‘ऐसा लगा शायद बचेंगे ही नहीं, चारों तरफ पानी ही पानी था’, महालक्ष्मी एक्सप्रेस में फंसे शख्स की आपबीती

NDRF की टीम राहत और बचाव कार्य में जुटी है. ट्रेन में सवार महिलाओं और बच्‍चों को सबसे पहले नावों में भरकर सुरक्षित स्‍थानों पर लाया जाएगा.

मुंबई. जोरदार बारिश के चलते देश की आर्थिक राजधानी में जगह-जगह पानी भर गया है. फिलहाल सबकी निगाहें महालक्ष्‍मी एक्‍सप्रेस पर हैं, जो बदलापुर और वांगणी के बीच पानी से लबालब ट्रैक पर फंस गई है. NDRF के जवान ट्रेन तक पहुंच चुके हैं और राहत कार्य शुरू कर दिया गया है. यात्रियों को यहां से निकालकर डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित खुले स्‍थान पर ले जाया जा रहा है. यहां पर खाने, पानी और मेडिकल सुविधाओं के इंतजाम किए गए हैं.

रेस्क्यू ऑपरेशन में बचाए गए लोगों से TV9 के संवाददाता ने बातचीत की. जानते हैं रात भर ट्रेन में फंसे लोगों ने क्या कहा- 

ट्रेन में सवार यात्रियों ने अपना गुस्‍सा जाहिर किया. उनका आरोप है कि राहत मिलने में देरी हुई. पैसेंजर्स ने यह भी कहा कि लंबी दूरी की ट्रेन में पैंट्रीकार तक नहीं थी. उन्‍हें बड़ी देर से कुछ खाने को नहीं मिला. एक यात्री ने कहा, “9 बजे रात से फंसे हुए थे लेकिन खाने का कोई इंतज़ाम नहीं किया. सिर्फ पानी दिया गया था. राहत-बचाव दल भी नहीं पहुंची मुझे तो लोकल लोगों ने बचाया.”

एक आदमी ने ये पूछे जाने पर कि क्या लग रहा था आपको, उसने बताया कि, “ऐसा था शायद हम लोग बचेंगे नहीं, क्योंकि चारो तरफ पानी ही पानी दिखाई दे रहा था. लेकिन रेलवे प्रशासन ने अभी जो किया है उसके लिए थैंकयू.”  

रेस्क्यू किए गए एक बुजुर्ग दंपत्ति ने कहा कि, “NDRF में कोई नहीं आया, बिस्किट-चाय कुछ नहीं मिला सिर्फ पानी मिला. गांव वालों ने मदद की. 12-13 घंटे से फंसे थे. AC, फैन भी बंद हो गया. रात 9:30 बजे से भूखे थे. कोई सुविधा नहीं पहुंचाई गई.”

वहीं एक बुजुर्ग महिला ने कहा कि, हम सुबह 6 बजे से फंसे थे. ट्रेन में खाने-पीने की कोई व्यवस्था नहीं थी.

लता खंडेकर नाम की एक महिला ने बताया, “जब से ट्रेन रुकी है तब से फंसे हुए हैं. सुबह से ही फंसे हुए हैं. सुबह होने पर मदद पहुंची. हम लोग रुके हुए थे. बाकी लोग जा रहे थे.” 

मदद में देरी से पहुंचने से गुस्साई एक महिला ने कहा, “रेलवे कबसे हमसे कह रहा था इंजन आएगा. जो लोग बुजुर्ग थे उनको चलने में दिक्कत हो रही थी, इसलिए वो रुके थे. वहीं हमलोग इतना दूर घूम कर चल के आए. वीडियो रिकॉर्डिंग करने वालों का मैं धन्यवाद करती हूं. मैंने सुबह से 100 नंबर पर कॉल किया किसे ने जवाब नहीं दिया, CRPF ने फोन उठाया और जवाब दिया कि ट्रेन वाला मामला हमारे अंडर नहीं आता है, हम मदद नहीं कर सकते. नेटवर्क नहीं आ रहा था और बैटरी भी सभी फोन की कम हो रही थी. इसलिए हमने कहा कि आप हमारी मदद मत करो लेकिन किसी एथॉरिटी को आगे इस बात की जानकारी दे दो. लेकिन उन्होंने ये कहकर फोन काट दिया कि हम कुछ नहीं कर सकते. गांव वालों को थैंकयू.”

रेस्क्यू किए गए एक आदमी ने NDRF की टीम को शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि, “सुबह से ही मदद मिलनी शुरू हो गई थी. यहां की लोकल पब्लिक ने बहुत मदद की. रेस्क्यू टीम ने अच्छा काम किया है.”

यात्रियों का कहना है कि रेलवे और पुलिस प्रशासन ने उनको मदद पहुंचाने में देरी की और उन्होंने शिकायतों को नजरअंदाज भी किया. ट्रेन बारिश में रात से फंसी हुई थी. ट्रेन में कुछ खाने की व्यवस्था भी नहीं थी. हालांकि, सुबह गांव वालों ने ट्रेन में फंसे लोगों की मदद की.

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