2021 की जनगणना में आदिवासियों को हिंदू लिखने के लिए मनाएगा RSS, कांग्रेस ने जताई आपत्ति

आदिवासी संगठन खुद लंबे वक्त से अलग धर्म कोड की मांग कर रहे हैं. वहीं, संघ को बढ़ते धर्मांतरण और हिंदुओं की कम होती संख्या की चिंता सता रही है.
Tribal organizations demands, 2021 की जनगणना में आदिवासियों को हिंदू लिखने के लिए मनाएगा RSS, कांग्रेस ने जताई आपत्ति

आदिवासियों के धर्म कोड को लेकर एक बार फिर से राजनीति गरमा गई है. संघ की भोपाल में हुई बैठक में इस तरह का एजेंडा सामने आने के बाद कांग्रेस और बीजेपी इसे लेकर आमने-सामने आ गए हैं.

आदिवासी संगठन खुद लंबे वक्त से अलग धर्म कोड की मांग कर रहे हैं. संघ को बढ़ते धर्मांतरण और हिंदुओं की कम होती संख्या की चिंता सता रही है.

सूत्र बताते हैं कि संघ की बैठक के आखिरी दिन भोपाल में आरएसएस सुप्रीमो मोहन भागवत ने आदिवासियों के धर्म को लेकर चर्चा की. संघ के अनुषांगिक संगठनों से चर्चा के दौरान मोहन भागवत ने कहा कि आदिवासियों के बीच जाकर कार्यकर्ताओं को काम करना होगा.

उन्होंने कहा कि यह कोशिश होनी होगी कि आदिवासी इस बात के लिए जागरूक हों कि वो अपने आप को हिंदू कहें भी और मानें भी.

हाल में लोकसभा में पेश सीएए बिल के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने हिंदुओं की घटती संख्या का जिक्र किया था. संघ के एक सर्वे के मुताबिक, 2001 से 2011 की जनगणना में आदिवासियों ने धर्म के कॉलम में हिंदू की जगह अन्य लिखा था. ये हिंदुओं की संख्या कम हो जाने की एक वजह बन रहा है.

संघ मानता है कि आदिवासियों का बड़ा तबका खुद को हिंदू नहीं मान रहा और जो मानता है उसका धर्मांतरण तेजी से हो रहा है. इसे रोकने की जरूरत है.

गौरतलब है कि हाल ही में बैतूल के कुछ आदिवासी संगठनों ने सीएए से विरोध में आवाज उठाई थी और कागज नहीं दिखाने का ऐलान किया था.

एक ओर संघ को घटते हिंदुओं की चिंता सता रही है. वहीं, सरकार के आदिम जाति कल्याण विभाग के मंत्री ओंकार सिंह मरकाम ने एक कार्यक्रम के दौरान चिंता जताई कि आदिवासी आजकल अपना सरनेम लिखने से हिचकिचाते हैं.

उन्होंने कहा कि इससे पहचानने में मुश्किल होती है कि असल आदिवासी कौन है. संघ अगर इतनी ही चिंता करता है तो आर्थिक तौर पर आदिवासियों के उत्थान की बात करे.

कांग्रेस की मीडिया विभाग की चेयरमैन शोभा ओझा ने कहा कि संघ के हिडेन एजेंडे को समझने की जरूरत है. ये जो कहते हैं उसके पीछे मकसद कुछ और होता है.

इस मामले में बीजेपी के मीडिया प्रभारी लोकेंद्र पराशर का कहना है कि संघ अगर इस बात को लेकर कोई निर्देश देता है तो बीजेपी उसपर अमल करेगी. साथ ही आदिवासियों के बीच जाकर काम किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि जिस तरह से बड़े पैमाने पर विदेशी ताकतें आदिवासियों का धर्मांतरण करवा रही हैं, ये चिंता का विषय है. आदिवासी हिंदू धर्म से दूर होता जा रहा है.

आदिवासी लंबे वक्त से अलग धर्म कोड की मांग कर रहे हैं. आदिवासियों के कई समुदाय खुद को हिंदू नहीं मानते और खुद के लिए अलग धर्म कोड की मांग को लेकर न्यायालय की शरण में हैं.

यह पहली बार नहीं है कि आरएसएस ने आदिवासियों को लेकर अपना एजेंडा साफ किया हो लेकिन जब एनपीआर, सीएए और एनआरसी का‌ मामला सुर्खियों में हो तो ये बहस मायने रखती है.

ये भी पढ़ें-

मनीष सिसोदिया की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, जामिया मामले में कोर्ट ने पुलिस से मांगी ATR

राजस्थान: ऑटो में बैठने को लेकर हुए झगड़े में गई कश्मीरी युवक की जान

कन्हैया कुमार के काफिले पर फिर हमला, नारेबाजी के बाद फेंके जूते-चप्पल

Related Posts