram Mandir Bhumi Pujan) के मुहूर्त को लेकर सियासी घमासान छिड़ गया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) ने केंद्र सरकार पर हमलावर होते हुए भूमि पूजन के मुहूर्त को लेकर कई ट्वीट किए. दिग्विजय सिंह ने कहा कि सनातन परंपरा में चातुर्मास में संत महात्मा अपना स्थान नहीं छोड़ते और न कोई कार्य किया जाता है.

उन्होंने कहा कि पूरे देश में परंपरा चली आ रही है कि मूहूर्त देखकर शुभ कार्य किया जाता है. जगद्गुरु शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती जी ने कहा कि ये मूहूर्त गलत है. अब मंदिर के पुजारी को कोरोना हो गया, अमित शाह को कोरोना हो गया, कई बीजेपी के बड़े नेताओं को कोरोना हुआ, कमला रानी के निधन के बाद पूरी कैबिनेट को क्वारंटाइन होना चाहिए. केंद्र सरकार के मंत्रियों को क्वारंटाइन होना चाहिए. सामान्य व्यक्ति का घर कंटेंमेंट हो जाता है, क्या मुख्यमंत्री और गृहमंत्री के लिए अलग कानून हैं?

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ये मूहूर्त प्रधानमंत्री की सुविधा से निकाला गया है लेकिन मूहूर्त गलत है. मोदी जी मुहूर्त तय कर रहे हैं, हमें उस पर आपत्ति है. दिग्विजय सिंह ने आगे कहा कि उमा जी को भूमि पूजन में जाना चाहिए. उमा जी बताएं कि क्या मूहूर्त सही है, बीजेपी साधू-संत विहिप क्यों मौन हैं, इस पर शास्त्रार्थ होना चाहिए.

शिवराज सिंह का दिग्विजय सिंह पर पलटवार

वहीं इस मामले पर शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) ने दिग्विजय सिंह के ट्वीट्स पर जवाब दिया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता, जिन्होंने श्रीराम के अस्तित्व को ही नकार दिया, आज राम मंदिर के निर्माण के शुभ-अशुभ समय के निर्धारण करने में लगे हैं. अरे कांग्रेसियों, राम का नाम लेने से ही समय शुभ हो जाता है. इस निकृष्ट सोच और सनातन धर्म की आस्थाओं के साथ खिलवाड़ का नतीजा है कि आज सम्पूर्ण कांग्रेस अपने पतन की ओर अग्रसर है.

कांग्रेस के लिए राम, राजनीति के विषय होंगे, लेकिन हमारे लिए राम, भक्ति और आस्था के विषय हैं. कांग्रेस के ही कुछ अति उत्साही नेताओं ने नारा दिया था, ‘मंदिर वहीं बनाएंगे, लेकिन तारीख नहीं बताएंगे.’ वह शुभ घड़ी आई तो उनके पेट में दर्द होने लगा है. पौराणिक काल में जब ऋषि-मुनि यज्ञ करते थे, तो असुर और राक्षस आकर उसमें विघ्न डालते थे, कांग्रेस के नेता यही चरितार्थ कर रहे हैं.

नरोत्तम मिश्रा ने दिया तीखा जवाब

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) सरकार के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) ने भी दिग्विजय सिंह द्वारा भूमि पूजन के मुहूर्त पर उठाए गए सवालों पर कटाक्ष किया. उन्होंने लिखा ज्योतिषाचार्य दिग्विजय सिंह राम मंदिर के भूमिपूजन के मुहूर्त की चिंता करने के बजाय अपने शास्त्र ज्ञान का उपयोग कांग्रेस की दुर्दशा सुधारने के लिए आवश्यक अनुष्ठान का मुहुर्त निकालने में करें. इससे उनका भी भला होगा और कांग्रेस का भी.

अगले ट्वीट में उन्होंने कहा कि एक ओर कमल नाथ जी सुंरदकांड करा रहे हैं तो दूसरी ओर दिग्विजय सिंह लंकाकांड में व्यस्त हैं. इतिहास गवाह है कि जब-जब कोई धार्मिक कार्य होता है तो आसुरी शक्तियां विघ्न-बाधाएं डालतीं हैं. कमोवेश ये उसी तरह की राजनीति है, भगवान उन्हें कभी माफ नहीं करेंगे.

उन्होंने एक और ट्वीट में कहा कि दिग्विजय सिंह जी को फ्री कंसल्टेंसी खोल लेनी चाहिए. वे सबको सुबह से शाम तक सलाह ही देते रहते हैं. अब राहुल गांधी पता नहीं कौन सी यात्रा पर निकलें, कहीं उत्तराखंड की यात्रा पर न चले जाएं.

चिकित्सा मंत्री ने भी ली दिग्विजय की क्लास

मध्यप्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने टीवी 9 भारतवर्ष से बातचीत में दिग्विजय सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सनातन धर्म की बात वो कर रहा है जिसने संन्यास आश्रम की उम्र में शादी की है. ये उनकी कैसी सनातन परंपरा है. पहले खुद सनातन परंपरा का पालन करें दिग्विजय सिंह, जहां राम का नाम है वहां सब शुभ है.

उन्होंने कहा कि पहले ये तय करें कि मोदी जी का विरोध है या राम नाम का विरोध है. ये ऐसे काम करते हैं जिसे‌ सनातन नहीं कहा जा सकता. यह तुष्टीकरण की राजनीति करते हैं, इसीलिए राम मंदिर निर्माण में रोड़े अटकाते हैं. आतंकवादियों का साथ देते हैं और दूसरी ओर राम मंदिर का विरोध करते हैं.

एक ओर कमलनाथ सेलिब्रेट कर रहे हैं और दिग्विजय सिंह इसका विरोध कर रहे हैं. पहले खुद तय कर लें कि कांग्रेस क्या चाहती है. यह लोग अफजल गुरु के घर गए, बाटला हाउस वालों को शहीद कहा, आज तक क्या दिग्विजय सिंह या कमलनाथ राम मंदिर निर्माण के लिए शहादत देने वाले किसी शख्स के घर गए?

इन्हें सिर्फ राजनीति करना आता है. यह वही कांग्रेस है जिसने रामसेतु तुड़वाया. यह वही कांग्रेस है, जिसकी सरपरस्ती में कारसेवकों पर गोलियां चलाई गईं. यह वही कांग्रेस है जिसने राम मंदिर निर्माण में रोड़े अटकाए.

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