‘BJP को हमारी पीठ में खंजर घोंपना ही था’, पवार के बाद अब शिवसेना ने भी कसा तंज

शिवसेना ने शरद पवार की तारीफ करते हुए कहा कि, पवार के अनुभव का मुरब्बा महाराष्ट्र चख ही रहा है. वहीं बीजेपी पर हमला बोलते हुए शिवसेना कहा कि 'सेठ, ये क्या है! ये महाराष्ट्र है. फिर से पांव फिसला तो गिर पड़ोगे.'

शिवसेना ने अपने मुखपत्र सामना के संपादकीय में नेशनल कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार और सहयोगी दल कांग्रेस की तारीफ करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तंज कसा है.

शिवसेना ने कहा, “महाराष्ट्र की राजनीति उत्तर से दक्षिणी ध्रुव तक पहुंच चुकी है, लेकिन इस यात्रा में भारतीय जनता पार्टी का जो मजाक बना, उसकी मजेदार कहानियां अब बाहर आने लगी हैं. शिवसेना का मुख्यमंत्री न बनने पाए या शिवसेना के नेतृत्व में महाराष्ट्र की सरकार न बनने पाए, इसके लिए पर्दे के पीछे से जो निर्देशन जारी था, उस नाटक की असलियत शरद पवार ही सामने लाए हैं.”

“शरद पवार झुके नहीं. कांग्रेस ने भी परिपक्वता दिखाई. वहीं दूसरी ओर शिवसेना दबाव तंत्र की परवाह न करते हुए अपनी बात पर अटल रही.

पीएम मोदी द्वारा शरद पवार को दिए गए ऑफर पर शिवसेना ने कहा, “शरद पवार ने कई खुलासे किए हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने पवार को ‘ऑफर’ दी थी कि महाराष्ट्र में भाजपा के साथ सरकार बनाओ. प्रधानमंत्री का कहना था कि हमें खुशी होगी. हम दोनों साथ होंगे तो कुछ भी कर सकते हैं. आपके अनुभव की देश को जरुरत है. इस अनुभव का फायदा लेने के लिए महाराष्ट्र में मिलकर सरकार बनाने और केंद्र में मंत्री पद की बड़ी ऑफर दी गई थी, लेकिन श्री पवार ने उसे अस्वीकार कर दिया.”

“भाजपा को हर हाल में शिवसेना के साथ नाता तोड़ना ही था. ये हिंदुत्व आदि की जो बातें की जाती हैं वे सब व्यर्थ हैं. भाजपा को शिवसेना की पीठ में खंजर घोंपना ही था और उसकी ‘पटकथा’ तैयार ही थी. इसके लिए शरद पवार के अनुभव का फायदा देश को दिलाने वालों को ये पहले क्यों नहीं सूझा? ये भी सवाल ही है.”

“श्री पवार की पार्टी से 54 विधायकों के चुने जाने के बाद पवार के अनुभव का साक्षात्कार हुआ. चुनावी प्रचार में अमित शाह कहते थे, ‘पवार ने महाराष्ट्र के लिए क्या किया?’ इसका उत्तर पवार ने बाद में सही तरीके से दिया. अगर अमित शाह आदि को ये शंका थी कि पवार ने क्या किया है तो उनके किस अनुभव का फायदा श्री मोदी चाहते थे?”

“नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी मतलब ‘नेचुरल करप्ट पार्टी’ का दूषित प्रचार दिल्ली के भाजपा नेताओं ने किया तो ऐसी पार्टी से उन्हें किस अनुभव की ‘पार्टी’ चाहिए थी, ये रहस्य है. चुनाव के पहले श्री पवार को ‘ईडी’ का नोटिस भेजकर दबाव बनाया गया. प्रफुल्ल पटेल को भी जांच के लिए बुलाकर उन पर तलवार टांगी गई.”

“उद्योगपति राहुल बजाज ने भी अपनी बात कहीं. देश के गृहमंत्री के समक्ष श्री बजाज ने कहा कि आपके शासन में खुलकर बोलने की और भयमुक्त होकर जीने की आजादी नहीं रही. राहुल बजाज ने ‘भय’ और ‘भीड़’ का शास्त्र बताया.”

“महाराष्ट्र को ‘निचोड़ने’ का काम मुख्यमंत्री श्री उद्धव ठाकरे ने रुकवा दिया है. पवार के अनुभवों का लाभ नई सरकार और महाराष्ट्र को मिलेगा. पवार के विधायक 55 से कम होते तो उनका अनुभव भाजपा के लिए उपयोगी नहीं होता. पवार के पास अनुभव तो है ही, लेकिन वो अनुभव देश के काम आए इसे समझने के लिए मोदी-शाह को साढ़े 5 साल क्यों लगना चाहिए?

“शरद पवार के अनुभव का मुरब्बा महाराष्ट्र चख ही रहा है. अजीत पवार का पापड़ भी वे नहीं भूज पाए. सेठ, ये क्या है! ये महाराष्ट्र है. फिर से पांव फिसला तो गिर पड़ोगे.

 

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