महाराष्ट्र के रत्नागिरी में बांध टूटने से 12 घर बहे, 9 की मौत और 24 लापता

बांध टूटने से 12 से 15 घर पूरी तरह से बह गए हैं. बताया जा रहा है कि जो 24 लोग लापता हुए हैं वो इन्हीं घरों में रहते थे.

मुंबई: महाराष्ट्र में एलोर-शिरगांव गांव के निकट मंगलवार देर रात एक छोटा बांध टूटने से नौ लोगों की मौत हो गई और 20 से ज्‍यादा लोग लापता हो गए. अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी. पुलिस के अनुसार, भारी बारिश के कारण तिवेर बांध मंगलवार रात लगभग आठ बजे ऊपर को बहने लगा और कुछ समय बाद ही इसके टूटने की खबर आ गई. इसके बाद कम से कम सात गावों में बाढ़ आ गई, दर्जनभर घर बह गए.

जिला मुख्यालय से लगभग 90 किलोमीटर दूर पहाड़ी क्षेत्र में स्थित ये प्रभावित गांव दादर, अकले, रिकटोली, ओवाली, करकवने और नंदीवासे हैं. इन गावों की कुल अनुमानित जनसंख्या लगभग 3,000 है.

पुणे और सिंधुदुर्ग से अग्निशमन और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की टीमों के अलावा आस-पास के क्षेत्रों के स्वयंसेवी लोगों ने युद्ध स्तर पर बचाव अभियान शुरू कर दिया है. शीर्ष पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी घटना स्थल को रवाना हो गए हैं.

यह बांध साल 2000 में बना था और क्षेत्र के लोगों का दावा है कि उन्होंने दो साल पहले जिला प्रशासन को इसमें पानी रिसने की सूचना दी थी लेकिन इसकी कोई मरम्मत नहीं हुई.

आपदा प्रबंधन अधिकारी अजय सूर्यवंशी ने कहा कि सभी प्रभावित लोग भेंडेवाड़ी गांव के हैं, जो तिवेर बांध की दीवार के किनारे बसा है और अन्य प्रभावित गांवों में से किसी के मरने की खबर नहीं आई है.

उन्होंने कहा, “कल (मंगलवार) रात गांवों में बाढ़ आ गई थी, लेकिन अब बांध का पानी कम होने और बारिश की रफ्तार कम होने से स्थिति सामान्य है.” पुलिस को पानी से अब तक सात शव मिले हैं और शेष लोगों की तलाश जारी है. पानी में ग्रामीणों के लगभग 20 वाहन भी बह गए.

लगातार हो रही बारिश

महाराष्ट्र के ज्यादातर हिस्से में पिछले पांच दिनों से मूसलाधार बारिश हो रही है, और मंगलवार को प्रदेश भर में बारिश से संबंधित घटनाओं में कम से कम 40 लोगों की मौत हो गई. प्रदेश सरकार ने एहतियातन मुंबई में मंगलवार को सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया है.

अधिकारियों के अनुसार, मलाड उपनगर में पिंपरीपाड़ा में एक स्कूल के अहाते की दीवार उससे सटकर बनीं कुछ झोपड़ियां पर गिर गई थी जिससे 13 लोगों की मौत हो गई थी. इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर अब 19 हो गई है.

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), मुंबई अग्निशमन और अन्य एजेंसियों ने मलबे में फंसे लोगों को निकालने के लिए व्यापक बचाव अभियान चलाया. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने राज्य विधानसभा को बताया कि मुंबई में साल 1974 के बाद 24 घंटों में हुई सर्वाधिक बारिश में लगभग 75 लोग घायल हुए हैं.

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