आखिर क्यों Congress छोड़ने पर मजबूर हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया? पढ़ें- BJP के करीब आने की Inside Story

माना जाता है कि सूबे में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद सिंधिया मुख्यमंत्री बनना चाहते थे पर बन नहीं पाए. इनके राजनीतिक विरोधियों ने इन्हें प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष भी नहीं बनने दिया. अब बारी राज्यसभा में जाने की आई तो इसमें भी अड़ंगा लगा दिया गया.
why Jyotiraditya Scindia left Congress, आखिर क्यों Congress छोड़ने पर मजबूर हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया? पढ़ें- BJP के करीब आने की Inside Story

आखिरकार ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस का दामन छोड़ दिया. होली के दिन जहां सभी रंग में सराबोर थे, वहीं महाराज ने इसी दिन कांग्रेस के रंग में भंग कर दिया. बताया जा रहा है कि सिंधिया की मनचाही मुराद पार्टी में रहते हुए पूरी नहीं हो रही थी. इसीलिए इन्होंने इस तरह का चौंकानेवाला फैसला लिया.

माना जाता है कि सूबे में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद सिंधिया मुख्यमंत्री बनना चाहते थे पर बन नहीं पाए. इनके राजनीतिक विरोधियों ने इन्हें प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष भी नहीं बनने दिया. अब बारी राज्यसभा में जाने की आई तो इसमें भी अड़ंगा लगा दिया गया.

राजनीतिक सूत्रों की मानें तो सूबे के मुख्यमंत्री उनकी बात भी नहीं सुन रहे थे. कहा तो ये भी जा रहा है कि इन्होंने मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को काम के सिलसिले में कई पत्र लिखे पर उनका कोई जवाब नहीं मिला. सरकार में ज्योतिरादित्य सिंधिया के काम नहीं हो रहे थे. उनके चहेते अफसरों को भी परेशान किया जा रहा था. यहां तक कि उनके समर्थक मंत्री और विधायकों के साथ भी सरकार का रवैया निगेटिव बताया जाता था.

पार्टी और सरकार में अपनी लगातार हो रही उपेक्षा और अंदरूनी राजनीति से आहत सिंधिया ने अपनी पींगे बीजेपी के साथ बढ़ानी शुरू कर दी. इसे बाद में अपने और अपने समर्थकों के सम्मान के लिए उठाया गया कदम बताया गया. बीजेपी नेता यह कहते दिख रहे हैं कि कमलनाथ सरकार में भ्रष्टाचार से ज्योतिरादित्य परेशान थे, इसलिए उन्होंने हमारे साथ आने का मन बनाया.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके आवास पर जाकर मिलने के बाद इस्तीफा देने वाले ज्योतिरादित्य के बारे में कहा जा रहा है कि उन पर बीजेपी में आने का कोई दबाव नहीं था. वो खुद पार्टी की नीतियों से प्रभावित होकर अपने हाथ में कमल थामना चाहते हैं. वहीं जानकार यह भी कहते हैं कि ज्योतिरादित्य बीजेपी में आने से पहले भी उनके लिए कई बार काम आ चुके थे.

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