MP अजब है! शादी से पहले दूल्हों को लेनी पड़ती है टॉयलेट में सेल्फी

मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह स्कीम आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए है. सत्ता में आने के बाद कांग्रेस सरकार ने इस स्कीम के तहत दी जाने वाली राशि को 28 हजार से बढ़ाकर 51 हजार रुपए कर दिया था.
Selfie in toilet, MP अजब है! शादी से पहले दूल्हों को लेनी पड़ती है टॉयलेट में सेल्फी

शादी के दिन हर किसी के जीवन में खुशहाली लेकर आते हैं. कई लोग शादी से पहले प्री-वेड फोटोशूट भी कराते हैं, जिसे वे हमेशा के लिए अपने पास संजो कर रखना पसंद करते हैं, पर मध्य प्रदेश में एक ऐसा प्री-वेड फोटोशूट होता है, जिसे कोई भी याद नहीं रखना चाहेगा.

हालांकि आप इससे भाग भी नहीं सकते हैं, क्योंकि ऐसा किया तो मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह स्कीम के तहत दुल्हन को मिलने वाले 51 हजार रुपए नहीं मिलेंगे. दरअसल इस स्कीम के तहत एक फॉर्म भरना होता है, जिसमें दुल्हन के होने वाले पति को यह साबित करना होता है कि उसके घर में टॉयलेट है.

इसके लिए दुल्हे को अपने घर के टॉयलेट के साथ एक सेल्फी लेनी पड़ती है, जिसको उसे फॉर्म के साथ जमा कराना पड़ता है. सरकारी अधिकारी हर घर में जाकर यह चेक तो नहीं कर सकते कि हर जगह टॉयलेट हैं या नहीं, तो इसलिए वे दूल्हे से टॉयलेट में खड़े होकर सेल्फी खींचकर देने की मांग करते हैं.

नो टॉयलेट सेल्फी, नो शादी

भोपाल में गुरुवार को समूह विवाह आयोजित किया गया. इस समूह में शादी करने वाले भोपाल के एक निवासी ने इस पर बात करते हुए कहा, “कल्पना कीजिए, जो शादी का प्रमाण पत्र मिलेगा उसमें दूल्हे की टॉयलेट में ली गई सेल्फी चिपकी हो. मुझे बताया गया कि जब तब मैं फोटो नहीं दूंगा तब तक काजी निकाह नहीं पढ़ेगे.”

वहीं इस मामले पर सोशल जस्टिस और डिसेबल्ड वेलफेयर डिपार्टमेंट के प्रमुख सचिव जेएन कंसोटिया का कहना है कि दूल्हों द्वारा ये साबित करना कि उनके घर में टॉयलेट है या नहीं को गलत चीज नहीं है. सोशल जस्टिस डिपार्टमेंट ने ऐसा कोई भी निर्देश जारी नहीं किया है. नीति को लागू करना का तरीका और बेहतर तरीके से हो सकता है.

बता दें कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह स्कीम आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए है.

पिछले साल 18 दिसंबर को सत्ता में आने के बाद कांग्रेस सरकार ने इस स्कीम के तहत दी जाने वाली राशि को 28 हजार से बढ़ाकर 51 हजार रुपए कर दिया था. इसके बाद प्रशासन के पास बहुत ज्यादा आवेदन आने लगे. इससे प्रशासन को यह समस्या सामने आई कि हर घर जाकर यह सुनिश्चित करना संभव नहीं था कि उनके घर में टॉयलेट है या नहीं.

 

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