महाराष्‍ट्र: BJP का सरकार बनाने से इनकार, अब शिवसेना, कांग्रेस, NCP के सामने ये हैं विकल्‍प

कुल मिलाकर महाराष्‍ट्र में गेंद अब शिवसेना के पाले में है. ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि बीजेपी के अलग हटने के बाद महाराष्‍ट्र में कौन-कौन से समीकरण ऐसे बचते हैं, जिनसे सरकार बन सकती है. आइए आपको बताते हैं सारे विकल्‍प
Maharashtra govt formation options, महाराष्‍ट्र: BJP का सरकार बनाने से इनकार, अब शिवसेना, कांग्रेस, NCP के सामने ये हैं विकल्‍प

नई दिल्‍ली: महाराष्‍ट्र विधानसभा चुनाव 2019 में एनडीए को स्‍पष्‍ट बहुमत मिलने के बाद भी अब तक सरकार बनने का रास्‍ता साफ हो नहीं पा रहा है. शिवसेना का दावा है कि बीजेपी ने चुनाव पूर्व बराबर की हिस्‍सेदारी का वादा किया था, इसलिए ढाई-ढाई साल के लिए सीएम पद दोनों दलों के बीच बांटा जाना चाहिए.

बीजेपी ने कई बार शिवसेना को डिप्‍टी सीएम समेत कई अन्‍य महत्‍वपूर्ण मंत्रालय देने की पेशकश की, लेकिन उद्धव ठाकरे और संजय राउत ने हर बार यह कहकर बीजेपी को चिढ़ाया कि अगर सीएम पद नहीं देना तो बीजेपी सरकार बना ले. काफी दिनों से चली आ गहमागहमी के बीच कई बार ऐसा लगा कि दोनों दलों के बीच सहमति बनने का रास्‍ता खुल रहा है, लेकिन शिवसेना टस से मस नहीं हुई.

महाराष्‍ट्र में सरकार बनाने के मुद्दे पर रविवार को बीजेपी की अहम बैठक हुई और इस मीटिंग में तय हुआ कि बीजेपी सरकार नहीं बनाएगी. कर्नाटक के घटनाक्रम से सबक लेते हुए महाराष्‍ट्र में बीजेपी ने जोड़-तोड़ वाले फॉर्मूले से एकदम कन्‍नी काटते हुए एक ही तीर से तीन निशाने साध दिए हैं. सबसे पहला निशाना तो शिवसेना पर ही लगाया है, जो बार-बार बीजेपी को उसके बिना सरकार बनाने की चुनौती दे रही थी.

बीजेपी ने अब स्‍पष्‍ट कर दिया है कि वह सरकार नहीं बनाएगी, मतलब यह हुआ कि शिवसेना एकदम क्लियर मैसेज भेज दिया गया है कि अगर उद्धव ठाकरे 288 सीटों में से 56 पर जीत दर्ज करके अपने बेटे आदित्‍य ठाकरे को सीएम बनते देखना चाहते हैं तो उनके रास्‍ते में बीजेपी नहीं आएगी. शिवसेना चाहे तो एनसीपी, कांग्रेस, निर्दलीय और छोटे दलों के साथ मिलकर सरकार बना ले.

बीजेपी ने दूसरा निशाना कांग्रेस पर साधा है, जो लगातार शिवसेना को समर्थन का लड्डू दिखा रही थी. अब देखना होगा कि क्‍या कांग्रेस पार्टी एनसीपी के साथ मिलकर क्‍या शिवसेना को समर्थन का लड्डू खिलाएगी?

तीसरा और स्‍पष्‍ट निशाना बीजेपी ने एनसीपी पर लगाया है. दरअसल, एनसीपी में इस समय दो मत हैं, एक खेमा शिवसेना को समर्थन देना चाहता है और दूसरा खेमा विपक्ष में बैठने का समर्थन कर रहा था. ऐसे में बीजेपी ने एनसीपी को स्‍पष्‍ट संदेश दे दिया है कि वह अब शिवसेना से समर्थन की उम्‍मीद छोड़ चुकी है. इसका मतलब यह हुआ कि एनसीपी अब बीजेपी को समर्थन देने के बारे में विचार कर सकती है.

यहां गौर करने वाले बात यह भी है कि 2014 में जब शिवसेना-बीजेपी के बीच सरकार बनाने को लेकर टकराव चल रहा था, तब एनसीपी ने समर्थन का खुला ऑफर बीजेपी को दिया था. महाराष्‍ट्र की राजनीति में इस समय एनसीपी साइलेंट प्‍लेयर के तौर पर खेल रही है और यही वो पार्टी है जिसके पास सत्‍ता की कुंजी है, क्‍योंकि कांग्रेस अकेले अपने समर्थन से शिवसेना की सरकार नहीं बनवा सकती है. उसे एनसीपी की जरूरत पड़ेगी ही.

कुल मिलाकर महाराष्‍ट्र में गेंद अब शिवसेना के पाले में है. ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि बीजेपी के अलग हटने के बाद महाराष्‍ट्र में कौन-कौन से समीकरण ऐसे बचते हैं, जिनसे सरकार बन सकती है. आइए जानते हैं:

सवाल: बीजेपी के इनकार के बाद अगर शिवसेना सरकार बनाने की मत बनाती है और कांग्रेस-एनसीपी उसे समर्थन कर देते हैं तो क्‍या बहुमत का आंकड़ा पार होगा?

जवाब: शिवसेना के पास 56 विधायक हैं, कांग्रेस के 44, एनसीपी के 54. आंकड़ा पहुंचता है 154, मतलब बहुमत के लिए जरूरी 145 के आंकड़े से 09 ज्‍यादा. इस समीकरण के हिसाब से सरकार आसानी से बन जाएगी.

सवाल: अगर शिवसेना भी सरकार बनाने से इनकार कर दे तो क्‍या कांग्रेस-एनसीपी सरकार बना सकते हैं. कांग्रेस ने राज्‍यपाल से कहा भी है कि उनका गठबंधन बड़ा है, क्‍योंकि शिवसेना तो बीजेपी का साथ दे नहीं है.

जवाब: कांग्रेस के पास 44 विधायक हैं, एनसीपी के 54, महाराष्‍ट्र की सारी छोटी पार्टियों के विधायकों की संख्‍या 16 है, जबकि 13 निर्दलीय विधायक हैं. कुल आंकड़ा बनता है 127 और सरकार बनाने के लिए चाहिए 145.

मतलब बिना कांग्रेस-एनसीपी महाराष्‍ट्र में तब तक सरकार नहीं बन सकते जब तक कि इन दोनों दलों में से एक उन्‍हें समर्थन न दे. अब बीजेपी तो कांग्रेस-एनसीपी को समर्थन देने से रही, लेकिन शिवसेना अगर खुद सरकार न बनाना चाहे तो वो कांग्रेस-एनसीपी को समर्थन दे सकती है. अगर शिवसेना ने कांग्रेस-एनसीपी को समर्थन दिया तो आंकड़ा बनता है 154.

इन दो विकल्‍पों के अलावा अब महाराष्‍ट्र में दो और विकल्‍प बन सकते हैं. पहला- बीजेपी सरकार बनाने के लिए शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी में से कुछ विधायकों को तोड़ ले और 16 छोटी पार्टियों के अलावा कुछ निर्दलीयों के समर्थन से सरकार बना ले, लेकिन बीजेपी ने जोड़-तोड़ से पहले ही इनकार कर दिया है तो ये विकल्‍प तो अब काम का नहीं रहा.

अब अंतिम विकल्‍प एक ही बचता है कि और वो ये है कि कांग्रेस-एनसीपी चाहें तो शिवसेना-बीजेपी के विधायक तोड़ लें, लेकिन इसकी भी संभावना जीरो हैं.

अब यहां आकर सारे विकल्‍प खत्‍म हो जाते हैं और एकमात्र रास्‍ता राज्‍यपाल के पास बचता है, राष्‍ट्रपति शासन का. हां, राष्‍ट्रपति शासन से पहले एक उम्‍मीद जरूर बचती है, वो ये कि शिवसेना मन बदल दे और बीजेपी को समर्थन दे दे.

महाराष्‍ट्र में किस पार्टी के पास कितनी सीटें

बीजेपी- 105

(आरपीआई ने उम्‍मीदवारों को बीजेपी के चुनाव चिन्‍ह पर उतारा था, जिनमें से पांच सीटों पर जीत दर्ज की गई)

शिवसेना- 56

कांग्रेस- 44

एनसीपी- 54

बहुजन विकास आघाड़ी- 03

ऑल इंडिया मजलिस ए इत्‍तेहादुल मुस्लिमीन 02

प्रहार जनशक्ति पार्टी- 02

समाजवादी पार्टी-02

स्‍वाभिमान पक्ष, राष्‍ट्रीय समाज पक्ष, क्रांतिकारी सेतकारी पार्टी, जन स्‍वाराज्‍य शक्ति, कम्‍युनिस्‍ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्‍ससिस्‍ट), महाराष्‍ट्र नवनिर्माण सेना, पीजेन्ट्स एंड वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया को एक-एक सीट पर जीत मिली.

(कुल 11 छोटी पार्टियों के पास 16 सीटें हैं)

13 निर्दलीय उम्‍मीदवार (इनमें से कुछ शिवसेना तो कुछ बीजेपी को समर्थन दे रहे हैं)

Related Posts