बसों-कारों को फूंकने वाले प्रदर्शनकारियों को कांग्रेस नेता पहुंचाते थे पैसे! सोनिया-राहुल दें जवाब: शिवराज

शिवराज ने सवाल किया, "मैडम सोनिया गांधी देश की जनता को जवाब दें, क्या आपको मालूम था कि आपकी पार्टी के नेता दंगे भड़काने के लिए पैसों का लेन-देन कर रहे हैं?"

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को कांग्रेस पर जमकर हमला बोला है. उन्होंने ट्वीट करके कहा कि अब या तो सिब्बल साहब ने कांग्रेस के पार्टी फंड के लिए पैसे लिए हैं, या ‘Popular Front of India’ उनका क्लाइंट है!

उन्होंने आगे कहा कि ‘अगर ऐसा नहीं है तो फिर CAA विरोधी प्रदर्शन और हिंसा कराने के लिए पत्थरबाजों और दंगाइयों को मैडम सोनिया गांधी, सिब्बल साहब और कांग्रेस ने पैसे पहुंचाये हैं!’


शिवराज ने ट्वीट किया, “मैडम सोनिया गांधी देश की जनता को जवाब दें, क्या आपको मालूम था कि आपकी पार्टी के नेता दंगे भड़काने के लिए पैसों का लेन-देन कर रहे हैं? क्या आपने गुंडे-बदमाशों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी ले ली है? क्या देश की शांति भंग करने का ठेका आपने ले लिया है?”


बीजेपी नेता ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि ‘राहुल गांधी जी, कृपया जवाब तैयार करवाएं! आपको देश को बताना होगा कि घर-दुकानों में तोड़फोड़ करने वाले, बसों-कारों को आजादी के नाम पर फूंकने वाले आपके ‘शांतिपूर्ण’ प्रदर्शनकारियों को आपकी पार्टी के नेता पैसे पहुंचा रहे थे, इसकी जानकारी आपको थी?’


उन्होंने कहा, “खुद को क्रांतिकारियों की पार्टी कहने वाली कांग्रेस के नेता देश को जलाने वालों की मदद कर रहे हैं. इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक और कुछ नहीं हो सकता! क्या CAA विरोधी हिंसक प्रदर्शन करने में कांग्रेस का हाथ है? क्या कांग्रेसी नेता देश में हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार हैं?”


बता दें कि कट्टरपंथी और विवादित इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट (PFI) को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बड़ा खुलासा किया है. इसके मुताबिक पीएफआई ने कपिल सिब्बल, इंदिरा जयसिंह,जयंत दवे समेत देश के कई नामी-गिरामी वकीलों को करोड़ों रुपये दिए गए हैं.

वहीं, नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शनों के दौरान देश के कई शहरों में हिंसा भड़काने के आरोपी और कई राज्यों में प्रतिबंधित संगठन पीएफआई का दिल्ली के शाहीन बाग धरना से चौंकाने वाला लिंक भी सामने आया है.

जांच में सामने आया है कि इस इलाके में पीएफआई के कई दफ्तर खुले हुए हैं. इनमें तीन की पुष्टि हो चुकी है. इनमें कुछ दफ्तर तो धरना स्थल के काफी नजदीक खोले गए हैं.

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