मैं सरकार का ना प्रिंसिपल-ना रिमोट कंट्रोल, उन्हें भुगतना पड़ा मैं ही वापस आऊंगा…का खामियाजा- शरद पवार

शरद पवार (Sharad Pawar) ने कहा कि पिछले 5 साल में महाराष्ट्र (Maharashtra) में भी अगर देखा जाए तो लोग सरकार से खुश नहीं थे. जो शिवसेना (Shiv Sena) का वोटर है वह भी राज्य की बीजेपी सरकार से खुश नहीं था.
I am not principal or remote control of Maharashtra government, मैं सरकार का ना प्रिंसिपल-ना रिमोट कंट्रोल, उन्हें भुगतना पड़ा मैं ही वापस आऊंगा…का खामियाजा- शरद पवार

शिवसेना के मुखपत्र सामना के संपादक संजय राउत और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख शरद पवार के बीच इंटरव्यू का एक वीडियो जारी किया गया है. इस इंटरव्यू में संजय राउत ने महाराष्ट्र और केंद्र की राजनीति से संबंधित कई महत्वपूर्ण सवाल शरद पवार से किए, जिसको लेकर शरद पवार ने भारतीय जनता पार्टी की राज्य में पूर्ववर्ती सरकार पर कटाक्ष किए. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में सरकार का पतन का कारण उनकी खुद की सोच थी.

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इंटरव्यू के दौरान शरद पवार (Sharad Pawar) ने कहा कि अगर आप लोकसभा के चुनाव में देखें तो महाराष्ट्र के वोटरों ने केंद्र में जो सरकार है उनके ही पक्ष में वोट दिया और जब राज्य का प्रश्न आया तब महाराष्ट्र में एक अलग चित्र देखने मिला और केवल महाराष्ट्र ही नहीं मध्य प्रदेश राजस्थान झारखंड छत्तीसगढ़ में भी देखा गया कि जो बीजेपी सरकार है लोगों ने उसके खिलाफ वोट किया. लोगों ने लोकसभा में अलग और विधानसभा में अलग तरह से वोट दिया.

शिवसेना का वोटर बीजेपी से खुश नहीं था

शरद पवार (Sharad Pawar) ने कहा कि पिछले 5 साल में महाराष्ट्र (Maharashtra) में भी अगर देखा जाए तो लोग सरकार से खुश नहीं थे. जो शिवसेना (Shiv Sena) का वोटर है वह भी राज्य की बीजेपी सरकार से खुश नहीं था. पिछले 5 साल में बीजेपी ने शिवसेना को किस तरह से रोका जाए उसके लिए काम किया और इसके कारण शिवसेना के कार्यकर्ता भी अस्वस्थ थे. बीजेपी ने शिवसेना को किनारा करने की कोशिश की और एक संदेश देने की कोशिश की कि अब जो बीजेपी करेगी वही सही है और बीजेपी ही सबसे बड़ी पार्टी है, यह बात लोगों को अच्छी नहीं लगी.

किसी भी राजनेता को जनता के बीच में यह जाकर नहीं कहना चाहिए कि मैं ही वापस आऊंगा और महाराष्ट्र के उस समय के मुख्यमंत्री बार-बार यही कह रहे थे कि मैं वापस आऊंगा, मैं वापस आऊंगा और यह बात लोगों को अच्छी नहीं लगी. किसी भी नेता को यह नहीं सोचना चाहिए कि वह हमेशा के लिए ही सत्ता में रहेंगे. इस देश के वोटरों ने इंदिरा गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी जैसे मजबूत नेता जिसके साथ पूरा देश खड़ा रहता था उसे भी गिरा दिया, इसलिए इस तरह की गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए.

उन्होंने शिवसेना से धोखा किया

बीजेपी (BJP) जो सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, बीजेपी को जो 105 सीट आए थे उसके लिए शिवसेना भी जिम्मेदार है. यह मेरा स्पष्ट मानना है कि अगर बीजेपी को मिले शिवसेना के वोट हटा दिए जाएं तो हर बार की तरह बीजेपी को 50 60 सीट ही आती थीं. इसलिए जो बार-बार 105 105 कह रहे हैं उन्हें समझना चाहिए कि जिस दूसरी पार्टी की वजह से उन्हें 105 सीटें आई उन्होंने उनके साथ ही धोखा करने की कोशिश की.

शरद पवार ने कहा कि मैं जिस बालासाहेब ठाकरे को जानता हूं उनकी विचारधारा थी उनके काम करने का तरीका था वह बीजेपी से बिल्कुल मेल नहीं खाता है. बालासाहेब ठाकरे की जो भूमिका थी और जिस तरह से बीजेपी काम करती है उस में जमीन आसमान का फर्क है. बालासाहेब ठाकरे ने कुछ व्यक्तियों का सम्मान किया था जिसमें अटल बिहारी वाजपेई लालकृष्ण आडवाणी और प्रमोद महाजन शामिल हैं. उनके सम्मान की वजह से वह साथ में आए थे और राज्य में भी सत्ता बनाई थी. कांग्रेस और शिवसेना में हमेशा से अनबन रही है यह मैं नहीं मानता हूं.

बाला साहेब की राह पर उद्धव

यह पहले भी सिद्ध हो चुका है की राष्ट्रीय मुद्दे पर अपने भविष्य को ना सोचते हुए शिवसेना (Shiv Sena) ने कांग्रेस  (Congress) का समर्थन किया था. जिस समय इंदिरा गांधी के खिलाफ पूरा देश खड़ा था उस समय देश में डिसिप्लिन लाने के लिए बालासाहेब ठाकरे इंदिरा गांधी के साथ खड़े नजर आए थे. यह सुनकर हम सभी को आश्चर्य हुआ था की बालासाहेब ठाकरे ने चुनाव में अपने उम्मीदवार भी खड़े नहीं किए थे. क्या कोई राजनीतिक पार्टी ऐसा करेगी यह कोई नहीं सोच सकता. पहले भी शिवसेना और कांग्रेस के बीच में ज्यादा मतभेद नहीं थे और अब उसी रास्ते पर उद्धव ठाकरे चलते हुए नजर आ रहे हैं

पवार ने कहा कि मेरे और शिवसेना के बीच में भी कुछ मुद्दों पर जरूर मतभेद थे पर इसका यह मतलब नहीं था कि हम एक दूसरे से बात भी नहीं करते थे. अभी के नेतृत्व से ज्यादा उस समय में शिवसेना के नेताओं से और बालासाहेब ठाकरे से मैं बात किया करता था. बालासाहेब ठाकरे किसी व्यक्ति के लिए छुपकर मदद नहीं करते थे, वह चाहे दूसरी पार्टी का भी हो तो वह खुलकर मदद करते थे. अपने घर की ही बात बताता हूं सुप्रिया सुले के पहली बार चुनाव लड़ने के समय बालासाहेब ठाकरे ने शिवसेना से कोई उम्मीदवार ही खड़ा नहीं किया था और यह केवल बालासाहेब ठाकरे ही कर सकते हैं.

मैं ना ही सरकार का प्रिंसिपल हूं और ना ही रिमोट कंट्रोल

महाराष्ट्र में जो तीन पाटिया साथ में आई है उसका फायदा महाराष्ट्र की जनता को मिलता हुआ नजर आ रहा है ऐसा मेरा मानना है. परेशानी यह है कि पिछले कुछ समय से कोरोना के कारण बाकी चीजें रुक गई है और पूरा फोकस इसी पर है. अगर तीनों पार्टियां साथ नहीं होती तो कोरोनावायरस (Coronavirus) पूरी तरह से कंट्रोल नहीं हो सकता था. आप ही विचार करिए तीन अलग-अलग विचारधाराओं की पार्टी एक साथ आ रही हैं और मुख्यमंत्री के साथ खड़ी हैं.

शरद पवार ने कहा कि मैं ना ही सरकार का प्रिंसिपल हूं और ना ही रिमोट कंट्रोल. रिमोट कंट्रोल से सरकार रूस जैसे देश में चलती है, जहां पर अब पुतिन 2036 तक राष्ट्रपति रहेंगे. इसका मतलब वहां पर जो लोकशाही है उसे एक तरफ कर दिया गया है और केवल एक ही व्यक्ति के पास सत्ता है. हमारी सरकार लोकतंत्र की सरकार है और यह सरकार रिमोट कंट्रोल पर कभी नहीं चल सकती.

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