प्रवासी मजदूरों की स्थिति पर बॉम्बे HC में सुनवाई, कोर्ट ने राज्य सरकार से मांगी पूरी रिपोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay HC) की डिवीज़न बेंच ने कहा कि इस समय ना तो हमें यह अधिकार है न हम SC के आदेश के खिलाफ कोई ऑर्डर पास करना चाहते हैं. स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार को रिपोर्ट हमें सौंपनी चाहिए.

Representative Image (PTI)

बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay HC) ने महाराष्ट्र (Maharsahtra) सरकार से 2 जून तक राज्य में प्रवासी मजदूरों (Migrant Workers) की स्थिति के बारे में पूरी रिपोर्ट देने को कहा  है. यह रिपोर्ट, सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (CITU) की उस याचिका के जवाब में राज्य सरकार को देनी है, जिसमें प्रवासी मजदूरों की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी गई है. PIL में उन सभी नियमों के बारे में पूछा गया है, जो श्रमिक स्पेशल ट्रेनों (Shramik Special Trains) और बसों से अपने घर जाने वाले मजदूरों को मानने होंगे.

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सभी व्यवस्थाओं की मांगी जानकारी

चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस केके ताते (KK Tated) की एक डिवीज़न बेंच ने राज्य सरकार से उस पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी है, जो प्रवासी मजदूरों को अपने घर जाने के लिए अपनानी होगी. बेंच ने सरकार की तरफ से इन मजदूरों को ट्रेन और बस की सुविधा मिलने में लगने वाले समय, उनके रहने की व्यवस्था के बारे में भी पूछा है.

याचिका में कहा- गंदे शेल्टर होम में रहने को मजबूर प्रवासी 

CITU की तरफ से एडवोकेट गायत्री सिंह, क्रांति एलसी और रोनिता भट्टाचार्य बेक्टर ने बॉम्बे हाईकोर्ट से कहा था कि अपने घर जाने के लिए रजिस्ट्रेशन कराने वाले प्रवासी मजदूरों को उसकी वर्तमान स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं है. वे गंदे शेल्टर होम में बिना खाना और जरूरी सुविधाओं के रहने को मजबूर हैं. इसके जवाब में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने बेंच से कहा कि प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट के कहे गए सभी ज़रूरी कदम राज्य सरकार उठा रही है और उनकी रिपोर्ट भी फाइल कर रही है.

क्या थे राज्यों के लिए SC के निर्देश?

सुप्रीम कोर्ट (SC) ने सभी राज्यों को आदेश दिया था की वे उस रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को आसान बनाएं जो प्रवासी मजदूरों को अपने घर जाने के लिए करानी पड़ती है. साथ ही मजदूर जहां फंसे हुए हैं वहीँ पर उनकी रजिस्ट्रेशन में मदद के लिए हेल्प डेस्क बनाएं. बॉम्बे हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच ने कहा, ‘ इस समय ना तो हमें यह अधिकार है ना हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ कोई ऑर्डर पास करना चाहते हैं. स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए हमें लगता है कि राज्य सरकार को रिपोर्ट हमें सौपनी चाहिए.

बेंच ने आगे कहा कि अखबारों में रेलवे स्टेशन पर मजदूरों की भीड़ की कई तस्वीरें देखने को मिली,जोकि लॉकडाउन के नियमों के बिलकुल खिलाफ है. उन्होंने राज्य सरकार को 2 जून तक रिपोर्ट सौंपने को कहा.

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