रेप पीड़िता के परिवार को तीन महीने तक रखा बहिष्कृत, पंचायत ने अब सुनाया नॉनवेज पार्टी का फरमान

पंचायत ने फरमान सुनाया कि शुद्धिकरण के लिए जब तक पीड़िता का परिवार पूरे गांव को मांसाहारी भोजन का भंडारा न कराए तब तक इसका बहिष्कार किया जाए.

भोपाल: मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के डूंगापुरा गांव की नाबालिा के साथ गांव के ही एक युवक ने जनवरी माह में बलात्कार किया था. इस घटना का FIR कराना परिवार वालों के लिए मुसीबत साबित बन गया है. सद्भाव और सामाजिक समरसता के शासन व समाज के तमाम दावे डूंगापुरा गांव में बेमानी साबित हो गए हैं. बलात्कार पीड़िता का परिवार अपनी बेटी आबरू लुट जाने के बाद समाज की अदालत में खुद ही मुजरिम बना खड़ा है.

नरसिंहगढ़ ब्लॉक के डूंगापुरा गांव की नाबालिग बालिका से गांव के ही युवक सियाराम ने 4 जनवरी 2019 को बालात्कार किया था. इसकी रिपोर्ट पीड़िता के परिजनों ने पुलिस में दर्ज कराई थी. आरोपी जेल जाकर जमानत रिहा तो हो गया लेकिन गांव की पंचायत को पीड़ित परिवार का यह FIR कराना रास नहीं आया.

पीड़ित परिवार को माना गया अछूत
पंचायत ने पीड़िता के परिवार को इस अपराध का दोषी माना कि- चूंकि बलात्कारी नीची जाति का है, इसलिए यह परिवार अछूत माना जाए और इसके शुद्धिकरण के लिए जब तक यह पूरे गांव को मांसाहारी भोजन का भंडारा न कराए तब तक इस परिवार का बहिष्कार किया जाए.

पंचायत के इस फैसले पर पीड़िता के पिता से लिखित सहमति भी ली गई. पंचायत में गांव के अलावा आसपास के पंच भी शामिल हुए थे. मजदूरी कर पेट पाल रहे इस परिवार के पास भंडारे के पैसे नहीं थे, इसलिए चार माह से न तो बलात्कार पीड़िता के यहां कोई गांव से आता और न इन्हें कोई बुलाता है. इन्हें पानी भी नहीं लेने देते, न ही कार्यक्रम का न्योता देते हैं.

मानव अधिकार आयोग में भी शिकायत
समाज और गांव के अछूता बनाने वाले इस फरमान के खिलाफ अब पीड़िता के माता-पिता जिला मुख्यालय आकर महिला बाल विकास अधिकारी से मिले. उन्होंने तत्काल पुलिस कार्रवाई का आश्वासन दिया. बेटी के साथ दुराचार जैसी घटना से सहमा परिवार गांव के इस खाप पंचायती फैसले से आहत होकर मानव अधिकार आयोग में भी शिकायत कर रहा है.

चार माह से अछूत बने इस परिवार को इस दुष्कर्म की घटना की रिपोर्ट लिखाने गांव से थाने और थाने से जिला मुख्यालय घूमने में आठ दिन बीत गए. इसके बाद FIR कराने में कामयाबी मिली थी. अब अछूत से शुद्ध कराने राजगढ़ जिला प्रशासन कितना गम्भीर होकर न्याय दिलाएगा, यह कहा नहीं जा सकता है.

पीड़ित परिवार करेगा कथा का आयोजन
मामला सामने पर खुद पुलिस प्रशासन इससे निजात पाने के तरीके जरूर ढूंढ रही है. एडिशनल एस पी कहते हैं कि ऐसा कुछ था नहीं है, अब पीड़ित परिवार कथा का आयोजन कर समाज में शामिल हो जाएगा.

आखिर हम किस समाज मे जी रहे हैं, जहां किसी दुष्कर्म पीड़िता को समाज इसलिए अशुद्ध करार देता है कि आरोपी नीची जाति का है और भला किसी शुद्धिकरण के लिए मांसाहारी भोजन कराना क्या दर्शाता है? समझ से परे है.

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