महाराष्ट्र के मैन ऑफ द मैच बनकर उभरे शरद पवार, पढ़ें कैसा है तिलिस्म

तीन बार मुख्यमंत्री बनने वाले शरद पवार महाराष्ट्र की राजनीति की दशा-दिशा 50 वर्षों से तय करते आ रहे हैं.
All you need to know about NCP head Sharad Pawar, महाराष्ट्र के मैन ऑफ द मैच बनकर उभरे शरद पवार, पढ़ें कैसा है तिलिस्म

शरद गोविंद राव पवार महाराष्ट्र की राजनीति के चाणक्य कहे जाते हैं. महाराष्ट्र में हुए ताजा नाटकीय घटनाक्रम में शरद पवार का रोल सबसे बड़ा बताया जाता है. 50 साल से ज्यादा का राजनैतिक अनुभव रखने वाले 80 पार के शरद पवार महाराष्ट्र की राजनीति में न सिर्फ प्रासंगिक हैं बल्कि समीकरण तय कर रहे हैं.

27 साल की उम्र में बने विधायक

शरद पवार की शुरुआत युवा राजनेता के तौर पर हुई थी. साल 1967 में महज़ 27 साल की उम्र में विधायक चुने गए. उसके बाद दिग्गज नेता यशवंत राव चव्हाण की सरपरस्ती में नई ऊंचाइयां छूते रहे. पवार आत्मविश्वास की उस ऊंचाई पर थे कि इमरजेंसी के बाद कांग्रेस छोड़ दी और 1978 में जनता पार्टी के साथ सरकार बनाई. अगले दो साल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे. 1980 में कांग्रेस की वापसी के साथ शरद पवार की सरकार बर्खास्त कर दी गई.

1983 में शरद पवार ने कांग्रेस पार्टी सोशलिस्ट की नींव रखी और लोकसभा चुनाव में बारामती संसदीय सीट से चुनकर संसद पहुंचे. 1985 के विधानसभा चुनाव में शरद पवार का झुकाव फिर से प्रदेश की राजनीति में हो गया. लोकसभा से इस्तीफा देकर पवार ने विधानसभा में विपक्ष का नेतृत्व किया.

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बीच में शरद पवार

वो साल 1987 था जब वे अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस में वापस आए और राजीव गांधी की नजदीकी हासिल कर ली. 1988 में उन्हें शंकर राव चव्हाण की जगह मुख्यमंत्री बनाया गया और चव्हाण को केंद्र में वित्त मंत्रालय दिया गया.

पीएम बनते-बनते रह गए

साल 1991 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या होने के बाद पीएम पद की रेस में तीन लोगों का नाम था. नारायण दत्त तिवारी, पीवी नरसिम्हा राव और शरद पवार. एनडी तिवारी अप्रत्याशित रूप से उस साल चुनाव हार गए और मौका पीवी नरसिम्हा राव को मिला. शरद पवार ने रक्षा मंत्रालय संभाला.

बाद में फिर से महाराष्ट्र की राजनीति ने शरद पवार को खींच लिया. 1993 में सुधाकर राव नाइक को हटाकर शरद पवार को सीएम बनाया गया. 12 मार्च को मुंबई में सीरियल बम धमाके हुए जिनकी वजह से सरकार को तीखी आलोचना झेलनी पड़ी और अगले विधानसभा चुनाव में इसका खामियाजा उठाना पड़ा.

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ऐसे हुआ एनसीपी का गठन

साल 1999 में 12वीं लोकसभा भंग हुई तो शरद पवार, पीए संगमा और तारिक अनवर ने सोनिया गांधी के विदेशी मूल पर सवाल उठाए. नतीजतन शरद पवार पार्टी से निकाल दिए गए. पार्टी से अलग होकर पवार ने नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी बनाई लेकिन 1999 में हुए विधानसभा चुनाव में जनादेश न मिलने पर कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बना ली.

बड़े पदों पर किया काम

शरद पवार नरसिम्हा राव कैबिनेट में रक्षामंत्री रहने के अलावा साल 2004 से 2014 तक मनमोहन सिंह की कैबिनेट में कृषि मंत्री रह चुके हैं. तीन बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं. शरद पवार प्रदेश की राजनीति के साथ क्रिकेट की राजनीति के भी महारथी हैं. 10 साल से ज्यादा वे मुंबई क्रिकेट काउंसिल अध्यक्ष पर रहे. 2005 से 2005 तक भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और 2010  से 2012 तक अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल के प्रमुख रहे.

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नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के मुखिया शरद पवार की पावर इतनी बड़ी है कि पूरे महाराष्ट्र की राजनीति उनके इर्द गिर्द घूमती है और उन्हें कोई भी पार्टी नजरअंदाज नहीं कर सकती. ताजे घटनाक्रम से भी ये बात साबित हो रही है कि पवार का तिलिस्म अभी टूटा नहीं है.

 

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