मुगलई का किंग नहीं रहा, पर लोगों की जीभ पर राज कर रहा बिरयानी का स्वाद

करीब 6 दशकों से मुंबई में बिरयानी किंग ( biryani king) के नाम से मशहूर फेमस जफरभाई कोरोना के शिकार हो गए. जफर भाई ने अपने स्वाद के जादू से बिरयानी को मुंबई ( mumbai) ही नही मुंबई के बाहर भी एक लोकप्रिय डिश बना दिया
biryani king, मुगलई का किंग नहीं रहा, पर लोगों की जीभ पर राज कर रहा बिरयानी का स्वाद

भारत में बिरयानी जैसे जायके को पाॊ्पुलर बनाने वाला शख्स नहीं रहा. करीब 6 दशकों से मुंबई में बिरयानी किंग के नाम से मशहूर फेमस जफरभाई को कोरोना वायरस ने लील लिया. जफर भाई ने अपने स्वाद के जादू और आन्त्प्रन्योरशिप से बिरयानी को मुंबई और मुंबई के बाहर भी लोकप्रिय बना दिया. उनके दुनिया छोड़ने के बाद भी बिरयानी लोगों के बीच लोकप्रिय रहे, हिंदुस्तान में बिरयानी का स्वाद लोगों के सिर चढ़कर बोले यहीं उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी भारत में बिरयानी की लोकप्रियता जैसे बढ़ रही है वह दिन दूर नहीं है जब यह राष्ट्रीय भोजन के रूप में लोकप्रिय हो जाएगा. वैसे बिरयानी एक मांसाहारी भोजन है पर हिंदुस्तान में उसका सरलीकरण करके उसका एक रूप वेज बिरयानी भी काफी लोकप्रिय हो चुका है. देश में शाकाहारी लोगों की संख्या को देखते हुए बड़े बिरयानी स्टोर भी अब वेज बिरयानी की प्लेट हाजिर करते हैं .हालत ये है कि साल 2018-19 में गूगल पर भारतीय खाद्य पदार्थों में सबसे ज्यादा बिरयानी डिश सर्च हुई.

मुगलई को नया अंदाज देकर बिरयानी को लोकप्रिय बनाया
जफरभाई ने शुरुआत के दिनों में मुंबई के ग्रांट रोड स्थित कमाठीपुरा एरिया में एक छोटा सा किचन चलाते थे. उनके किचेन का स्वाद ऐसा पाॊपुलर हुआ कि धार्मिक आयोजनों, नेताओं की रैलियों और अन्य कार्यक्रमों में लोग उनसे फूड पैकेट मंगाने लगे. जफरभाई खुद साइकिल से डिलिवरी करते । पर उन्होंने अपने डिशेस को लेकर नए-नए एक्सपेरिंमेंट करना नहीं छोड़ा .भारत के मुगलई खानों को उन्होंने नई पीढ़ी के स्वाद और रुचि के हिसाब चेंज किया और धीरे-धीरे उनकी डिमांड बढ़ने लगी.

बाद में उन्होंने दिल्ली दरबार नाम से चेन खोला जो बहुत पाॊपुलर हुए. मुंबई में मरीन लाइन्स, माहिम, ग्रांट रोड, जोगेश्वरी, वाशी, डोंगरी, मोहम्मद अली रोड तक जफरभाई के दिल्ली की कई ब्रांच हैं. उन्होंने मुंबई को मुगलई खाने के शौकीनों का पसंदीदा अड्डा बना दिया. बिरयानी के अलावा मुंबईकरों के बीच में दाल गोश्त,चिकन टंगड़ी और रान सिकंदरी को पाॊपुलर कराने का श्रेय भी जफर भाई को है. भारतीय उपमहाद्वीप में लोगों ने बिरयानी को अपने क्षेत्र और स्वाद के हिसाब से इसे ढाल लिया . बिरयानी के हार्डकोर शौकीन इसे पचा नहीं पाते पर इस फ्यूजन के चलते बिरयानी दिन प्रति दिन और लजीज और लोकप्रिय होती जा रही है.

देश के हर हिस्से मे बिरयानी का एक अलग अंदाज
भारत में बिरयानी ईरान से आई पर यहां आकर इसका स्वरूप बदल गया. ईरान का बेरयान यहां आकर बिरयानी बन गया. बेरयान को आटे में पकाते थे इसलिए वो रोटी वाली डिश थी, भारत में इसे चावल का डिश बना दिया गया. 17वीं शताब्दी में मुगल बादशाह शाहजहां के दौर में ये रेसिपी आई पर 400 सालों में इसका स्वरूप देश -भाषा और पानी और स्वाद के अनुसार सैकड़ों रूप रंग में बदल गई. सबसे पहले बात करते हैं बॉम्बे बिरयानी की, यह स्वाद के लिहाज से इसे पुलाव कहना गलत नहीं है. मसाले इसमें कम और स्वाद इसका माइल्ड होता है इसलिए ये बिरयानी के हार्डकोर शौकीन लोगों को ज्यादा पसंद नहीं आती पर मुंबई में लोग खूब पसंद करते हैं.

मुरादाबादी बिरयानी की खासियत उसके मसाले हैं. यदि मुरादाबादी बिरयानी पर गौर करें तो मिलता है कि इसे बनाने के लिए कच्चे चावल का इस्तेमाल किया जाता है साथ ही इसे रंग से दूर रखा जाता है इसलिए देखने में ये सुंदर भले न लगे है उत्तर भारत में लोग इसे पसंद से खाते हैं. छोटे-छोटे स्टालों पर भी हैदराबादी के बाद सबसे ज्यादे मुरादाबादी कीवर्ड ही चलता है. दक्षिण में अंबुर बिरयानी अपने मूल स्वभाव और रंगरूप से काफी अलग है पर यह भी खूब लोकप्रिय हो रही है.

तमिलनाडु की मशहूर अम्बुर बिरयानी में चावल छोटे और बहुत मोटे होते हैं साथ ही इसके मसलों में दक्षिण भारत की खुशबू मिलती है . दक्षिण के लोगों ने इसे अपने स्वाद के हिसाब से इसे डिवेलप किया है. अगर बिरयानी के शौकीन हैं तो केरल की थलासेरी बिरयानी भी आपको भा सकती है. इस बिरयानी में चावल मोटा होता है साथ ही जो मीट होता है उसे रोस्ट करके डाला जाता है. बिरयानी थोड़ी खटास लिए होती है इसलिए भी ये दक्षिण के लोगों को ज्यादा पसंद आती है.

कोलकाता की बिरयानी मसालेदार होती है मगर अंडा और आलू इसकी पहचान है. अब बात करते हैं पाकिस्तानी बिरयानी की. इसका नाम भले ही पाकिस्तानी है पर बिकती भारत में ज्यादे है. पर बिरयानी के हार्डकोर शौक़ीन इसे पसंद नहीं करते हैं. इनका मानना है कि जब बिरयानी के लिए केसर, मसाले, चावल और मीट काफी है तो आप उसमें सूखे मेवे डालकर जायका क्यों बिगाड़ रहे हैं.

वेज बिरयानी और पुलाव बिरयानी
हिंदुस्तान की जो आबादी मांसाहारी है वो भी हर रोज मांस नहीं खाती उसे बिरयानी में सब्जी और अंडे बहुत पसंद आते हैं .इसी तरह शाकाहारी लोग भी इस जायके का स्वाद भरपूर लेते हैं . देश का एक बड़ा हिस्सा ऐसी आबादी का है इसलिए इसकी लोकप्रियता दिनों दिन बढ़ती जा रही है .बादशाहों के यहां जो पुलाव पकता था, उसमें मीट के साथ कई सब्जियों या दालों का इस्तेमाल होता था. ऐसे में. यह कयास लगाना कि वेज पुलाव इसी से निकला है, गलत नहीं होगा. कुछ लोग इसे वेज बिरयानी कहते हैं, जो सही भी है दरअसल भारत में प्राचीन समय से सब्जियों की बहुतायत थी और यहां के लोगों की जीभ पर दाल और सब्जी की लत लगी हुई थी. जैसे अरब और यूरोप में लोगों की हर डिश में मांस मिल जाता है उसी तर्ज पर भारत में बिरयानी में सब्जी पहुंच गई.

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