MP की कीर्ति का करिश्मा, आंखों में सिर्फ 25 फीसदी रोशनी के साथ 12वीं में हासिल की 8th रैंक

सतना (Satna) के प्रियंवदा बिड़ला हाई सेकेंडरी स्कूल (Priyamvada Birla High Secondary School) में पढ़ने वाली कीर्ति (Kirti Kushwaha) की प्रिंसिपल कहती हैं कि कीर्ति ने पूरे स्कूल का नाम रोशन किया है.
Satna visually impaired girl kirti, MP की कीर्ति का करिश्मा, आंखों में सिर्फ 25 फीसदी रोशनी के साथ 12वीं में हासिल की 8th रैंक

मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की कीर्ति कुशवाहा (Kirti Kushwaha) 75 प्रतिशत अपनी आखों की रोशनी खो चुकी हैं. केवल 25 प्रतिशत देखने की क्षमता के साथ कीर्ति ने वो करिश्मा कर दिखाया है, जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी. सोमवार को मध्य प्रदेश बोर्ड का 12वीं का रिजल्ट (MPBSE 12th Result 2020) घोषित किया गया. सतना की रहने वाली कीर्ति ने कॉमर्स स्ट्रीम में 12वीं में 94.4 प्रतिशत अंक प्राप्त कर आठवीं रैंक हासिल की है. कीर्ति को 500 अंकों में से 472 अंक मिले हैं.

आर्थिक तंगी के बावजूद नहीं छोड़ी पढ़ाई

एचटी की रिपोर्ट के अनुसार, कीर्ति एक तरफ जहां खुद 75 प्रतिशत तक देख नहीं सकतीं, वहीं दूसरे ओर उनके पिता अपना बिजनेस खो चुके हैं. आर्थिक तंगी के कारण दोनों भाइयों ने पढ़ाई छोड़ दी, लकिन फिर भी कीर्ति ने अपने सपने को पूरा करने की आस नहीं छोड़ी. 17 वर्षीय कीर्ति ने अपने सपनों को पूरा करने के हर चुनौती का सामना किया.

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अपने दृढ़ निश्चय के बलबूते न केवल कीर्ति ने अपने सपने को पूरा किया, बल्कि परिवार और अपने स्कूल के लिए भी प्रेरणा बन गई है. सतना के प्रियम्वदा बिड़ला हाई सेकेंडरी स्कूल में पढ़ने वाली कीर्ति की प्रिंसिपल कहती हैं कि कीर्ति ने पूरे स्कूल का नाम रोशन किया है.

सिर्फ 25 प्रतिशत तक देख सकती है कीर्ति

रिपोर्ट के अनुसार, कीर्ति के मां रश्मि कुशवाहा बताती हैं कि दो साल पहले कीर्ति के पिता कवि शंकर कुशवाहा का एक्सिडेंट हो गया था, जिसके बाद उनका छोटा सा टेंट हाउस बिजनेस खत्म हो गया. जन्म से ही कीर्ति 50 प्रतिशत तक देखने में असक्षम थी और फिर धीरे-धीरे 25 प्रतिशत विजन दूसरी आंख का भी कम हो गया. पर कीर्ति ने सामान्य बच्चों की तरह स्कूल में अपनी पढ़ाई जारी रखी.

बच्चों को ट्यूशन देकर पूरी की अपनी पढ़ाई

उन्होंने कहा कि तीनों बच्चों की पढ़ाई के लिए पैसे नहीं थे, जिसके बाद कीर्ति के भाइयों ने अपनी पढ़ाई छोड़ने का फैसला किया, लेकिन कीर्ति ने ऐसा करने से इनकार कर दिया. रश्मि ने बताया कि कीर्ति ने अपने आस पड़ोस के लोगों से विन्नती की कि वे अपने बच्चों के उसके पास ट्यूशन के लिए भेजें. कीर्ति होशियार थी, इसलिए लोग उसे मना नहीं कर सकें और उनके बच्चे कीर्ति के पास पढ़ने के लिए आने लगे. ट्यूशन से जो पैसा उसे मिलता था, उससे वह अपनी पढ़ाई पूरी करती थी.

पर्याप्त बिजली न होने पर डॉक्टर ने पढ़ाई करने से किया मना

रश्मि आगे बताती हैं कि कीर्ति की ये यात्रा इतनी आसान नहीं थी, क्योंकि डॉक्टर ने उसे दृष्टि के कम होने के कारण रात में खराब रोशनी में पढ़ने से मना कर दिया था. बिजली विभाग ने हमारा कनेक्शन काट दिया था, क्योंकि हमने पिछले साल जुलाई में बिल का भुगतान नहीं किया था. हाल ही में कनेक्शन फिर से शुरू किया गया, हालांकि हमारे यहां अच्छा लाइट सिस्टम नहीं है, लेकिन कीर्ति ने अधिक सुविधाओं के लिए कभी कोई मांग नहीं की.

वह अपने स्कूल, ट्यूशन और पढ़ाई में सुबह 6 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक पढ़ती थी और उसे कामयाबी मिली. वहीं कीर्ति कहता है कि इस कामयाबी के पीछे उनकी मां और उनके स्कूल का समर्थन है. मैंने आशा की थी कि मेरे अच्छे मार्क्स आएंगे, लेकिन यह कभी नहीं सोचा था कि मेरिट लिस्ट में मेरा नाम होगा.

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