बाला साहेब ठाकरे के मातोश्री से ‘बाहर’ निकली शिवसेना

एक ज़माने में सोनिया गांधी की इतालवी नागरिकता को लेकर बाला साहब ठाकरे उनपर हमलावर रहते थे, इतना ही नहीं शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में सोनिया गांधी के इटली मूल को लेकर लगातार कुछ-न-कुछ छपता रहता था.

महाराष्ट्र चुनाव के बाद शिवसेना कई सारे बदलावों की गवाह बनी. यह पहली बार था जब शिवसेना परिवार का कोई सदस्य चुनाव में उतरा. पिछले हफ्ते शिवसेना ने बीजेपी और एनडीए से भी रिश्ते तोड़ लिए हैं. फ़िलहाल शिवसेना मुख्यमंत्री बनाने के नाम पर अपने धुर विरोधियों कांग्रेस और एनसीपी से बातचीत कर रही है.

पिछले कुछ दिनों में शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे ने मातोश्री से बाहर होटलों में जाकर कांग्रेस नेताओं से मुलाकात की. शिवसेना-बीजेपी गठबंधन में भी यह कभी नहीं हुआ करता था कि उद्धव ‘मातोश्री’ से बाहर जाकर किसी से मिलें.

एक समय था जब लालकृष्ण आडवाणी, शरद पवार, सुषमा स्वराज, अरुण जेटली, प्रमोद महाजन, विलासराव देशमुख और रजनीकांत जैसी शख्सियत ‘मातोश्री’ जाकर बाला साहब ठाकरे से मुलाकात करते थे.

उस जमाने में ‘मातोश्री’ राजनीति का पावर सेंटर हुआ करता था. 2012 के राष्ट्रपति चुनाव में प्रणव मुखर्जी ने भी शरद पवार के साथ ‘मातोश्री’ जाकर खुद के लिए समर्थन मांगा था.

सोमवार को उद्धव ठाकरे ने बांद्रा के होटल ताज लैंड्स में शरद पवार से मुलाकात की और नए गठबंधन में सरकार की संभावनाओं पर चर्चा की. यही नहीं शिवसेना के दूत अब दिल्ली जाकर अहमद पटेल या अमित शाह जैसे नेताओं से मुलाकात करने लगे हैं. उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस के 44 विधायकों का समर्थन हासिल करने के लिए कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी फोन पर बातचीत की.

एक ज़माने में सोनिया गांधी की इतालवी नागरिकता को लेकर बाला साहब ठाकरे उनपर हमलावर रहते थे, इतना ही नहीं शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में सोनिया गांधी के इटली मूल को लेकर लगातार कुछ-न-कुछ छपता रहता था.

बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने इस प्रकरण को लेकर कहा, ‘शिवसेना के जहाज ने कम से कम जमीन तो छू ही ली है. उसने यह तय किया है कि अगर सीएम के पद के लिए उसे एनसीपी-कांग्रेस के दरवाजे पर भी खड़ा होना पड़े तो वह जाएगी.’

उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान अमित शाह दो बार ‘मातोश्री’ गए थे. पवार साहब और अहमद पटेल को अगर शिवसेना का समर्थन भी चाहिए होगा तो वह कभी मातोश्री नहीं जाएंगे.

वरिष्ठ नेता ने आगे कहा, ‘पांच साल सरकार चलाने के दौरान संतुलन बनाए रखने के लिए देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे से लगातार मुलाकात की लेकिन ठाकरे परिवार को अब अपने नए सहयोगियों के साथ प्रोटोकॉल का ख्याल रखना होगा. अब उन्हें असली खेल समझ आएगा.’

एक पत्रकार ने बताया कि दादर (शिवसेना ऑफिस से) से दिल्ली तक ठाकरे अब बहुत आगे आ चुके हैं.