क्या महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ गठबंधन कांग्रेस को कर देगा उनकी विचारधारा से दूर?

कांग्रेस के कई बड़ी नेताओं ने इस संभावित गठबंधन का विरोध किया है वहीं कुछ ने इसे जरूरत बताया है.

महाराष्ट्र में चुनाव कब के निपट चुके हैं लेकिन सरकार बनने का मुहूर्त अभी तक नहीं निकल पाया है. कहा जा रहा है कि कांग्रेस के समर्थन से शिवसेना सरकार बना सकती है, वहीं सवाल ये भी उठ रहे हैं कि क्या कांग्रेस खुद को बचाने के लिए अपनी विचारधारा को दांव पर लगा रही है?

कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने न सिर्फ शिवसेना से मिलकर सरकार बनाने की वकालत की है बल्कि इसके लिए बाकायदे पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी भी लिखी है. राष्ट्रीय स्तर पर मुश्किल से जूझ रही पार्टी की विचारधारा से ऊपर पार्टी के बारे सोचने की बात कही है.

एक बड़े नेता ने सोनिया गांधी को लिखा है कि ‘शिवसेना के साथ गठबंधन करना विचारधारा से समझौता करना नहीं बल्कि विचारधारा की कूटनीतिक तरीके से रक्षा करना है.’ कांग्रेस में एक बड़ा तबका शिवसेना के साथ गठबंधन को लेकर असहज हो गया था लेकिन तभी कई नेताओं को ये अहसास हुआ कि बीजेपी के वर्चस्व से निपटने का यही तरीका हो सकता है.

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शरद पवार और सोनिया गांधी

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नेता शरद पवार और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच भी इस मसले को लेकर बहस हो चुकी है. यहां तक कि महाराष्ट्र कांग्रेस के कुछ विधायकों ने ऐसा होने पर पार्टी छोड़ने की धमकी भी दी. एके एंटनी, केसी वेनुगोपाल, और मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे बड़े नेताओं ने इस संभावित गठबंधन का पुरजोर विरोध किया.

उधर एक राज्यसभा सांसद ने इसे शिवसेना की सामाजिक छवि बदलने की कोशिश कहा है. सांसद ने इशारा किया कि नई संभावनाओं से तालमेल बिठाने के लिए पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने राजनैतिक विचारधारा से समझौता करना स्वीकार किया है.

शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत से जब पार्टी की पुरानी कांग्रेस विरोधी और कट्टर हिंदुत्ववादी छवि के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इसका डिप्लोमेटिक जवाब दिया कि कांग्रेस ने आजादी के आंदोलन में हिस्सा लिया है और महाराष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. इस बात को हमेशा याद रखा जाना चाहिए.

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